बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त: आदेश का पालन नहीं हुआ तो उपसंचालक पर कार्रवाई, स्कूल बस नियमों को नजरअंदाज करने वाली स्कूलों को नोटिस जरूरी
By फहीम ख़ान | Updated: April 28, 2026 20:15 IST2026-04-28T20:15:41+5:302026-04-28T20:15:41+5:30
नियम के मुताबिक, हर स्कूल में स्कूल बस समिति बनाना और हर तीन महीने में बैठक करना जरूरी है. इसी समिति पर बसों के फिटनेस सर्टिफिकेट की जांच की जिम्मेदारी होती है.

बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त: आदेश का पालन नहीं हुआ तो उपसंचालक पर कार्रवाई, स्कूल बस नियमों को नजरअंदाज करने वाली स्कूलों को नोटिस जरूरी
नागपुर : बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने साफ कहा है कि स्कूल बस समिति की बैठकों की जानकारी देने से बचने वाली स्कूलों को नोटिस जारी करने के आदेश का 9 जून तक पालन नहीं हुआ, तो विभागीय शिक्षा उपसंचालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. इसके बाद सुधार का दूसरा मौका नहीं दिया जाएगा. मंगलवार को यह सुनवाई न्यायमूर्ति अनिल किलोर और राज वाकोडे की पीठ के सामने हुई. नियम के मुताबिक, हर स्कूल में स्कूल बस समिति बनाना और हर तीन महीने में बैठक करना जरूरी है. इसी समिति पर बसों के फिटनेस सर्टिफिकेट की जांच की जिम्मेदारी होती है.
नागपुर शहर में 131 स्कूल बस चलाने वाले स्कूल हैं. कोर्ट ने 6 फरवरी 2026 को इन सभी स्कूलों से पिछले दो साल की समिति बैठकों की जानकारी मांगी थी, लेकिन अब तक सिर्फ 41 स्कूलों ने ही जानकारी दी है. इसके बाद 17 मार्च 2026 को कोर्ट ने आदेश दिया था कि जो स्कूल जानकारी नहीं दे रहे, उन्हें तीन हफ्ते में नोटिस जारी किया जाए और दो प्रमुख मराठी व अंग्रेजी अखबारों में सार्वजनिक सूचना भी प्रकाशित की जाए. लेकिन शिक्षा उपसंचालक ने इस आदेश का पालन नहीं किया.
इस पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए प्रधान सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग को उपसंचालक के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया. हालांकि सरकारी वकील की अपील पर कोर्ट ने अंतिम मौका देते हुए कार्रवाई 9 जून तक टाल दी. साथ ही साफ कर दिया कि अगली तारीख तक 17 मार्च के आदेश का पालन नहीं हुआ तो कार्रवाई तय है. इस मामले में एड. फिरदौस मिर्जा ने न्यायालय मित्र के रूप में सहयोग किया.
स्कूलों को भी चेतावनी
हाईकोर्ट ने उन स्कूलों को भी चेतावनी दी है जो जानकारी देने से बच रहे हैं. उन्हें अगली सुनवाई तक खुद शपथपत्र देकर पूरी जानकारी देनी होगी, वरना 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा. सुनवाई के दौरान ट्रैफिक पुलिस ने कहा कि 15 दिनों में स्कूल बस स्टॉप के लिए जगह तय कर दी जाएगी. वहीं आरटीओ ने भरोसा दिलाया कि स्कूल खुलने से पहले सभी बसों की फिटनेस जांच पूरी कर ली जाएगी.