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कृष्ण प्रताप सिंह का ब्लॉग: निखरते पर्यावरण के संदेश

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: April 10, 2020 06:14 IST

लॉकडाउन के कारण सड़कों पर वाहन व रेल पटरियों पर ट्रेनें नहीं चल रहीं तो उनसे होने वाली दुर्घटनाएं अपने आप ही थम गई हैं.

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कोरोना के कहर से दुनिया के अनेक विकसित व विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं को करारे आघात के आसार हैं. यह और बात है कि इस लॉकडाउन से कई हलकों में फायदों की भी बात कही जा रही है. खासकर नौकरीपेशा तबकों का एक बड़ा हिस्सा खुश है कि वर्क फ्रॉम होम यानी घर से काम करने की वजह से उसका दफ्तर जाने और वहां से आने में जाया होने वाला कई घंटों का समय बच रहा है. 

इसका लाभ उठाकर वह अपने पारिवारिक रिश्तों में नई जान तो ला ही रहा है, इस बात को लेकर भी खुश है कि उसके वेतन का वह बड़ा हिस्सा बच रहा है, जो डीजल-पेट्रोल या किराये की भेंट हो जाता था. इतना ही नहीं, ऐसा ही रहने पर उसे अपनी लाइफस्टाइल सुधरने की भी उम्मीद है. दूसरे पहलू से देखें तो सेवायोजकों के लिहाज से अच्छी बात यह है कि ‘वर्क फ्रॉम होम’ की सुविधा के कारण उनके काम के साथ कोई समझौता नहीं हो रहा और उनके कर्मचारियों को घर से काम करने की आदत बनने लगी है.

लॉकडाउन के कारण सड़कों पर वाहन व रेल पटरियों पर ट्रेनें नहीं चल रहीं तो उनसे होने वाली दुर्घटनाएं अपने आप ही थम गई हैं. अखबार उनमें जान-माल के नुकसानों की खबरों से भरे हुए नहीं आ रहे तो न्यूज चैनलों पर भी मौतों की प्राय: सारी खबरें कोरोना के ही नाम हैं. दिल्ली पुलिस की मानें तो उसके क्षेत्न में आपराधिक गतिविधियों में 42 प्रतिशत की कमी आई है.

लेकिन सच पूछिए तो लॉकडाउन का सबसे बड़ा लाभ हमारे पर्यावरण को हुआ है-बड़े शहरों की उस आबोहवा को, जो मनुष्य के प्रकृतिविरोधी क्रिया कलापों के कारण लगातार बिगड़ती जा रही थी और अब हर सुबह कुछ नई दिख रही है. आसमान भी प्रदूषण मुक्त, साफ और गर्द-गुबार रहित दिख रहा है- अपनी स्वाभाविक नीलिमा के साथ और सड़कों पर गंदगी भी नहीं है.

अरबों रुपए के ‘नमामि गंगे’ जैसे महत्वाकांक्षी अभियानों के बावजूद जो गंगा नदी अविरल व साफ नहीं हो पा रही थी, वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार वह अधिकांश स्थानों पर कम से कम नहाने लायक हो गई है. उसकी सहायक नदियों की स्थिति भी कमोबेश सुधरी है. दिल्ली में जो यमुना गंदा नाला बन गई थी, उसका पानी आसमानी रंग जैसा हो गया है.

लॉकडाउन के ये लाभ भारत तक ही सीमित नहीं हैं. चीन, इटली व स्पेन आदि कोरोना पीड़ित देशों में जनजीवन ठप होने के बाद लोगों को बहुत दिनों बाद आसमान में तारे स्पष्ट नजर आए हैं, जो पहले धुंध व धूल के चलते ठीक से नजर नहीं आते थे.

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