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प्रदूषण से निपटने के लिए मिल गया नया रास्ता! लिक्विड ट्री से जगी उम्मीदें, जानिए क्या है ये जिससे भारत को मिल सकती है बड़ी मदद

By निशांत | Updated: April 13, 2023 10:59 IST

भारत के शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए लिक्विड-3 एक अभिनव और अत्यधिक आशाजनक समाधान लगता है।

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ठळक मुद्देभारत के शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए लिक्विड-3 एक अभिनव और अत्यधिक आशाजनक समाधान लगता है।सर्बिया भी वायु प्रदूषण की समस्या से जूझ रहा था। इसे अपनाकर भारत न सिर्फ वायु की गुणवत्ता में सुधार कर सकता है

जैसे-जैसे शहरों का विकास और विस्तार होता है, भूमि और संसाधनों की मांग में वृद्धि जारी रहती है, जिससे वायु प्रदूषण सहित कई पर्यावरणीय मुद्दे सामने आते हैं। बढ़ती भीड़ के चलते सड़कों को चौड़ा करना मजबूरी बनता है और इसमें सबसे पहले पेड़ों की बलि चढ़ती है।

उन्हीं पेड़ों की जो अब तक सड़क पर चलती धुआं उगलती गाड़ियों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को सोखने का काम करते थे। मगर चौड़ी सड़कों पर अब पेड़ लगाने की जगह नहीं, और सड़कों पर बढ़ती भीड़ के साथ गाड़ियों के धुएं में भी उसी अनुपात में बढ़त हो रही है।

सर्बिया भी वायु प्रदूषण की समस्या से जूझ रहा था। उसके भी शहरों की सड़कों पर पेड़ उगाने की जगह कम होती जा रही थी और तब, वहां के एक वैज्ञानिक ने ईजाद की एक ऐसी तकनीक जिसमें बहुत ही कम जगह में, दो बड़े पेड़ों जितनी कार्बन सोखने की क्षमता थी।

इस खोज का नाम रखा गया लिक्विड 3, लेकिन ये काम करती है एक लिक्विड ट्री या पेड़ की तरह। इसके नाम में लिक्विड इसलिए है क्योंकि इसमें सूक्ष्म शैवाल या माइक्रो एलगी से भरा 600 लीटर पानी का टैंक होता है, जो प्रकाश संश्लेषण या फोटोसिंथेसिस के माध्यम से अपने आसपास के पर्यावरण की कार्बन डाइऑक्साइड को सोख कर उसे ऑक्सीजन में परिवर्तित कर देता है, बिल्कुल किसी पेड़ की तरह। 

इस तकनीक को बनाया है डॉक्टर इवान स्पैसोजेविक ने, जो इंस्टीट्यूट फॉर मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिवर्सिटी ऑफ बेलग्रेड से जुड़े हुए हैं। इस तकनीक के बारे में बताते हुए वे कहते हैं, ‘‘हमने सिंगल सेल वाली एलगी का इस्तेमाल किया है जो सर्बिया में तालाबों और झीलों में मौजूद हैं और नल के पानी में भी बढ़ सकती हैं।

इनमें उच्च और निम्न तापमान के लिए प्रतिरोध क्षमता भी है। यह सिस्टम बिना किसी खास रखरखाव के काम करता है। इसमें डेढ़ महीने में पानी बदलने और कुछ मिनरल डालने की जरूरत होती है। इसमें बना बायोमास एक उत्कृष्ट उर्वरक के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। सबसे बड़ी बात है कि यह माइक्रो एलगी अनिश्चितकाल तक बढ़ती रहती हैं।”

भारत के शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए लिक्विड-3 एक अभिनव और अत्यधिक आशाजनक समाधान लगता है। इसे अपनाकर भारत न सिर्फ वायु की गुणवत्ता में सुधार कर सकता है, बल्कि अधिक टिकाऊ या सस्टेनेबल शहर भी बना सकता है। भारत समेत पूरी दुनिया की बेहतरी के लिए ऐसे नवीन समाधानों को अपनाने का समय आ गया है।

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