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यूपी में ई-ऑफिस पर निष्क्रिय 44,994 सरकारी कर्मियों का रुकेगा वेतन, ऊर्जा, पीडब्ल्यूडी, कृषि सहित कई विभागों में हुई ई-ऑफिस की अनदेखी  

By राजेंद्र कुमार | Updated: January 11, 2026 20:57 IST

बीते दिनों मुख्यमंत्री योगी इसकी जानकारी हुई. उन्हें पता चला कि बीती 21 नवंबर से 20 दिसंबर के बीच विभिन्न विभागों के 58 प्रतिशत अफसरों और कर्मचारियों ने ई-ऑफिस लाग-इन का इस्तेमाल ही नहीं किया है. 

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने शासन की कार्यप्रणाली को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए ई-ऑफिस प्रणाली को लागू किया हुआ है. सूबे की सत्ता पर काबिज होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 27 अक्टूबर 2017 को प्रदेश में ई-ऑफिस प्रणाली का शुभारंभ किया था. फिर सूबे के सभी विभागों में प्रणाली के जरिए फाइलों के निस्तारण की व्यवस्था को अनिवार्य किया गया. इसके लिए मुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव कार्यालय और सचिवालय के सभी 93 विभागों को इस सिस्टम से जोड़ गया. 

सभी सरकारी विभागों को पेपरलेस करने की सोच के तहत लागू की गई इस व्यवस्था का लखनऊ में ही तमाम सरकारी विभाग इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं. बीते दिनों मुख्यमंत्री योगी इसकी जानकारी हुई. उन्हें पता चला कि बीती 21 नवंबर से 20 दिसंबर के बीच विभिन्न विभागों के 58 प्रतिशत अफसरों और कर्मचारियों ने ई-ऑफिस लाग-इन का इस्तेमाल ही नहीं किया है. 

विभागीय कर्मियों के इस रवैये से सीएम योगी नाराज हुए और उन्होंने इस सिस्टम की अनदेखी करने वाले कर्मियों के खिलाफ एक्शन लेने के निर्देश दिए. बताया जा रहा है सीएम योगी के इस निर्देश के बाद विभिन्न विभागों में कार्यरत 44,994 अधिकारियों और कर्मचारियों का वेतन अटकने के आसार हैं. इन लोगों ने ही ई-आफिस लाग-इन का इस्तेमाल लंबे समय तक नहीं किया है.  

सीएम के प्रमुख सचिव का निर्देश 

फिलहाल तो मुख्यमंत्री योगी के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद ने सभी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, विभागाध्यक्ष, मंडलायुक्त और डीएम (जिलाधिकारी) को पत्र लिखकर कहा है कि अगर ई ऑफिस पर कार्य न करने वाले 44,994 अधिकारियों और कर्मचारियों ने  जनवरी में भी ई आफिस का इस्तेमाल नहीं किया तो उन्हे वेतन न दिया जाए. 

पत्र में यह भी लिखा गया है कि ई-ऑफिस पर काम करने के बाद ही कर्मचारियों  को वेतन दिया जाए. मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव के इस पत्र को लेकर सूबे के सभी सरकारी विभागों में हड़कंप मचा हुआ है. इसकी वजह है उक्त पत्र में लिखा ये निर्देश कि ई-आफिस पर पूरे महीने काम न करने वाले कर्मचारियों को वेतन दिया जाता है तो संबन्धित कार्यालयाध्यक्ष-आहरण-वितरण अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे. 

पत्र में लिए गए इस निर्देश के कारण ये कहा जा रहा है कि अब सरकारी विभागों में ई-ऑफिस प्रणाली की कोई अनदेखी नहीं करेगा. फिर इस साल के अंत तक मुख्यमंत्री योगी इस व्यवस्था प्रदेश के सभी जिलों, तहसीलों और ब्लॉक स्तर पर बने सरकारी कार्यालयों में अनिवार्य करने में सफल होगी. और आठ साल पहले देखे गए सपने को सीएम योगी इस साल के अंत तक पूरा करने में सफल होंगे, जिसका लाभ सूबे के जनता को मिलेगा. 

सीएम को कैसे हुई जानकारी?

मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव के अनुसार, ई-ऑफिस व्यवस्था प्रदेश के सभी सरकारी कार्यालयों में अनिवार्य रूप से लागू है. इसके बाद भी तमाम अधिकारी और कर्मचारी ई-ऑफिस पर फाइलों का निस्तारण नहीं कर रहे हैं. बीते दिनों मुख्यमंत्री को पता चला कि बीते साल 21 नवंबर से 20 दिसंबर के बीच ई-ऑफिस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करने के मामले में ऊर्जा विभाग, धर्मार्थ कार्य विभाग, कारागार सुधार विभाग, प्राविधिक शिक्षा, परिवहन और चिकित्सा शिक्षा विभाग सबसे पीछे हैं. ऊर्जा विभाग में ई-ऑफिस के 75 यूजर हैं. इनमें से एक भी यूजर ने एक महीने तक ई-आफिस लाग-इन ही नहीं किया. 

इसी प्रकार पीडब्ल्यूडी विभाग जहां 10,895 यूजर हैं. लेकिन इस विभाग में 6080 यूजर ने एक माह तक ई-आफिस को लाग-इन नहीं किया. इसी तरह सिंचाई विभाग के 4905, कृषि विभाग के 4621, राजस्व विभाग के 3784, ग्राम्य विकास विभाग के 2619, आवास विभाग के 1618, चिकित्सा विभाग के 1435,  बेसिक शिक्षा विभाग के 1161 तथा माध्यमिक शिक्षा विभाग के 1031 यूजर ने एक माह से ई-ऑफिस को लाग-इन नहीं किया. 

सरकारी विभागों में अधिकारी और कर्मचारियों द्वारा ई-आफिस को लाग-इन न करने की रिपोर्ट एनआईसी ने तैयार कर सीएम योगी को सौंपी. इस रिपोर्ट को देख सीएम योगी खफा हुए और उन्होंने ई-ऑफिस प्रणाली की अनदेखी करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ एक्शन लेने का निर्देश दिया, ताकि इस सिस्टम की अनदेखी करने की हिम्मत कोई न करे. 

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