पिछली सदियों में जो नुकसान हुआ, उसमें जनधन की ही हानि हुई. पर अब जो पाशविक वृत्ति की सत्ताएं हैं, वो लगभग दुनिया के हर देश में हैं. ऐसी तबाही मच रही है, जिसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियां बहुत गहराई तक महसूस करेंगी. पर उससे उबरने के लिए उनके पास बहुत व ...
हिंदी उर्दू के आपसी रिश्ते पर नामवर सिंह (1 मई 1927 - 19 फरवरी 2019) का यह लेख राजकमल प्रकाशन की किताब 'ज़माने से दो-दो हाथ' से साभार प्रस्तुत किया जा रहा है। ...
पालतू बोहेमियन: मनोहर श्याम जोशी ऐसे ही अपवाद हैं, जो एक साथ एक ही समय पारंपरिक और आधुनिक दुनिया में निवास करते पाठकों का मनोरंजन करते हैं। जितनी विधाओं में उन्होंने लेखन किया है, वह भी विस्मित करने वाला ही लगता है। पत्रकारिता, संस्मरण, कहानी, उपन्या ...
जनवरी 2019 से यहां एएसआई की टीम खुदाई में जुटी हुई थी. तीन महीने तक खुदाई चली. इसके बाद यहां से हासिल पुरावशेषों का अध्यययन व डॉक्यूमेंटेशन किया गया. खुदाई में स्पष्ट हुआ है कि करीब 3000 से 4000 साल पूर्व यहां लौहयुगीन मानव काफी बड़े मकानों में निवास ...
बेटों से गुस्सा हैं। गुस्सा इसलिए क्योंकि बेटे पिता के सिद्धान्तों को नहीं मानते हैं। पत्नी फोन पर रोती हैं। दामाद भी मनाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन अंकल हैं कि... ...
भारत ने वर्ष 2006 में पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी स्थिति के दौरान नेपाल और श्रीलंका के कुछ नागरिकों सहित करीब 2,300 लोगों को सुरक्षित स्वदेश वापस लाया था। दरअसल, ये लोग इजराइल-लेबनान संघर्ष में फंस गए थे। एक नयी पुस्तक में यह दावा किया गया है। ...
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की सरजमी पर कभी जीवंत रहे किरदारों को युवा लेखक हिमांशु बाजपेई ने अपनी किताब 'किस्सा किस्सा लखनउवा' में उकेरने की कोशिश की है। ...