लाइव न्यूज़ :

ब्लॉग: शांतिनिकेतन ने सिखाया था अनुशासन

By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: October 31, 2023 10:41 IST

जवाहरलाल नेहरू साल 1934 में कमला नेहरू के साथ शांतिनिकेतन पहुंचे। वहां उन्होंने गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की देखरेख में चल रहे इस स्कूल को देखा और निश्चय किया कि बेटी इंदिरा की शिक्षा और संस्कार के लिए शांतिनिकेतन से अच्छा कोई स्कूल नहीं है।

Open in App
ठळक मुद्देजवाहरलाल नेहरू साल 1934 में कमला नेहरू के साथ शांतिनिकेतन पहुंचे थेउन्होंने तय किया कि इंदिरा की शिक्षा के लिए शांतिनिकेतन से अच्छा कोई स्कूल नहीं हो सकता हैउससे पहले इंदिरा गांधी पूना के प्यूपिल स्कूल में पढ़ाई कर रही थीं

यह 1934 की बात है। जवाहरलालजी श्रीमती कमला नेहरू को साथ लेकर शांतिनिकेतन पहुंचे। गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की देखरेख में चल रहे इस स्कूल को देखकर ही उन्होंने निश्चय किया कि बेटी को सही शिक्षा और संस्कार देने के लिए शांतिनिकेतन से अच्छा कोई स्कूल नहीं है।

इससे पूर्व इंदिरा पूना (वर्तमान पुणे) के प्यूपिल स्कूल में पढ़ी थीं। परिवार में बहुत विचार-विमर्श हुआ। कारण यह था कि इंदिरा बचपन से ही बड़े लाड़-प्यार में पली और बड़ी हुई थीं। शांतिनिकेतन में जीवन बड़ा कठोर था। वहां बच्चों को अपने पैरों पर खड़े होने की, स्वावलंबन पर जीने की शिक्षा दी जाती थी।

गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने पूरी तरह भारतीय वातावरण में इस स्कूल को प्रारंभ किया था। वहां बिल्कुल गुरुकलों जैसा जीवन था। इंदिरा के परिवार वाले सोच रहे थे कि इंदिरा वहां का कठोर जीवन किस तरह जी पाएंगी? पर अंत में जवाहरलालजी की इच्छा ही पूरी हुई।

स्वयं इंदिरा गांधी ने भी पढ़ने के लिए शांतिनिकेतन को पसंद किया. पिता की तरह वह भी चाहती थीं कि जीवन की कठोरताओं का सामना करना आना ही चाहिए। इस जीवन में मनुष्य को बहुत बुरे-भले दिन देखने पड़ते हैं, इसलिए उसे चाहिए कि वह हर हालात का मुकाबला करने के लिए अपने आपको तैयार रखे।

इंदिरा 1934 में शांतिनिकेतन पहुंचीं। वहां न तो नौकर-चाकर थे, न ही कोई खोज खबर लेनेवाला। वहां का जीवन कठोर था। स्वयं को नियमपूर्वक चलाना था। वहां का अनुशासन बड़ा कड़ा था। आरामपरस्ती तोड़ने वाले बहुतेक नियम थे वहां, जिन कमरों में छात्र-छात्राएं रहते थे, वहां कितनी भी गरमी क्यों न हो, पंखे नहीं लगते थे।

सारी पढ़ाई लालटेन की रोशनी में होती थी। हर सुबह स्नान के समय अपने-अपने कपड़े छात्र धोएं, यही नियम था। रसोई से लेकर हर काम में छात्र ही जुटते। उनकी ड्यूटी लगती रहती थी। पर सबके बीच स्नेह था। सब एक-दूसरे से गहरा प्रेम करते थे। मातृभूमि के प्रति लगाव वाली रचनाएं पढ़ाई-सुनाई जाती थीं। देश की आजादी का पाठ मिलता था।

दुबली-पतली इंदिरा ने शांतिनिकेतन के उस नियमबद्ध जीवन के साथ अपने आपको ढालना प्रारंभ किया और कुछ ही दिनों में वह वहां की सभी छात्राओं में सबसे आगे मानी जाने लगीं। उन्होंने शिक्षक-शिक्षिकाओं से गहरा स्नेह कमा लिया। सब उन्हें पसंद करने लगे। सब उनके नाजुक, सुकुमार शरीर के बावजूद समझ गए कि लड़की में कठोरता और साहस भी अद्भुत है।

स्वयं इंदिरा गांधी ने शांतिनिकेतन के उस जीवन काल को लेकर कई बार बाद के जीवन में कहा, ‘मैंने वहीं भारत को देखा, सीखा, उसको समझा और महसूस किया...’

टॅग्स :इंदिरा गाँधीजवाहरलाल नेहरूकांग्रेस
Open in App

संबंधित खबरें

भारतTTAADC Election Results: कुल 28 सीट, टिपरा मोथा पार्टी को 24 और बीजेपी को 4 सीट?, 0 पर ढेर सीपीआई, कांग्रेस, आईपीएफटी?

भारतअब समय आ गया है?, आप घर में मां-बहन-बेटी-पत्नी सबका स्मरण करते हुए अपनी अंतरात्मा को सुनिए?, प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों से महिला आरक्षण विधेयक के पक्ष में मतदान करने की अपील की

भारतTTAADC Election Results: भाजपा उम्मीदवार माजी देबबर्मा को 20823 वोट से हराया, टीएमपी प्रत्याशी गीता ने पेकुआरजला-जनमेजय नगर सीट पर किया कब्जा

भारतगिरगिट की तरह रंग बदलने वाली पार्टी कांग्रेस-सपा?, बसपा प्रमुख मायावती ने कहा-SC, ST और OBC समाज पर बात ना करें राहुल गांधी, एक्स पर 7 प्वाइंट में रखीं बात?

भारतNari Shakti Vandan Adhiniyam: महिलाएं राजनीति में सुधार ला सकेंगी?

भारत अधिक खबरें

भारत"उन्हें सुनना सिरदर्द जैसा था..वह अपने बचपन के ट्रॉमा से गुजर रहे हैं", लोकसभा में राहुल गांधी के भाषण पर BJP सांसद कंगना रनौत ने कहा, VIDEO

भारत1 अणे मार्ग से सुनहरी बाग रोड स्थित टाइप-8 श्रेणी का 9 नंबर बंगला?, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा

भारतप्रधानमंत्री और मेरे बीच पत्नी को लेकर कोई समस्या नहीं?, लोकसभा में अलग मूड में दिखे राहुल गांधी, वीडियो

भारतहर कोई जानता जादूगर और व्यापारी के बीच साझेदारी?, राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को 'जादूगर' कहा, वीडियो

भारतसम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने पर भाजपा में अंदरूनी खुशी नहीं?, "कमांडर के आदेश" को लेकर सियासी चर्चाओं का बाजार गर्म, विजय सिन्हा हो रहे ट्रोल?