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ब्लॉग: भारत के लिए खास हैं फ्रांस के साथ संबंध

By आरके सिन्हा | Updated: July 12, 2023 10:59 IST

भारत–फ्रांस रणनीतिक साझेदारी के इस साल 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं

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ठळक मुद्देभारत और फ्रांस के संबंध कूटनीति के हिसाब से बहुत जरूरी है भारत और फ्रांस के बीच कुछ सालों से घनिष्ठ संबंध देखे गए हैंभारत के लिए यह एक उपलब्धि है

भारत-फ्रांस के बीच घनिष्ठ संबंधों की इबारत को नए सिरे से लिखने के इरादे से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 14 जुलाई को फ्रांस की यात्रा पर जा रहे हैं. वे वहां पर बैस्टिल डे परेड में सम्मानित अतिथि के रूप में शामिल होंगे.

प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान दोनों देश महत्वपूर्ण रक्षा और व्यापारिक समझौते पर मुहर लगाएंगे. भारतीय नौसेना के लिए फ्रांस के साथ 26 राफेल एम (मरीन) लड़ाकू विमानों का सौदा होने की उम्मीद है.

भारत, फ्रांस और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने 8 जून को ओमान की खाड़़ी में अपना पहला त्रिपक्षीय समुद्री अभ्यास सफलतापूर्वक संपन्न किया. इसमें आईएनएस तरकश, फ्रांसीसी जहाज सुरकौफ, फ्रेंच राफेल विमान और यूएई नौसेना समुद्री गश्ती विमान की भागीदारी थी.

इस अभ्यास में सतही युद्ध जैसे नौसेना संचालन का एक व्यापक स्पेक्ट्रम देखा गया था, जिसमें सतह के लक्ष्यों पर मिसाइल से सामरिक गोलीबारी और अभ्यास, हेलिकाॅप्टर क्रॉस डेक लैंडिंग संचालन, उन्नत वायु रक्षा अभ्यास और बोर्डिंग संचालन शामिल थे.

मोदी की यात्रा से ठीक पहले इस तरह के अभ्यास का उद्देश्य तीनों नौसेनाओं के बीच त्रिपक्षीय सहयोग को बढ़ाना और समुद्री वातावरण में पारंपरिक और गैर-पारंपरिक खतरों को दूर करने के उपायों को अपनाने का मार्ग प्रशस्त करना था.

इस बीच, यह भी महत्वपूर्ण है कि भारत–फ्रांस रणनीतिक साझेदारी के इस साल 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं. आपको याद होगा कि प्रधानमंत्री मोदी ने सन्‌ 2016 में भारत की विदेश नीति में बड़ा बदलाव तब किया था जब उन्होंने फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति ओलांद की दिल्ली की जगह चंडीगढ़ में अगवानी की थी।

मोदी से पहले के प्रधानमंत्रियों के दौर में विदेशों से भारत आने वाले राष्ट्राध्यक्ष और प्रधानमंत्री दिल्ली आते थे और उन्हें ज्यादा से ज्यादा आगरा में ताजमहल घुमा दिया जाता था.

अब इन महत्वपूर्ण स्थानों में अहमदाबाद, बनारस, चंडीगढ़, बेंगलुरु और तमिलनाडु के मंदिर भी शामिल हो गए हैं. और भी कुछ शहर इस नीति का आने वाले वक्त में हिस्सा बनेंगे. फ्रांस के राष्ट्रपति ओलांद उस साल गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि थे.

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