शी जिनपिंग तीसरी बार चीन के राष्ट्रपति चुने गए हैं. यह केवल एक देश चीन का अंदरुनी मामला नहीं है क्योंकि जिनपिंग महज राष्ट्रपति नहीं बल्कि एक तानाशाह की भूमिका में हैं. उन्होंने अपने देश में तो विरोध की हर आवाज को कुचला ही है, दुनिया में भी ऐसा ही करन
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हिंदू देशभक्त पत्रिका के संपादक क्रिस्टोदास पाल, न्यायमूर्ति बदरुद्दीन तैयब जी एवं अंजुमन-ए-पंजाब की तरफ से जवाब दाखिल करते हुए कहा गया कि भारत में अभी बालिकाओं की शिक्षा को सह-शिक्षा के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता है।
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लोकतंत्र, अंततोगत्वा किसी तानाशाह के बारे में नहीं है जो अपनी इच्छा को सब पर थोपे। यह बीच का रास्ता खोजने पर आधारित है और चरम सीमाओं की अस्वीकृति है।
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रूस-यूक्रेन युद्ध ऐसे ही कारणों का परिणाम है। यह अलग बात है कि पश्चिमी पक्ष इसके लिए रूस को कठघरे में खड़ा कर रहा है और दूसरा पक्ष पश्चिमी ताकतों को। गौर से देखें तो रूस-यूक्रेन युद्ध वर्ष 2013-14 में ही शुरू हो गया था, जिसकी प्रस्तावना काफी पहले लिखी
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इस समय तक वैचारिक आधार कमजोर पड़ने लगा था और सियासत उद्योग की शक्ल लेने लगी थी। इसलिए पूंजी के दखल से खुद को न राष्ट्रीय पार्टियां मुक्त रख पाईं और न ही क्षेत्रीय दल अपने को बचा पाए।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया मोहन भागवत ने कहा है कि अंग्रेजों के आने के पहले भारत में 70 प्रतिशत लोग शिक्षित थे जबकि इंगलैंड में उस समय सिर्फ 17 प्रतिशत अंग्रेज शिक्षित थे. अंग्रेजों ने, खासकर लॉर्ड मैकाले ने जो शिक्षा पद्धति भारत में चलाई, उसक
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परियोजनाओं के समय पर पूरा नहीं होने से होने वाला नुकसान इस मायने में महत्वपूर्ण हो जाता है कि परियोजनाओं की देरी के चलते लाखों करोड़ रुपए का नुकसान होने के साथ ही लोगों को मिलने वाली सुविधाओं में भी अनावश्यक देरी होती है।
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पंजाब में ‘वारिस पंजाब दे’ के स्वयंभू प्रमुख अमृत पाल सिंह से जुड़े मामले पर भाजपा कुछ भी कहने से अभी बच रही है. भाजपा द्वारा संभवत: सभी नेताओं को इस मुद्दे पर टिप्पणी न करने के लिए एक अनौपचारिक सलाह जारी की गई थी.
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विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की राष्ट्रपति के रूप में मेरा चुनाव, महिला सशक्तिकरण की गाथा का एक अंश है. मुझे पूरा विश्वास है कि हमारा भविष्य उज्ज्वल है. मैंने अपने जीवन में देखा है कि लोग बदलते हैं, नजरिया भी बदलता है.
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एक दौर था जब होली पर अटल बिहारी वाजपेयी के आवास पर भव्य होली मिलन का कार्यक्रम आयोजित होता था। उसमें तमाम राजनीतिककार्यकर्ता, नेता, लेखक, पत्रकार, कवि आदि भाग लेते थे। अटलजी खुद सब अतिथियों को गुलाल लगाया करते थे। उनके देश के मौजूदा प्रधानमंत्री नरें
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