लखनऊ: सुनकर अजीब लगेगा, लेकिन यह हकीकत है. उत्तर प्रदेश में एमबीबीएस (बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ सर्जरी) और बीडीएस (बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी) के लिए बीते साल हुए नेशनल एलिजिबिलिटी एंट्रेंस टेस्ट (नीट) की काउंसलिंग में शामिल 25 हजार स्टूडेंट अपनी सिक्योरिटी मनी पाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं. बीते साल जुलाई में हुई काउंसलिंग के तहत मेडिकल स्टूडेंट से सरकारी सीट के लिए 30 हजार रुपए और निजी मेडिकल कॉलेजों के लिए दो लाख रुपए सिक्योरिटी मनी के रूप में जमा कराए गए थे. जिसके चलते करीब 200 करोड़ रुपए सरकार की खाते में जमा हुए.
नियम की तहत 45 दिनों ने यह रकम रिफंड की जानी थी, लेकिन अब तक मेडिकल छात्रों को ये रकम वापस नहीं की गई है. जबकि अन्य राज्यों में नियमों के तहत ये सिक्योरिटी मनी बीते साल ही छात्रों को वापस दी जा चुकी है, लेकिन उत्तर प्रदेश में करीब 25 हजार मेडिकल छात्र अपनी सिक्योरिटी मनी वापस पाने के लिए चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों के दफ्तरों का चक्कर लगा रहे हैं. अब इस मामले को लेकर मेडिकल छात्र चिकित्सा स्वास्थ्य बृजेश पाठक से मिले तो उन्होने अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य अमित घोष को इस मामले में फटकार लगाकर जल्द से जल्द सभी छात्रों की सिक्योरिटी मनी वापस लौटने के निर्देश दिए हैं.
अफसरों की लापरवाही से हुआ विलंब
अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य अमित घोष के अनुसार, यूपी के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 5,725 और निजी मेडिकल कॉलेजों में 7,350 एमबीबीएस की सीटें हैं. इन पर दाखिला लेने के लिए बीते साल 18 जुलाई से 28 जुलाई तक पहले राउंड की काउंसलिंग हुई थी. काउंसलिंग के लिए करीब 25 हजार स्टूडेंटस ने रजिस्ट्रेशन करवाया था. इसके लिए सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों की सीट के लिए 30 हजार से दो लाख रुपए सिक्योरिटी मनी जमा कारवाई गई. दूसरे राउंड की काउंसलिंग 10 सितंबर से 18 सितंबर और तीसरे राउंड की काउंसलिंग 15 अक्टूबर से 16 अक्टूबर और उसके बाद बची हुई सीटों पर नवंबर से दिसंबर के बीच माप अप राउंड के तहत दाखिला दिया गया.
इसके बावजूद किसी भी राउंड के चयनित या दाखिला न ले सके स्टूडेंट्स को उनकी सिक्योरिटी मनी नहीं लौटाई गई. हालांकि डीजीएमई कार्यालय पहुंचे मेडिकल छात्रों के माता-पिता को यह आश्वासन दिया गया की जल्दी ही सिक्योरिटी मनी वापस लौटा दी जाएगी, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो सका है. अमित घोष का कहना है कि अफसरों की लापरवाही के चलते सिक्योरिटी मनी वापस करने में विलंब हुआ. अब सिक्योरिटी मनी लौटने के लिए दिशा-निर्देश वह जारी कर रहे हैं और काउंसलिंग में शामिल हुए सभी अभ्यर्थियों को कुछ दिनों में उनकी सिक्योरिटी मनी मिल जाएगी.
आखिर क्यों नहीं हुआ नियम के तहत भुगतान
मेडिकल स्टूडेंट को अपनी सिक्यारिटी मनी पाने के लिए दर-दर क्यों भटकना पड़ा? इस मामले में पड़ताल करने पर यह पता चला कि महानिदेशक चिकित्सा के पद पर तैनात अधिकारी की पोस्टिंग में लगातार किया गया बदलाव ही इस देरी की वजह है. जब एमबीबीएस और बीडीएस में दाखिले का आवेदन शुरू हुआ तो महानिदेशक चिकित्सा के पद पर किंजल सिंह तैनात थी. जब काउंसलिंग शुरू हुई तो इस पद पर अपर्णा यू की तैनाती हो गई. फिर दिसंबर में उन्हे दूसरे विभाग में भेज दिया गया और एक जनवरी को सारिका रंजन को महानिदेशक चिकित्सा बना दिया गया.
बताया जा रहा है कि मेडिकल स्टूडेंट की सिक्यारिटी मनी करीब 200 करोड़ रुपए की है लिहाजा इसे लेकर वित्त विभाग की मंजूरी जरूरी है. इसी लिए सिक्योरिटी मनी वापस करने का मामला अधर में लटका रहा अब उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक जो स्वास्थ्य मंत्री भी हैं के हस्तक्षेप करने से अब जल्दी ही मेडिकल छात्रों को उनकी सिक्योरिटी मनी वापस मिलने का रास्ता खुल गया है.