रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में महिला कैदी का किया गया यौन शोषण, हुई गर्भवती, कराया गया गर्भपात! नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
By एस पी सिन्हा | Updated: May 18, 2026 18:54 IST2026-05-18T18:53:57+5:302026-05-18T18:54:07+5:30
बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार की नाक के नीचे कानून के रक्षक ही भक्षक बन चुके हैं और जेल के भीतर महिला कैदी का लगातार मानसिक व शारीरिक शोषण किया गया है.

रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में महिला कैदी का किया गया यौन शोषण, हुई गर्भवती, कराया गया गर्भपात! नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
रांची: झारखंड की राजधानी रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में महिला कैदी का यौन शोषण कर गर्भवती करने का मामला सामने आने के बाद सियासी गलियारे में हड़कंप मच गया है. इस मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिख लिखा है. उन्होंने कारा महानिरीक्षक पर इस गंभीर आपराधिक मामले को दबाने और राज्य प्रशासनिक तंत्र की सीधी संलिप्तता का आरोप लगाया है. बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार की नाक के नीचे कानून के रक्षक ही भक्षक बन चुके हैं और जेल के भीतर महिला कैदी का लगातार मानसिक व शारीरिक शोषण किया गया है.
मुख्यमंत्री को भेजे गए आधिकारिक पत्र में नेता प्रतिपक्ष ने प्रशासनिक स्रोतों के हवाले से दावा किया है कि बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार (होटवार) के अधीक्षक कुमार चंद्रशेखर ने जेल में बंद एक महिला कैदी (23) का यौन शोषण किया, जिससे वह गर्भवती हो गई. बाबू लाल मरांडी ने यह भी आरोप लगाया है कि इस जघन्य अपराध पर कारा महानिरीक्षक (आइजी जेल) मामले को रफा-दफा करने, फाइलों को गायब कराने और कारा अधीक्षक को बचाने की साजिश रच रहे हैं. महिला कैदी को रांची पुलिस ने पांच नवंबर 2025 को एनडीपीएस एक्ट में न्यायिक हिरासत में बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा भेजा था.
इस पूरे घटना का दिलचस्प पहलू है कि सबसे पहले प्रेगनेंसी किट से हुई जांच में महिला कैदी के गर्भवती होने को पुष्टि हुई थी. इथर, 16 मई की रात जेल के डॉक्टरों की टीम ने महिला कैदी का ब्लड सैंपल लेकर जांच के लिए जेल में इम्पैनल ब्लड बैंक बायोकेम लैब को भेजा. लैब ने जांच कर रविवार को रिपोर्ट बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा को उपलब्ध कराई, जिसमें रिपोर्ट निगेटिव आई है. इसकी पुष्टि करते हुए जेल के चिकित्सक डॉ मुकेश कुमार ने बताया कि जांच रिपोर्ट के हिसाब से महिला गर्भवती नहीं है.
इसके बावजूद सदर अस्पताल और रिम्स के गायनेकोलॉजी विभाग को पत्र लिखकर महिला कैदी की जांच करने का आग्रह किया गया है, जिससे आरोप सत्यता की जांच की जा सके. मरांडी ने कहा कि जिस कारागार परिसर की सुरक्षा और न्याय-अभिरक्षा की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होती है, वहां इस स्तर का अनाचार होना मुख्यमंत्री के शासनकाल की ध्वस्त हो चुकी प्रशासनिक नियंत्रण व्यवस्था का प्रत्यक्ष प्रमाण है.
बाबूलाल मरांडी ने अपने पत्र में केवल जेल प्रबंधन ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक तंत्र के शीर्ष अधिकारियों की संलिप्तता पर भी तीखे सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि इस अक्षम्य संस्थागत अपराध की सूचना मिलने पर तुरंत कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के बजाय, प्रशासनिक तंत्र के सर्वोच्च अधिकारी इस पूरे कृत्य को दबाने में जुट गए हैं.
हालांकि जेल के चिकिस्तक डॉ मुकेश कुमार के अनुसार, महिला कैदी ने अप्रैल में जेल के अस्पताल में उबकाई और समय पर पीरियड नहीं आने की शिकायत की थी. डॉक्टर अपराजिता ने जांच की थी. प्रेगनेंसी किट से महिला की यूरिन जांच कराई गई, जिसमें रिपोर्ट पॉजिटिव आई. 14 अप्रैल की पेट दर्द की शिकायत पर उसे सदर अस्पताल ले जाया गया.
दूसरी बार 28 अप्रैल को वहां अल्ट्रासाउंड कराया गया, जांच रिपोर्ट में महिला को अनियमित मासिक धर्म और बच्चेदानी में सिस्ट की पुष्टि हुई है. डॉ मुकेश कुमार के अनुसार, महिला बंदी जेल अधिकारियों को अलग कमरा, मोबाइल और पैसों के लिए ब्लैकमेल कर रही थी. 16 मई की रात भी जब उसका ब्लड सैंपल लिया जा रहा था तो वह बार-बार कह रही थी कि आपलोग मेरी डिमांड याद रखना. पहले डिमांड पूरी करोगे, तभी जांच के लिए बलड सैंपल दूंगी. काफी समझाने पर उसने अपना ब्लड सैंपल दिया.
बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा प्रशासन ने रविवार को मामले की जानकारी रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भगंत्री और जेल आइजी सुदर्शन मंडल को दी है. इस संबंध में उपायुक्त ने बताया कि महिला कैदी की प्रेगनेंसी जांच रिपोर्ट निगेटिव आने की जानकारी जेल प्रशासन की और से रविवार को दी गई है, वे अपने स्तर से मामले की जांच एसडीओ या एडीएम लॉ एंड ऑर्डर से करवाएंगे, जरूरत पड़ी तो चिकित्सकीय टीम का भी सहयोग लिया जाएगा.
इसबीच कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता कमल ठाकुर ने कहा कि बाबूलाल बीते हुए कल हैं और इन सब चीजों के माध्यम से जिंदा रहना चाहते हैं. जेल के डॉक्टर ने जांच में बताया है, न महिला गर्भवती है, न ही उसके साथ कोई आपत्तिजनक काम किया है. उसके बाद भी बाबूलाल अपनी बात रखते रहते हैं और मुंह की खाते रहते हैं. जांच के लिए कमेटी बना दी गई है, जांच होगी और दूध का दूध और पानी का पानी होगा.
वहीं, झामुमो महासचिव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो मामला सामने आया है उसकी जांच होगी और अगर कोई चीजें हैं, तो सामने आ ही जाएगी. इसमें चिट्ठी लिखने की क्या आवश्यकता है? अगर अनैतिक के साथ-साथ अगर अनाधिकृत कार्य हुआ होगा, तो कार्रवाई होगी, उसमें कहां बुरा है, पर बाबूलाल स्टेशनरी बर्बाद क्यों करते हैं? पीएम अब कुछ बचाने की बात करते हैं और वो खर्च करते हैं।