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1,500 रुपये की मासिक किस्त, 24 लाख से अधिक महिला लाभार्थी गलती से सरकारी कर्मचारी?, ई-केवाईसी त्रुटि से ‘लाडकी बहीण’ सहायता राशि रुकी

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 21, 2026 15:14 IST

अधिकारियों ने बताया कि जिन लाभार्थियों को ‘नहीं’ में उत्तर देना चाहिए था, उन्होंने भ्रमित वाक्य संरचना होने के कारण ‘हां’ पर निशान लगा दिया।

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ठळक मुद्दे‘तुमच्या घरातले कोणी सरकारी नोकरीत नाही ना?’ (आपके परिवार में कोई सरकारी नौकरी में नहीं है, है न?।अधिकारी ने कहा कि प्रश्न ने उत्तर देने वालों को भ्रमित किया और करीब 24 लाख ने ‘हां’ में उत्तर दे दिया। परिवार का कम से कम एक सदस्य सरकारी कर्मचारी है और प्रणाली ने मासिक भुगतान रोक दिया।

मुंबईः ‘लाडकी बहीण’ योजना के लिए ई-केवाईसी प्रक्रिया में एक त्रुटिपूर्ण प्रश्न के कारण महाराष्ट्र में 24 लाख से अधिक महिला लाभार्थी गलती से सरकारी कर्मचारी के रूप में वर्गीकृत हो गईं, जिससे उन्हें मासिक वित्तीय सहायता राशि का वितरण अचानक रुक गया। इस त्रुटि को महिला एवं बाल कल्याण विभाग (डब्ल्यूसीडी) ने स्वीकार किया है और सरकार को प्रभावित लाभार्थियों का भौतिक सत्यापन करने के लिए राज्य भर में लगभग एक लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को तैनात करना पड़ा है। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को बताया कि ई-केवाईसी प्रपत्र में शामिल एक प्रश्न गलत तैयार हो गया था, जिसमें सरल प्रश्न की जगह दो नकारात्मक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। मराठी में प्रश्न था, ‘तुमच्या घरातले कोणी सरकारी नोकरीत नाही ना?’ (आपके परिवार में कोई सरकारी नौकरी में नहीं है, है न?।

अधिकारियों ने बताया कि जिन लाभार्थियों को ‘नहीं’ में उत्तर देना चाहिए था, उन्होंने भ्रमित वाक्य संरचना होने के कारण ‘हां’ पर निशान लगा दिया। विभाग के अधिकारी ने कहा कि प्रश्न ने उत्तर देने वालों को भ्रमित किया और करीब 24 लाख ने ‘हां’ में उत्तर दे दिया। इससे स्वतः यह मान लिया गया कि परिवार का कम से कम एक सदस्य सरकारी कर्मचारी है और प्रणाली ने मासिक भुगतान रोक दिया।

अधिकारी ने बताया कि आंकड़ों की समीक्षा के दौरान त्रुटि का पैमाना स्पष्ट हुआ क्योंकि महाराष्ट्र में अर्धसरकारी निकायों और निगमों सहित आठ से नौ लाख सरकारी कर्मचारी हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमें योजना के तहत दी जाने वाली 1,500 रुपये की मासिक किस्त का भुगतान नहीं होने को लेकर राज्य के विभिन्न हिस्सों से शिकायतें भी मिलने लगीं।’’

राज्य की महिला एवं बाल कल्याण मंत्री अदिति तटकरे ने मंगलवार रात ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि रिकॉर्ड दुरुस्त करने के लिए इन लाभार्थियों का भौतिक सत्यापन आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा किया जाएगा। ई-केवाईसी अभियान के दायरे में करीब 2.30 करोड़ लाभार्थियों को लाया गया था और इसका उद्देश्य योजना के तहत पात्रता सुनिश्चित करना था।

ई-केवाईसी पूरा करने की समयसीमा 31 दिसंबर 2025 थी। राज्य करीब 2.25 करोड़ लाभार्थियों के लिए हर महीने लगभग 3,700 करोड़ रुपये जारी करता है और प्रत्येक पात्र महिला को प्रति माह 1,500 रुपये मिलते हैं। ई-केवाईसी अभियान उन शिकायतों के बाद शुरू किया गया था कि यह सहायता पुरुष प्राप्त कर रहे हैं या सरकारी कर्मचारियों का लाभार्थियों के रूप में पंजीकरण किया गया है।

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