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जिंदगी में इतनी लापरवाही आती कहां से है ?

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: April 18, 2026 07:38 IST

सड़क पर चलते हुए हम इस बात का ध्यान क्यों नहीं रखते कि हमारी गलतियों की वजह से होने वाली दुर्घटना किसी और की जान भी ले सकती है. जिंदगी में लापरवाही की एक वजह अनियंत्रित रफ्तार भी है.

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इस खबर ने आप सभी को चौंका दिया होगा कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर में एक महिला की रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर का ऑपरेशन होना था लेकिन डॉक्टर्स ने महिला के पैर का ऑपरेशन कर दिया. अब दलील यह दी जा रही है कि एक ही नाम की दो महिला मरीज थीं. एक को रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर था तो दूसरी महिला के पैर में फ्रैक्चर था. नाम की गलतफहमी में गलत ऑपरेशन हो गया. सवाल यह है कि क्या ये वाकई गलतफहमी का मामला है या फिर गंभीर लापरवाही का नतीजा है?

दरअसल गलतफहमी भी तब होती है जब उसके मूल में लापरवाही हो. उदाहरण के लिए आपने किसी को कुछ समझाया और उसने उल्टा काम कर दिया. फिर वह कहता है कि समझने में गलती हो गई. गलतफहमी हो गई! इसे आप क्या कहेंगे? वस्तुस्थिति तो यही है न कि जब आप कुछ समझा रहे थे तो उसने गंभीरता के साथ समझने की कोशिश नहीं की. उसका दिमाग कहीं और था. वह एकाग्र नहीं था. इसलिए उल्टा काम कर दिया. तो बीएचयू में भी जो हुआ है वह लापरवाही का नतीजा था. डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ का दायित्व है कि जब मरीज को ऑपरेशन के लिए ले जाया जा रहा हो तो सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि ऑपरेशन किस मर्ज का होना है.

अमूमन ऐसा होता भी है. डॉक्टर्स ध्यान रखते भी हैं और इस तरह के कम ही मामले आते हैं लेकिन जब रवैया लापरवाही भरा हो तो ऐसी चूक होगी ही. जिस महिला का गलत ऑपरेशन हुआ, उसकी मौत हो चुकी है. यह कहना मुश्किल है कि मौत गलत ऑपरेशन की वजह से हुई या फिर उस बीमारी से हुई जिससे वह गुजर रही थी. क्या मौत के लिए उस डॉक्टर और पारा मेडिकल स्टाफ को जिम्मेदार माना जाए जिसकी लापरवाही से गलत ऑपरेशन हुआ? जांच समिति का गठन कर दिया गया है और जैसा कि आमतौर पर होता है, संभव है कि इसकी लीपापोती भी हो जाए.

मगर इस बात पर हर किसी को विचार करना चाहिए कि जिंदगी में लापरवाही आती कहां से है? मनुष्य के विकास पर नजर डालें तो लापरवाही की प्रवृत्ति हमारी प्रकृति का हिस्सा नहीं है. खतरे की जरा सी आशंका हो तो हमारी प्रवृत्ति हमें सजग कर देती है.

अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए हम अदम्य शक्ति का प्रदर्शन करते हैं. दुश्मन का सामना करना हो तो हम अदम्य साहस का परिचय देते हैं. पतली पगडंडी पर साइकिल चलाते हुए हम सजगता की पराकाष्ठा पर होते हैं. तो फिर अपने कार्यस्थल पर हम लापरवाह क्यों हो जाते हैं?

सड़क पर चलते हुए हम इस बात का ध्यान क्यों नहीं रखते कि हमारी गलतियों की वजह से होने वाली दुर्घटना किसी और की जान भी ले सकती है. जिंदगी में लापरवाही की एक वजह अनियंत्रित रफ्तार भी है.

हम हर काम जल्दी करना चाहते हैं. हर  वक्त जल्दी में रहते हैं. एक मिनट रुक कर यह सोचते ही नहीं कि हमें वाकई करना क्या है? हमें यह समझना होगा कि जिंदगी के हर क्षेत्र में गंभीरता बहुत जरूरी है. सजगता बहुत जरूरी है अन्यथा आने वाली पीढ़ियों को हम क्या शिक्षा दे पाएंगे?

टॅग्स :बनारस हिंदू विश्वविद्यालयडॉक्टरमेडिकल ट्रीटमेंट
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