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जानिए Juna Akhara का इतिहास जिससे जुड़े थे Palghar में Mob Lynching का शिकार साधु

By आदित्य द्विवेदी | Updated: April 21, 2020 15:38 IST

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महाराष्ट्र के पालघर में मॉब लिंचिंग की घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। इस घटना में मारे गए साधु कल्पवृक्षगिरि महाराज और सुशील गिरि महाराज जूना अखाड़े से जुड़े हुए थे। अब आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि ये अखाड़ा क्या होता है? दरअसल, हिंदू धर्म में संतो महंतो को कई अखाड़ों में बांटा गया है। माना जाता है कि इसकी स्थापना आदिगुरु शंकराचार्य ने की थी। उन्होंने जिन सात अखाड़ों की स्थापना की थी उनके नाम हैं- महानिर्वाणी, निरंजनी, जूना, अटल, आवाहन, अग्न और आनंद अखाड़ा। मौजूदा वक्त में 13 अखाड़े अस्तित्व में हैं। इन सभी अखाड़ों में कुल मिलाकर करीब 13 लाख संत-महंत हैं। सबसे बड़ा अखाड़ा जूना अखाड़ा माना जाता है जहां साधुओं की संख्या 4 लाख से भी ज्यादा है। इनमें नागा साधु भी बड़ी संख्या में हैं। इस वक्त आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि जूना अखाड़े के प्रमुख हैं। साल 1998 में उनकी इस पद पर नियुक्ति हुई थी।
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