MP Rajya Sabha: एक सीट, 'अनेक' जातियां; दिग्गी के 'दलित कार्ड' ने कांग्रेस में छेड़ा 'जातिगत गृहयुद्ध'

By मुकेश मिश्रा | Updated: April 15, 2026 13:30 IST2026-04-15T13:30:51+5:302026-04-15T13:30:56+5:30

MP Rajya Sabha: मध्य प्रदेश में कांग्रेस को राज्यसभा सीट के लिए जाति आधारित मांग में तेजी देखने को मिल रही है, जो वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के दूसरे कार्यकाल की समाप्ति के बाद खाली हो जाएगी।

MP Rajya Sabha One seat many castes Digvijay Dalit card sparks caste civil war within Congress | MP Rajya Sabha: एक सीट, 'अनेक' जातियां; दिग्गी के 'दलित कार्ड' ने कांग्रेस में छेड़ा 'जातिगत गृहयुद्ध'

MP Rajya Sabha: एक सीट, 'अनेक' जातियां; दिग्गी के 'दलित कार्ड' ने कांग्रेस में छेड़ा 'जातिगत गृहयुद्ध'

MP Rajya Sabha: मध्यप्रदेश कांग्रेस में राज्यसभा की एक अदद सीट के लिए वह 'मल्लयुद्ध' शुरू हुआ है, जिसकी तपिश ने दिल्ली दरबार तक की नींद उड़ा दी है। विधानसभा के संख्या बल के हिसाब से भाजपा की दो और कांग्रेस की एक सीट तय है, लेकिन इस इकलौती सीट पर कब्जे के लिए कांग्रेस के भीतर जो 'जातीय बिसात' बिछाई गई है, उसने पार्टी को सियासी अखाड़ा बना दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के चुनाव न लड़ने के फैसले से ज्यादा चर्चा उनके 'दलित कार्ड' की है, जिसने अपनों के बीच ही 'पैर खींचने' की राजनीति को चरम पर पहुंचा दिया है।

​ दिग्गी का 'दांव' और दलित दावेदारी का शोर 

सियासत के चाणक्य कहे जाने वाले दिग्विजय सिंह ने खुद को रेस से बाहर कर नेतृत्व को सुझाव दिया कि किसी 'दलित' को मौका मिले। उनके इस एक वाक्य ने मीनाक्षी नटराजन और कमलेश्वर पटेल जैसे दिग्गजों की राह में कांटे बो दिए हैं। दिग्गी के करीबी प्रदीप अहिरवार और फूल सिंह बरैया उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन असली 'बम' कमलनाथ समर्थक सज्जन सिंह वर्मा ने फोड़ा। वर्मा ने वरिष्ठता की दुहाई देते हुए कहा, "दशकों तक दरी बिछाकर सेवा की है, अब हक मेरा है।" वर्मा का यह बयान सीधे तौर पर दिग्गी के दलित कार्ड को लपककर अपनी दावेदारी पुख्ता करने की कोशिश है।

​ विंध्य की 'ब्राह्मण हुंकार' और सिंधी समाज का 'हक' 

मामला तब और उलझ गया जब विंध्य के ब्राह्मण गुट ने पीसीसी अध्यक्ष जीतू पटवारी के बंगले पर दस्तक दे दी। दिग्विजय सिंह के ही खास सिपहसालार पीसी शर्मा ने ब्राह्मणों की इस मांग को हवा देकर आग में घी का काम किया है। विंध्य में ब्राह्मण नेतृत्व के शून्य को भरने के तर्क के बीच सिंधी समाज भी कूद पड़ा है। रीवा से दिलीप थरवानी ने राहुल गांधी और खड़गे को पत्र लिखकर दो टूक कह दिया है कि अब तक सिंधी समाज को नजरअंदाज किया गया, अब राज्यसभा ही एकमात्र विकल्प है।

​ नकुलनाथ की एंट्री और 'शह-मात' का खेल 

इस जातीय शोर के बीच सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया जब कमलनाथ ने खुद को किनारे कर बेटे नकुलनाथ के लिए 'लॉबिंग' शुरू कर दी। नकुलनाथ की सक्रियता ने संकेत दे दिए हैं कि कमलनाथ गुट किसी भी कीमत पर यह सीट हाथ से जाने नहीं देना चाहता।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि दिग्विजय सिंह ने 'पासा' ऐसा फेंका है कि फैसला चाहे किसी के पक्ष में हो, उसका 'रिमोट' या तो उनके पास रहेगा या फिर कमलनाथ के। फिलहाल, कांग्रेस की यह एक सीट 'जाति, परिवार और वरिष्ठता' के ऐसे त्रिकोण में फंस गई है, जहां से निकलने का रास्ता हाईकमान के लिए भी किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है। यदि समय रहते इस 'जातीय गृहयुद्ध' को नहीं रोका गया, तो भाजपा की 'गिद्ध दृष्टि' इस सीट पर भी सेंध लगा सकती है।

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