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‘नेक आदमी’ नीति: सड़क हादसों में जनहानि रोकने की पहल

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: February 9, 2021 13:41 IST

डॉक्टरों के अनुसार किसी भी दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की यदि एक घंटे के भीतर अस्पताल में इलाज की व्यवस्था हो जाए तो दुर्घटना में मरने वालों में से पचास प्रतिशत लोगों को बचाया जा सकता है.

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ठळक मुद्देइलाज करने के लिए झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने ‘नेक आदमी’ नीति बनाई है.एक घंटे के भीतर अस्पताल में पहुंचाने वाले व्यक्ति को दो हजार रुपए तथा प्रशस्ति-पत्र दिया जाएगा. दो व्यक्ति मदद करते हैं, तब दो-दो हजार और यदि दो से अधिक व्यक्ति मदद करते हैं तो पांच हजार रुपए दिए जाएंगे.

हमारे देश में सड़क दुर्घटनाएं चिंता का विषय हैं. सड़क हादसों में हर घंटे सत्रह लोग अपनी जान गंवाते हैं, जो देश में किसी भी रोग के कारण मरने वालों से बहुत अधिक है.

देश के सरकारी लोकनिर्माण विभाग या हाईवे अथॉरिटी की ओर से चेतावनी भरे स्लोगन में जगह-जगह निर्धारित गति से वाहन चलाने और दुर्घटनाप्रवण स्थल या घाट आने पर वाहन धीरे चलाने की हिदायत रहती है. उसी प्रकार शहरों के प्रत्येक चौराहे पर विभिन्न प्रकार के सतर्कता के संकेत वाहन चालकों के लिए लगाए गए हैं.

हादसों में घायलों को बचाने से हिचकिचाते हैं

इन सबके बावजूद वाहन चालकों का इस ओर ध्यान नहीं देना दुर्घटना का कारण बनता है. एक समय ऐसा था कि हम देश की खराब सड़कों को दुर्घटनाओं के लिए जिम्मेदार मानते थे लेकिन अब अच्छी सड़कें इससे भी अधिक हादसों का कारण बनती जा रही हैं, क्योंकि अब हमारी गति पर ही हमारा नियंत्रण नहीं रहा है और इस कारण हजारों की संख्या में लोग रास्तों की दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं. इसमें सबसे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि लोग ऐसे हादसों में घायलों को बचाने से हिचकिचाते हैं. वे आगे नहीं आते.

प्रत्येक चार में से तीन लोग घायलों की मदद नहीं करते

एक सर्वे में बताया गया है कि प्रत्येक चार में से तीन लोग घायलों की मदद नहीं करते. दूसरी ओर डॉक्टरों के अनुसार किसी भी दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की यदि एक घंटे के भीतर अस्पताल में इलाज की व्यवस्था हो जाए तो दुर्घटना में मरने वालों में से पचास प्रतिशत लोगों को बचाया जा सकता है. इस एक घंटे के समय को गोल्डन आवर कहा जाता है.

इसमें पीड़ित को इलाज मिल जाए तो उसे बचाया जा सकता है और उसके बाद यदि कितने ही बड़े और आधुनिक सुविधायुक्त अस्पताल में पीड़ित को ले जाया जाए, उसे बचाना मुश्किल हो जाता है. ऐसे हजारों लोग रास्ते पर घंटों तड़पते पड़े रहते हैं लेकिन कोई उनकी मदद करने नहीं आता. इसका क्या कारण है? क्या हमारी संवेदनाएं मर चुकी हैं? या सभी मानव खुदगर्ज हो गए? ऐसा नहीं है.

झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने ‘नेक आदमी’ नीति बनाई

पहली बात तो यह कि लोग सबसे पहले हमारे देश की पुलिस और कोर्ट-कचहरी के झमेले से इतने डरते हैं कि किसी मरते की मदद के लिए भी आगे नहीं आते. कुछ लोग समय नहीं होने का बहाना बनाते हैं तो कुछ कार या ऑटोवाले अपनी सीट खून से गंदी हो जाने का बहाना करते हैं. इन सब बहानों का इलाज करने के लिए झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने ‘नेक आदमी’ नीति बनाई है.

इसके अंतर्गत अब झारखंड में दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को घटना के एक घंटे के भीतर अस्पताल में पहुंचाने वाले व्यक्ति को दो हजार रुपए तथा प्रशस्ति-पत्र दिया जाएगा. यदि दो व्यक्ति मदद करते हैं, तब दो-दो हजार और यदि दो से अधिक व्यक्ति मदद करते हैं तो पांच हजार रुपए दिए जाएंगे. साथ ही मदद करने वालों की जानकारी गुप्त रखी जाएगी.

पुलिस किसी भी प्रकार की पूछताछ नहीं करेगी

उनसे पुलिस किसी भी प्रकार की पूछताछ नहीं करेगी. उन्हें कोर्ट-कचहरी के चक्कर नहीं लगाने होंगे. यदि किसी अत्यावश्यक कारण से पुलिस के पास या कोर्ट में जाना ही पड़े तब उसे प्रत्येक बुलावे पर एक हजार रुपए की मदद दी जाएगी ताकि उसके आने-जाने का प्रबंध हो सके.

झारखंड सरकार की यह योजना बेहद कारगर साबित हो सकती है, इसका कारण यह है कि अब लोगों को आसानी से ऑटो या टैक्सी का प्रबंध कर पीड़ित को अस्पताल पहुंचाने में मदद होगी. ऑटो या टैक्सी वाले भी इस योजना के कारण खुद ही पीड़ित की मदद के लिए आगे आएंगे. जिन्हें बेवजह अपना समय गंवाने का डर था अब उन्हें भी पैसा मिलने के कारण वे मदद के लिए आगे बढ़ेंगे और कोर्ट-कचहरी के चक्कर भी लगाने पड़े तब भी पैसा मिलेगा.

दुर्घटना में मरने वालों की संख्या में निश्चित ही कमी आएगी

सरकार की इस पहल से दुर्घटना में मरने वालों की संख्या में निश्चित ही कमी आएगी क्योंकि अधिक संख्या में दुर्घटनाग्रस्त लोगों को गोल्डन आवर के भीतर ही इलाज मिल सकेगा. इस योजना को सभी राज्यों में लागू किया जाना चाहिए. यदि केंद्र सरकार इस योजना पर अमल करे तो देश के अनेक दुर्घटनाग्रस्तों को मरने से बचाया जा सकेगा.

महाराष्ट्र सरकार ने भी हाल ही में दुर्घटनाग्रस्तों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में पहुंचाने तथा अस्पताल का तीस हजार रुपए तक का खर्च वहन करने का निर्णय लिया है. साथ ही दुर्घटना स्थल से नजदीकी अस्पताल को ऐसे पीड़ित को भर्ती करने की सख्त ताकीद दी है.

ऐसा न करने पर अस्पताल पर दंडात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान है. किंतु झारखंड सरकार की ‘नेक आदमी’ नीति पर भी यदि सभी राज्यों में अमल किया जाता है तब भी दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या कम करने में निश्चित तौर पर मदद मिलेगी. 

लोकमत संदर्भ विभाग, नागपुर

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