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वैश्विक आतंकी घोषित होने के बाद अब्दुल रहमान मक्की ने जेल से जारी किया वीडियो, कश्मीर पर उगला जहर

By शिवेंद्र राय | Updated: January 20, 2023 14:32 IST

जेल से जारी अपने वीडियो में मक्की ने ये भी कहा कि उसने 1980 के दशक में इस्लामिक यूनिवर्सिटी इस्लामाबाद में कभी अध्ययन या अध्यापन नहीं किया था, जहां उस पर अल-कायदा के नेताओं या अफगान कमांडरों से मिलने का आरोप लगाया गया था।

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ठळक मुद्देअब्दुल रहमान मक्की ने जेल से जारी किया वीडियोवैश्विक आतंकियों की सूची में शामिल होने के बाद पहली बार सामने आयाकश्मीर पर उगला जहर, ओसामा पर भी बात की

नई दिल्ली: हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की तरफ से वैश्विक आतंकियों की सूची में शामिल किए गए अब्दुल रहमान मक्की ने गुरुवार को लाहौर की कोट लखपत जेल से एक वीडियो जारी किया। पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के उपनेता मक्की ने इस वीडियो में कहा कि उसका कायदा या इस्लामिक स्टेट के साथ किसी भी तरह के संबंध नहीं है। इसके अलावा वीडियो में मक्की ने भारत और कश्मीर के खिलाफ भी जहर उगला।

68 वर्षीय मक्की ने कहा, "मेरी लिस्टिंग का आधार भारत सरकार की गलत सूचना पर आधारित है। मैं ओसामा बिन लादेन, अयमान अल-जवाहिरी या अब्दुल्ला आजम से कभी नहीं मिला, जैसा कि कुछ रिपोर्टों में आरोप लगाया गया है।" मक्की ने आगे कहा, " मैं कश्मीर के संबंध में पाकिस्तान सरकार की स्थिति में विश्वास करता हूं और अल-कायदा और आईएसआईएस जैसे समूहों द्वारा किए गए सभी प्रकार के आतंकवाद और हिंसा की निंदा करता हूं।"

बता दें कि आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का उपनेता अब्दुल रहमान मक्की मुंबई आतंकी हमले का मास्टरमाइंड और जमात-उद-दावा के संस्थापक हाफिज सईद का रिश्तेदार है। भारत और उसके सहयोगियों के वर्षों के प्रयासों के बाद मक्की को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आईएसआईएस और अल कायदा प्रतिबंध समिति ने वैश्विक आतंकियों की सूची में शामिल किया था।

अब्दुल रहमान मक्की 2019 से ही जेल में है जहां वह हाफिज सईद और अन्य आतंकियों के साथ आतंकी गतिविधियों के वित्त-पोषण संबंधी मामलों में सजा काट रहा है। हालांकि माना जाता है कि पाकिस्तान सरकार ने सिर्फ दुनिया को दिखाने के लिए मक्की को जेल में रखा है। अब्दुल रहमान मक्की जेल से ही आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देता रहता है।

जेल से जारी अपने वीडियो में मक्की ने ये भी कहा कि उसने 1980 के दशक में इस्लामिक यूनिवर्सिटी इस्लामाबाद में कभी अध्ययन या अध्यापन नहीं किया था, जहां उस पर अल-कायदा के नेताओं या अफगान कमांडरों से मिलने का आरोप लगाया गया था।

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