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राम मंदिर ट्रस्ट पर सरकार से दुखी संत

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: February 6, 2020 23:05 IST

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 राम मंदिर निर्माण के लिए बने ट्रस्ट में जितने नाम हैं वो तो सरकार को धन्यवाद दे रहे हैं लेकिन मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे कई संत खुलकर तो नहीं लेकिन अपना दर्द किसी और तरीके से ज़ाहिर करते रहे है. राम जन्मभूमि न्यास के उपाध्यक्ष राम विलास वेदांती ने कहा है कि राम जन्मभूमि ट्रस्ट के घोषित नामों में उनका नाम नहीं होने का उन्हें कोई दुख नहीं है बल्कि ट्रस्ट घोषित होने की खुशी है ..वेदांती ने कहा कि सरकार चाहे तो मंदिर की नींव के अंदर मेरा शरीर- मेरी लाश को लगा दे, लेकिन भव्य राम मंदिर का निर्माण होना चाहिए. वेदांती कहते हैं कि हमें के. पारासरन को ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाये जाने एवं जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद जी, स्वामी परमानंद जी महाराज को ट्र्स्ट में शामिल किये जाने की खुशी है. अयोध्या के संत-महात्माओं, विश्व हिन्दू परिषद, आरएसएस एवं भाजपा ने इसका समर्थन किया है..मैं भी समर्थन करता हूं.. हम चाहते हैं कि राष्ट्रीय स्तर पर संत लोग इसका समर्थन करें।’’ उन्होंने कहा कि मुझे ट्रस्ट के घोषित नामों में अपने नाम के नहीं होने का दुख नहीं है क्योंकि यह जरूरी नहीं है कि सबके नाम ट्रस्ट में शामिल हों। हम तो राम मंदिर आंदोलन में बलिदान देने वाले ऐसे लोगों, जिनको नाम नहीं दिया गया है, के साथी रहे हैं..वेदांती ने कहा, ‘‘बलिदान देने वाले अशोक सिंहल, महंत अवैद्यनाथ, स्वामी परमहंस रामचंद्र जी महाराज, जगद्गुरु शंकराचार्य, स्वामी शांतानंद जी महाराज, उडुपी के स्वामी विश्वकीर्त महाराज जैसे लोगों ने आंदोलन को बढ़ाया था, जिनकी कृपा से ही सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया है.. "हम सब लोग तो नींव के पत्थर हैं.. हम सभी ऐसे लोग हैं जिन्हें नाम तो नहीं दिया गया है, हमलोग दिखाई भले नहीं दें लेकिन काम हमलोग ही करेंगे, ऐसी मजबूत दीवार बनाएंगे जिसे दुनिया की कोई ताकत तोड़ नहीं सकेगी.. ट्रस्ट की घोषणा पर खुशी जताते हुए वेदांती ने कहा, हमारी कामना है कि भगवान श्री राम का मंदिर विश्व का सबसे ऊंचा मंदिर हो, जो इतना ऊंचा हो कि इस्लामाबाद, लाहौर, कराची, श्रीनगर, लंका, काठमांडू, कलकत्ता और दिल्ली से दिखाई दे. ये तो संतो का दर्द बीजेपी के पूर्व सहयोगी शिवसेना ने राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट की घोषणा करने के समय को लेकर भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि इस मुद्दे पर राजनीति की उम्मीद नहीं थी लेकिन दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इसकी नींवरखी जा चुकी है.. शिवसेना ने बृहस्पतिवार को अपने मुखपत्र ‘सामना’ के एक संपादकीय में कहा, ‘‘ मोदी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक चार दिन पहले जय श्री राम का नारा दिया। श्री राम की मदद से अगर दो-चार सीटें बढ़ गईं तो खुश होंगे.. शिवसेना ने कहा कि ट्रस्ट के बारे में प्रधानमंत्री की घोषणा के लिए उच्चतम न्यायालय को पहले धन्यवाद देना होगा क्योंकि शीर्ष अदालत ने ही पिछले साल नवम्बर में मंदिर के निर्माण का आदेश दिया था। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी ने कहा कि वह पहले दिन से ही मंदिर निर्माण के अभियान में सक्रिय थी.
टॅग्स :राम मंदिरराम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामलाअयोध्याअयोध्या फ़ैसलाशिव सेनामोदी
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