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Kisan Andolan Demands: अब किसानों के नाम पर फिर राजनीति और सड़क की लड़ाई

By आलोक मेहता | Updated: December 10, 2024 05:14 IST

Kisan Andolan Demands: भारत के फल, सब्जी का निर्यात करने के लिए सड़क, रेल, हवाई सुविधाओं और आर्थिक संसाधन सरकार और प्राइवेट क्षेत्र को बड़े इंतजाम करने होंगे.

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ठळक मुद्देकिसानों ने 6 दिसंबर को अपनी मांगों के समर्थन में दिल्ली कूच आंदोलन तेज कर दिया. किसानों के दिल्ली कूच में वह मरजीवड़ा जत्था है, जो शख्स किसी मकसद के लिए खुद को कुर्बान कर देता है. भाई मतीदास, सतीदास और भाई दयाला को भी शामिल किया था.

Kisan Andolan Demands: कांग्रेस सहित कई राजनैतिक पार्टियां  किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी, मुआवजे, मुफ्त बिजली इत्यादि की मांगों को लेकर नया तूफान खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं. किसानों को उनके खेतों की उपज का उचित मूल्य मिलना निश्चित रूप से जरूरी है. लेकिन देश की आवश्यकता के अनुसार अनाज, तिलहन के उत्पादन की प्राथमिकताएं तय होने पर ही सही दाम मिल सकते हैं. इसी तरह भारत के फल, सब्जी का निर्यात करने के लिए सड़क, रेल, हवाई सुविधाओं और आर्थिक संसाधन सरकार और प्राइवेट क्षेत्र को बड़े इंतजाम करने होंगे.

एक बार फिर संयुक्त किसान मोर्चा (गैरराजनीतिक) एवं किसान मजदूर मोर्चा के बैनर तले किसानों ने 6 दिसंबर को अपनी मांगों के समर्थन में दिल्ली कूच आंदोलन तेज कर दिया. इस बार किसानों के दिल्ली कूच में वह मरजीवड़ा जत्था है,  जो शख्स किसी मकसद के लिए खुद को कुर्बान कर देता है.

बताया जाता है कि श्री गुरु तेग बहादुर साहिब ने मरजीवड़ा जत्था (दल) बनाया था और इसमें भाई मतीदास, सतीदास और भाई दयाला को भी शामिल किया था. मतलब राजनीति के साथ धार्मिक भावना जोड़ दी है. दूसरी तरफ संसद में कांग्रेस और अन्य प्रतिपक्षी दल हमलावर हुए हैं.

संगरूर के खनौरी बॉर्डर पर किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाला ने  किसानों की मांगों को लेकर उपराष्ट्रपति धनखड़ को चिट्ठी भी लिखी. इस पर धनकड़ इतने भावुक और उत्तेजित हो गए कि मुंबई में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के शताब्दी समारोह में कृषि मंत्री शिवराज सिंह को कहने लगे, ‘‘एक-एक पल आपका भारी है.

कृपया करके मुझे बताइए कि किसानों से क्या वादा किया गया था? उनसे किया गया वादा क्यों नहीं निभाया गया? वादा निभाने के लिए हम क्या कर रहे हैं? गत वर्ष भी आंदोलन था, इस वर्ष भी आंदोलन हो रहा है. कालचक्र घूम रहा है, हम कुछ कर नहीं रहे हैं. पहली बार मैंने भारत को बदलते हुए देखा है. पहली बार मैं महसूस कर रहा हूं कि विकसित भारत हमारा सपना नहीं लक्ष्य है.

दुनिया में भारत कभी इतनी बुलंदी पर नहीं था. जब ऐसा हो रहा है तो मेरा किसान परेशान और पीड़ित क्यों है?’’ उपराष्ट्रपति ने अपने पद का उल्लेख करते हुए  शिवराज सिंह चौहान पर सवालों की बौछार कर दी.  देश भर में पार्टियों, जातियों, देसी-विदेशी चंदे से चलने वाले संगठनों के अनेकानेक नेता हैं.

तभी तो भारत सरकार दो महीने से किसानों के दावेदार नेताओं से कई बैठक कर चुकी है और आज भी बातचीत को तैयार है. सिंधु बॉर्डर पर पुलिस से थोड़े टकराव के बाद  प्रदर्शनकारी नेताओं ने तात्कालिक स्थगन कहकर बातचीत के लिए सहमति अवश्य दिखाई है, लेकिन मांगों की लंबी सूची होने के कारण क्या जल्दी समझौता संभव होगा या राजनीतिक दांव-पेंच चलते रहेंगे?

टॅग्स :Farmersकिसान आंदोलनfarmers protest
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