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झारखंड: मृत लोगों के नाम का भी मिल रहा राशन, खुलासा होते ही 50 हजार मृत लोगों के नाम हटाए गए, 2.36 लाख की चल रही है जांच

By एस पी सिन्हा | Updated: June 25, 2025 15:14 IST

Jharkhand:इनके पास कोई जस्टिफिकेशन नहीं है कि वो कार्ड रखें। ये ऐसे लोग हैं जो जमीन कम दिखाकर राशन कार्ड लिए हैं।

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Jharkhand: केंद्र सरकार के निर्देश पर किए जा रहे सत्यापन के बाद झारखंड में अब तक लगभग 50 हजार मृत लाभुकों का नाम राशन कार्ड से हटाया गया है। सूत्रों के अनुसार झारखंड में 2.36 लाख राशन कार्ड रद्द किए जाएंगे। जांच में इनके फर्जी होने की पुष्टि हुई है। जांच में पता चला कि पिछले कई वर्षो से 2.36 लाख फर्जी राशनकार्ड धारी राशन का उठाव कर रहे थे। चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई है कि कई कार्ड ऐसे लोगों के नाम पर भी है, जो बिहार, यूपी, दिल्ली, हरियाणा, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में भी राशन कार्ड बनाकर मुफ्त में राशन ले रहे हैं।

ऐसे लोगों की तादाद भी हजारों में है, जो आर्थिक तौर पर सक्षम होने के बाद भी फर्जी तरीके से कार्ड बनवाकर मुफ्त राशन का लाभ उठा रहे हैं। ऐसे में यह करोडों का घोटाला भी माना जा सकता है

खाद्य सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता विभाग अब इन्हें रद्द करने की प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। दरअसल, केंद्र सरकार ने झारखंड सरकार को 2,54,857 मृत लाभुकों की सूची सौंपी थी और निर्देश दिया था कि सत्यापन के बाद इनके नाम हटाए जाएं। हालांकि, अब तक केवल 50 हजार नामों का ही सत्यापन और डिलीशन हो पाया है। शेष करीब 2 लाख से अधिक लाभुकों के नाम का सत्यापन अभी भी लंबित है।

राजधानी रांची में मृत लाभुकों की संख्या 21,171 पाई गई है, लेकिन इनमें से सिर्फ 4500 लाभुकों के नाम ही अब तक राशन कार्ड से हटाए जा सके हैं। इस धीमी प्रक्रिया पर प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। विभाग की जांच में सबसे ज्यादा 35 हजार 834 फर्जी राशन कार्ड में पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) जिले में पाए गए हैं। दरअसल, यह गड़बड़ी तब पकड़ी गई, जब खाद्य सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता विभाग ने 1 फरवरी से 21 फरवरी तक वन नेशन वन कार्ड योजना की भौतिक जांच के क्रम में राशन कार्ड के साथ आधार कार्ड को लिंक कराने का अभियान चलाया।

आधार लिंक होने के बाद जब ई-पॉश मशीन पर अंगूठे का निशान लिया गया तो पता चला कि कई राशन कार्ड धारी फर्जी आधार कार्ड के आधार राशन उठा रहे हैं। बता दें कि सरकार की गृहस्थ योजना के तहत पात्र लाभुकों को प्रति सदस्य 5 किलोग्राम मुफ्त खाद्यान्न दिया जाता है।

जनवरी 2023 से यह सुविधा निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि अब भी 2 लाख मृत लाभुकों के नाम पर हर महीने लगभग 10 लाख किलोग्राम राशन उठाया जा रहा है, जो सरकारी संसाधनों में गड़बड़झाला की ओर इशारा करता है। अगर इस आंकड़े से गणना करें, तो अब भी 2 लाख से अधिक मृत लाभुकों के नाम पर प्रतिमाह लगभग 10 लाख किलोग्राम राशन का उठाव हो रहा है। 

खाद्य आपूर्ति, स्वास्थ्य एवं आपदा मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि 3.93 लाख राशन कार्डधारियों ने कार्ड बनने के बाद कभी भी राशन नहीं लिया है। इसका साफ मतलब है कि संबंधित कार्डधारियों को राशन की जरूरत ही नहीं है या फिर गलत लोगों के नाम से राशन कार्ड बना हुआ है। ऐसी स्थिति में इन कार्डों को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

उन्होंने कहा कि राशन कार्डों को रद्द करने के पहले इसकी जांच की जा रही है। डॉ अंसारी ने बताया कि अभी तक 50,000 राशन कार्ड निरस्त किए गए हैं। 2.36 लाख की जांच की जा रही है। इसके साथ ही 70,569 ऐसे लोगों की जांच चल रही है, जिन्होंने 10 से ज्यादा संख्या परिवार की दिखाई गई है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा सरकार राज्य स्तर पर इसके लिए टास्क फोर्स के गठन पर भी विचार कर रही है।

डॉ इरफान अंसारी ने बताया कि राज्य में 65 हजार ऐसे लोग ऐसे हैं, जो धान भी बेच रहे हैं और राशन कार्ड का भी लाभ ले रहे हैं। जांच में यह पाया गया है कि इन्होंने 50- 200 क्विंटल से ज्यादा धान बेचा है। इनके राशन कार्ड को भी रद्द करने की तैयारी है। इनके पास कोई जस्टिफिकेशन नहीं है कि वो कार्ड रखें। ये ऐसे लोग हैं जो जमीन कम दिखाकर राशन कार्ड लिए हैं।

उन्होंने बताया कि जांच में ये भी मामला सामने आया है कि 47,773 ऐसे कार्ड हैं, जहां राशन कार्ड उठाव नहीं हुआ है। ये या तो शौकिया या अन्य कारणों से राशन कार्ड रखे हुए है। उन्होंने बताया कि ऐसे लोगों का भी राशन कार्ड रद्द किया जाएगा। डॉ अंसारी ने बताया कि सरकार असली लाभुकों का चयन कर रही है और उन्हें किसी भी सूरत में राशन उपलब्ध कराएगी।`

टॅग्स :झारखंडहेमंत सोरेनFood Corporation of India
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