लाइव न्यूज़ :

शशांक द्विवेदी का ब्लॉग: इंटरनेट की गिरफ्त में बचपन

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: November 14, 2018 22:33 IST

इंटरनेट ने पूरी दुनिया को ग्लोबल विलेज की तरह बनाने में एक बड़ी भूमिका बनाई लेकिन अब यही इंटरनेट पूरी दुनिया के बच्चों, किशोरों और युवाओं को तेजी से साइबर एडिक्ट भी बना रहा है.

Open in App

(लेखक-शशांक द्विवेदी) इंटरनेट ने पूरी दुनिया को ग्लोबल विलेज की तरह बनाने में एक बड़ी भूमिका बनाई लेकिन अब यही इंटरनेट पूरी दुनिया के बच्चों, किशोरों और युवाओं को तेजी से साइबर एडिक्ट भी बना रहा है. दुनियाभर में नशीले पदार्थो का कारोबार जिस तेजी से फैल रहा है, उससे अधिक रफ्तार से बच्चे इंटरनेट और सोशल मीडिया की लत में घिरते जा रहे हैं. 

पिछले दिनों दिल्ली पुलिस और एम्स की बिहेवियर एडिक्शन यूनिट द्वारा संयुक्त रूप से किए गए सर्वे में यह बात सामने आई है कि स्कूलों में पढ़ने वाले हर पांच छात्न में से एक छात्न प्रॉब्लमैटिक इंटरनेट यूजर यानी पीआईयू का शिकार है. पीआईयू का अर्थ है कि हर पांच में से एक छात्न इंटरनेट की बुरी लत का शिकार है. इंटरनेट गेमिंग, सर्फिग या सोशल नेटवर्किग साइट्स के दीवाने इन युवाओं का इंटरनेट का क्रेज इनकी पढ़ाई, सोशल लाइफ और करियर को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है. सर्वे के मुताबिक 37 प्रतिशत छात्न अपने मिजाज और पढ़ाई के प्रेशर से ध्यान हटाने के लिए इंटरनेट का सहारा ले रहे हैं.

 वर्तमान दौर में सोशल मीडिया से बच्चे और किशोर न सिर्फ तेजी से जुड़ रहे हैं बल्कि इसकी लत के शिकार हो रहे हैं. इसी डिजिटल लत से छुटकारा पाने के लिए अमेरिका, चीन, दक्षिण कोरिया, अल्जीरिया सहित कई देशों में क्लीनिक खोले गए हैं. अपने देश के भी बेंगलुरु और दिल्ली जैसे मेट्रो शहरों में इंटरनेट डी-एडिक्शन सेंटर्स खोले जा रहे हैं. इन डी-एडिक्शन सेंटर्स पर ‘जिंदगी को ऑफलाइन बनाने’ पर काम किया जाता है. डिजिटल लत की वजह से लोग अपनी वास्तविक समस्याओं से कतरा रहे हैं, मौलिक चिंतन और मौलिक सोच कम हो रही है, साथ ही लोगों का सामाजिक दायरा भी कम हो रहा है. इंटरनेट एडिक्शन एक ऐसी मन:स्थिति है, जब लोग घंटों ऑनलाइन गेम, नेट सर्फिग या सोशल साइट्स पर असीमित समय बिताने लगते हैं. खुद पर नियंत्नण कम होता जाता है.   

पिछले कई वर्षो में सूचना तकनीक ने जिस तरह से तरक्की की है, इसने मानव जीवन पर बेहद गहरा प्रभाव डाला है. न सिर्फ प्रभाव डाला है, बल्कि एक तरह से इसने जीवनशैली को ही बदल डाला है. शायद ही ऐसा कोई होगा, जो इस बदलाव से अछूता होगा. बच्चों का बचपन भी अब इंटरनेट की गिरफ्त में आ चुका है या यह कहें कि बच्चे भी अब तेजी से इंटरनेट की गुलामी की तरफ बढ़ रहे हैं. असल में युवा वर्ग सूचनाओं के बोझ से दबा जा रहा है और उसके खुद के सोचने और समझने की क्षमता लगातार कम होती जा रही है. साथ ही काम में मौलिकता का अभाव स्पष्ट रूप से दिख रहा है. साइबर एडिक्शन  की लत से छुटकारा पाने के लिए सरकार के साथ सामाजिक और परिवार के स्तर पर भी पहल करनी होगी.

टॅग्स :इंटरनेट
Open in App

संबंधित खबरें

विश्वIran Protests: ईरान में मुफ्त इंटरनेट सेवा बंद, पूरी दुनिया से काटे तार

भारतइंटरनेट की दुनिया के जोखिमों से भी सचेत रहें

भारत'123456' से 'India@123' तक..., 2025 इंटरनेट के सबसे कॉमन पासवर्ड हुए लीक

भारतUP News: दशहरा उत्सव से पहले बरेली मंडल में हाई अलर्ट, बरेली में इंटरनेट सेवा और 48 घंटे के लिए बंद

टेकमेनियाएआई की सफलताएं शानदार, लेकिन सतर्क भी रहें!

भारत अधिक खबरें

भारतNari Shakti Vandan Adhiniyam: महिलाएं राजनीति में सुधार ला सकेंगी?

भारतNari Shakti Vandan Adhiniyam: समावेशी लोकतंत्र की निर्णायक दिशा में कदम

भारतदक्षिण भारत के 5 राज्य में अभी 129 सांसद और परिसीमन के बाद होंगे 195?, कर्नाटक में 42,आंध्र प्रदेश में 38, तेलंगाना में 26, तमिलनाडु में 59 और केरल में 30?, अमित शाह ने समझाया गणित?

भारतमध्यप्रदेश: आचार्य शंकर की गुरु एवं संन्यास भूमि ओंकारेश्वर में मनाया जाएगा एकात्म पर्व, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित द्वारका शंकराचार्य सदानंद सरस्वती करेंगे शुभारंभ

भारतमहाराष्ट्र: 1 मई से रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा ज़रूरी