लाइव न्यूज़ :

महाराष्ट्र सरकार के धीमे सर्वर का असर 'माझी लड़की बहना योजना' पर पड़ा, महिलाएं हुईं परेशान

By आकाश चौरसिया | Updated: August 26, 2024 11:53 IST

Maharashtra Assembly Election: महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'माझी लड़की बहना' के अंतर्गत आने वाली महिलाओं को दिक्कतों को सामना करना पड़ रहा है। एक महिला ने तो बताया कि उसके डॉक्यूमेंट पिछले 2 महीने से दस्तावेज वेबसाइट पर अपलोड नहीं हुए।

Open in App
ठळक मुद्देमहाराष्ट्र सरकार का सर्वर काफी धीमे है, जिस कारण महिलाएं काफी परेशान हैंशिंदे सरकार की योजना 'माझी लड़की बहना' के लिए महिलाओं के डॉक्यूमेंट अपलोड नहीं हो रहेइस पर एक महिला ने बताया कि उनके डॉक्यूमेंट पिछले 2 महीने से डाउनलोड नहीं हुए

Maharashtra Assembly Election: महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे सरकार की महत्वाकांक्षी स्कीम 'माझी लड़की बहना योजना' को लेकर काफी अच्छा माहौल है, क्योंकि इस स्कीम के जरिए 2.5 लाख सालाना कमाने वाले परिवार की महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपए की आर्थिक मदद सरकार कर रही है। इस बीच कई महिलाओं के खाते में दो महीने की छोटी धनराशि 3,000 रुपए एक बार में एक साथ उन्हें मिली है। 

हालांकि, कई महिलाएं इस क्रम में अपने एप्लीकेशन फॉर्म के अपलोड होने का इंतजार कर रही हैं, जबकि दूसरी महिलाएं अपने फॉर्म पर सरकार की अनुमति के लिए बेसब्र हैं, क्योंकि उन्हें इसके जरिए एक मुश्त राशि मिल जाएगी। सामने आ रही खबरों के तहत प्रदेश भर में इसे लेकर माहौल तो अच्छा है, लेकिन कुछ महिलाओं को काफी लंबा इंतजार करना पड़ा रहा है।  

महिलाओं को मुश्किलों का करना पड़ रहा सामना..'माझी लड़की बहना योजना' के तहत जो भी महिलाएं इसके अंतर्गत आती हैं, वे राज्य सरकार द्वारा मुहैया कराए गए उचित डॉक्यूमेंट को अपलोड करें। हालांकि, स्कीम के आने से महिलाओं के बीच उत्साह का माहौल है, लेकिन कुछ महिलाएं कंप्यूटर ऑपरेट या मोबाइल चलाने में असमर्थ है, ऐसे में सरकार मददगार के रूप में सामने आकर उनकी उचित मदद कर रही है। लेकिन, इसे लेकर कई लोगों ने शिकायत की है कि सरकार की वेबसाइट डाउन या वेब पेज काफी धीरे चल रहा है, जिससे दस्तावेज जमा करने में उन्हें सामना करना पड़ा। 

कल्पना मटे की शिकायत..मुंबई के मानखुर्द की रहने वाली कल्पना मटे, जो एक संगठित क्षेत्र में काम करती हैं, 5 लोगों के परिवार में एकमात्र कमाने वाली हैं। उन्होंने कहा, "जब मुझे पता चला कि सरकार 1,500 रुपये मासिक जमा करेगी तो मुझे सुनकर काफी अच्छा लगा। मैंने उस पैसे का उपयोग अपने बच्चों के लिए स्कूल की किताबें खरीदने के लिए करने का फैसला किया था। लेकिन आंगनवाड़ी कार्यालय ने 2 महीने से मेरे दस्तावेज अपलोड नहीं किए हैं।"

कल्पना ने आगे कहा, "मेरे जैसे कई लोग हैं जो मोबाइल फोन का उपयोग नहीं कर सकते। मेरी बेटी ने मेरी मदद की, लेकिन दस्तावेज अपलोड नहीं कर सकी। हम सरकारी धन पाने में मदद के लिए आंगनवाड़ी वर्कर्स पर निर्भर हैं।"

लोकल आंगनवाड़ी वर्कर अश्विनी धागे ने फ्री प्रेस जर्नल से बात करते हुए कहा, हां, लड़की बहिन योजना से जुड़े कई अपलोड को फॉर्म करना बाकी है। इस बात को लेकर उन्होंने अपने सीनियर कर्मियों से बात की वेबसाइट धीरे चल रही है। अश्विनी ने अब तक 40 फॉर्म अपलोड किए हैं, जिसमें 10 महिलाओं को पहले महीने की राशि प्राप्त हो चुकी है। हालांकि, उन्होंने ये भी बताया करीब 15 महिलाएं ऐसी हैं जिनके फॉर्म स्वीकार नहीं किये गये। 

योजना के फॉर्म भरने को लेकर एक मुसीबत और आ पड़ी है, जिसमें ये पता चल रहा है कि आधार कार्ड में दिया पता और अस्थायी पता बिल्कुल अपने से एक दूसरे से पूरी तरह अलग है। 

टॅग्स :महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019मुंबईएकनाथ शिंदेअजित पवारBJP
Open in App

संबंधित खबरें

भारतमुंबई और अहमदाबाद के बीच भारत की पहली बुलेट ट्रेन की पहली झलक सामने आई

भारतसीएम डॉ. मोहन ने लिया मंत्रियों से एक-एक काम का हिसाब, जानें सरकार-संगठन के बीच क्या हुई बात?

भारतमहाराष्ट्र विधान परिषद की 16 सीट पर चुनाव, 18 जून को पड़ेंगे वोट, निर्वाचन आयोग की घोषणा, जानें मतगणना कब?

भारतBilaspur Nikay Chunav Results: कुल 11 सीट और भाजपा ने 9 और कांग्रेस ने 2 सीट पर दर्ज की जीत?

भारतमुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए 350 टन वजनी कटरहेड को मुंबई के विक्रोली शाफ्ट में उतारा गया

कारोबार अधिक खबरें

कारोबार12 ज्योतिर्लिंगों में से एक भीमाशंकर मंदिर पर खर्च होंगे 172.22 करोड़ रुपये, महाराष्ट्र सरकार ने 6 तीर्थ और विरासत स्थलों के लिए 993 करोड़ रुपये मंजूर

कारोबारGold Price Today: सोने का भाव आज का 18 मई 2026, जानें दिल्ली, मुंबई समेत बड़े शहरों में सोने की कीमत

कारोबार₹6 ट्रिलियन का नुकसान! सेंसेक्स में 833.20 अंक की गिरावट, क्रूड का भाव 111.2 डॉलर प्रति बैरल

कारोबारऊर्जा संकट और बढ़ते विदेशी मुद्रा संकटः मितव्ययिता की शुरुआत तो बहुत पहले ही हो जानी चाहिए थी!

कारोबारघरों की ‘होम मिनिस्टर’ पर बचत की जिम्मेदारी?, पीएम मोदी की ‘बचत और आत्मनिर्भरता’ की अपील?