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दिनकर कुमार का ब्लॉगः अपने चुनावी वादों पर अमल करेगा मिजो नेशनल फ्रंट?

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: December 21, 2018 05:34 IST

सत्ता की बागडोर संभालने वाला एमएनएफ क्या अपने चुनावी वादों पर अमल कर पाएगा? 

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दिनकर कुमार

मिजोरम में हुए विधानसभा चुनाव में मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) ने कांग्रेस को सत्ता से बेदखल करते हुए भारी जीत हासिल की है. जिस समय राजनीतिक विश्लेषक कांग्रेस की शोचनीय पराजय के कारणों की पड़ताल कर रहे हैं, उसी समय यह सवाल भी पैदा होता है कि सत्ता की बागडोर संभालने वाला एमएनएफ क्या अपने चुनावी वादों पर अमल कर पाएगा? 

जोरामथांगा एमएनएफ के संस्थापक लालडेंगा के सहयोगी रह चुके हैं. 1957 में मिजोरम में भीषण अकाल पड़ा था और केंद्र पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए लालडेंगा ने उग्रवादी संगठन एमएनएफ का गठन कर सशस्त्न संग्राम शुरू कर दिया था. 30 जून 1986 को ऐतिहासिक मिजो शांति समझौता हुआ और एमएनएफ को राजनीतिक पार्टी का दर्जा मिला. जोरामथांगा ने लालडेंगा के उत्तराधिकारी के रूप में पार्टी का नेतृत्व संभाला. 

वह दस वर्षो तक (1998-2003 और 2003-2008) मिजोरम के मुख्यमंत्नी रह चुके हैं. 74 वर्षीय जोरामथांगा को मिजो समाज का हितैषी समझा जाता है. उनके ऊपर प्रत्येक आयु वर्ग के लोगों को भरोसा है. अलगाववाद के दौर में वे लालडेंगा के बाद दूसरे सर्वाधिक ताकतवर नेता थे. 1987 में जब एमएनएफ लालडेंगा के नेतृत्व में सत्ता में आई तब जोरामथांगा को वित्त एवं शिक्षा मंत्नी बनाया गया. 1990 में जब लालडेंगा का देहांत हो गया तब उनको एमएनएफ का अध्यक्ष चुना गया. राजनीतिक पर्यवेक्षक मानते हैं कि कांग्रेस से मिजोरम की जनता कुशासन, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, पिछड़ापन आदि वजहों से नाराज थी. अधिकतर सड़कें जर्जर हैं और राज्य को ऊर्जा संकट का भी सामना करना पड़ रहा है. इसके साथ ही राज्य के किसानों को भी विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. शिक्षित बेरोजगारों की तादाद बढ़ रही है.  

2008 में कांग्रेस ने उस समय एमएनएफ को सत्ता से बेदखल कर दिया था जिस समय मिजोरम के कई हिस्सों में अकाल जैसी स्थिति पैदा हो गई थी और लोगों को गंभीर खाद्य संकट का सामना करना पड़ रहा था. उस समय एमएनएफ प्रमुख जोरामथांगा को अपनी सीट चंफाई नॉर्थ पर शिकस्त खानी पड़ी थी. 

आज परिदृश्य पूरी तरह विपरीत है. 26 सीटों पर विजय हासिल कर एमएनएफ ने बहुमत की सरकार  बना ली है. वहीं जोरामथांगा राज्य के नौवें मुख्यमंत्नी के रूप में शपथ ले चुके हैं. 

एमएनएफ ने 1998 से 2008 तक मिजोरम पर शासन किया. उसके दूसरे कार्यकाल के अंतिम दिनों में आम लोग उससे नाराज होते गए, चूंकि उसने अपने किसी भी वादे को पूरा नहीं किया. एमएनएफ के खिलाफ जनता का आक्र ोश 2007 में सामने आने लगा, जब किसानों के संगठन जोरम कुथनाथाक्तू पाऊल ने राजधानी एजल में विरोध प्रदर्शन किया. किसान बेबस और असहाय हो गए थे क्योंकि लगातार दूसरे साल चूहों ने उनकी धान की फसल बर्बाद कर दी थी और उनके सामने फाकाकशी की नौबत आ गई थी. 700 से ज्यादा गांव ‘मौतम’ की चपेट में आ गए थे. 

मिजोरम में ‘मौतम’ उस परिघटना को कहा जाता है जब पचास साल के अंतराल पर बांस के फूल खिलते हैं और चूहों की तादाद बढ़ जाती है. ये चूहे फसल नष्ट कर देते हैं और अकाल की नौबत आ जाती है. मिजोरम में भीषण खाद्य संकट पैदा हो गया और तत्कालीन एमएनएफ सरकार आम लोगों को राहत देने में सफल नहीं हो पाई. सत्ता में रहते हुए एमएनएफ पर सशस्त्न उग्रवादी संगठनों के साथ सांठगांठ करने का आरोप लगा था. उस पर आरोप था कि उसने उग्रवादी संगठन सिनलुंग पीपुल्स लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन की स्थापना की थी. 

उस समय विपक्षी पार्टियों, नागरिक समाज, चर्च और किसानों के असंतोष से निपटने के लिए एमएनएफ सरकार ने जल्दबाजी में ख्वाज्वाल और नाथियल नामक दो नए जिलों का सृजन किया था. लेकिन तब भी वह लोगों के रोष को कम नहीं कर पाई थी.  

अब जोरामथांगा को सुनिश्चित करना होगा कि नई पारी में वह अतीत की गलतियों को नहीं दोहराएंगे और मिजोरम के तमाम राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक मुद्दों को हल करेंगे. चुनाव प्रचार के दौरान एमएनएफ ने वादा किया था कि वह सत्ता में आने पर मिजोरम को खाद्य आपूर्ति के मामले में आत्म निर्भर बनाएगा. उसने वादा किया था कि पूरे मिजोरम में बांस की खेती को लेकर एक सटीक नीति बनाई जाएगी और सामाजिक मसलों का समाधान किया जाएगा. 

मिजोरम में ड्रग्स का काफी प्रचलन है. हर साल कई युवा शराब के सेवन के अलावा मादक पदार्थो के सेवन की वजह से भी जान गंवाते रहे हैं. एमएनएफ का वादा है कि डॉक्टरों, समाज सुधारकों, खिलाड़ियों और शिक्षा शास्त्रियों को साथ लेकर सामाजिक मसलों का हल ढूंढा जाएगा और कई राहत केंद्रों की स्थापना की जाएगी. विजेता दल ने जनता को बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने का भी वादा किया है. आने वाले पांच साल एमएनएफ के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होंगे. उसे मिजोरम की जनता की कसौटी पर खरा उतरना होगा.  

टॅग्स :मिज़ो नेशनल फ्रंटमिज़ोरम चुनाव
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