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Terrorist-Naxal: शहरी आतंकी शक्तियों को कुचलने की चुनौती?, क़ानूनी शिकंजे से कठोर कार्रवाई की तैयारी

By आलोक मेहता | Updated: November 4, 2024 05:32 IST

Terrorist-Naxal: झारखंड, छत्तीसगढ़, तेलंगाना में बड़े पैमाने पर नक्सली या तो मुठभेड़ में मारे गए या गिरफ्तार हुए अथवा उन्होंने आत्मसमर्पण किया.

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ठळक मुद्देसरकार को अधिक सतर्कता से कार्रवाई करने की आवश्यकता है. सरकार चाहती तो अध्यादेश लाकर इसे कानून का रूप दे सकती थी.आलोचना और अदालती हस्तक्षेप की संभावना के कारण ऐसा नहीं किया गया.

Terrorist-Naxal: जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों में विदेशी आतंकियों की घुसपैठ नियंत्रित करने के बाद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार शहरों के नकाबपोश आतंकियों और उनको पनाह देने वाले प्रभावशाली लोगों पर क़ानूनी शिकंजे से कठोर कार्रवाई की तैयारी कर रही है. बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में माओवादी नक्सली गतिविधियां पिछले वर्षों के दौरान न्यूनतम हो गई हैं. वहीं केंद्रीय सुरक्षा बल और राज्यों की पुलिस के बेहतर तालमेल से झारखंड, छत्तीसगढ़, तेलंगाना में बड़े पैमाने पर नक्सली या तो मुठभेड़ में मारे गए या गिरफ्तार हुए अथवा उन्होंने आत्मसमर्पण किया.

फिर भी कुछ दुर्गम क्षेत्रों में सक्रिय माओवादी नक्सलियों को दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और विदेशों से हथियार, धन और साइबर आपराधिक तरीकों से सहायता मिलने पर अंकुश के लिए सरकार को अधिक सतर्कता से कार्रवाई करने की आवश्यकता है. चुनाव की घोषणा से दो महीने पहले महाराष्ट्र सरकार ने ‘अर्बन नक्सल’ के खिलाफ कार्रवाई के लिए महाराष्ट्र विशेष सार्वजनिक सुरक्षा विधेयक (एमएसपीएसए), 2024 पेश किया. लेकिन सत्र समाप्त होने से यह विधेयक पारित नहीं हो सका. सरकार चाहती तो अध्यादेश लाकर इसे कानून का रूप दे सकती थी.

लेकिन अकारण आलोचना और अदालती हस्तक्षेप की संभावना के कारण ऐसा नहीं किया गया. मजेदार बात यह है कि ऐसा कानून छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में लागू है. यह कानून लागू होने पर पुलिस को ऐसे लोगों के खिलाफ एक्शन लेने की शक्ति मिल जाएगी, जो नक्सलियों को लॉजिस्टिक के साथ शहरों में सुरक्षित ठिकाने मुहैया कराते हैं.

नक्सली संगठनों की गैरकानूनी गतिविधियों को प्रभावी कानूनी तरीकों से नियंत्रित करने की आवश्यकता है. अभी मौजूद कानून नक्सलवाद, इसके फ्रंटल संगठनों और व्यक्तिगत समर्थकों से निपटने के लिए अप्रभावी और अपर्याप्त हैं. नक्सलियों का खतरा सिर्फ राज्यों के दूरदराज इलाकों तक सीमित नहीं है. नक्सली संगठनों की मौजूदगी शहरी इलाकों में भी हो गई है.

1999 में संगठित अपराध पर काबू पाने के लिए महाराष्ट्र में मकोका लागू किया गया था. इस कानून की काफी आलोचना हुई थी, मगर सरकार और पुलिस को क्राइम कंट्रोल में फायदा मिला. अब शहरों में बैठकर नक्सली गतिविधि चलाने वालों के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार नया कानून  लागू करना चाहती है.

महाराष्ट्र विशेष सार्वजनिक सुरक्षा विधेयक (एमएसपीएसए) में 18 धाराएं हैं, जो सुरक्षा एजेंसियों को ‘अर्बन नक्सल’ के खिलाफ कार्रवाई की शक्ति देंगी. इसका दुरुपयोग रोकने के लिए भी पर्याप्त प्रावधान हैं. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे ‘अर्बन नक्सल’ की पहचान करके उनकी फंडिंग की गहन छानबीन करें.

सरकार का संकल्प है कि मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त करा दिया जाए. असल में सरकार के साथ अन्य सामाजिक संगठनों को भी इस अभियान में सहयोग देना होगा.| नक्सलियों के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को नियंत्रित करने के लिए जांच एजेंसियों और कूटनीतिक प्रयासों की भी आवश्यकता होगी.

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