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Chhatrapati Shivaji Maharaj Jayanti: पूरे दक्षिणी भारत में राज करने वाले मराठा राजा थे छत्रपति शिवाजी महाराज, जानें उनके बारे में सबकुछ 

By अनुराग आनंद | Updated: February 19, 2020 12:01 IST

शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी 1630 में शिवनेरी दुर्ग में हुआ था। 6 जून 1674 को शिवाजी मुगलों को परास्त कर लौटे और उनका मराठा शासक के रूप में राज्याभिषेक हुआ था।

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ठळक मुद्देबचपन में शिवाजी अपनी आयु के बालक इकट्ठे कर उनके नेता बनकर युद्ध करने और किले जीतने का खेल खेला करते थे। शिवाजी की नौसेना की कमान सिद्दी संबल के हाथों में थी।

मराठा सम्राज्य की नींव रखने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज की आज जयंती है। देश के वीर सपूतों में से एक देश के सर को उंचा करने वाले शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी 1630 में शिवनेरी दुर्ग में हुआ था। 6 जून 1674 को शिवाजी मुगलों को परास्त कर लौटे और उनका मराठा शासक के रूप में राज्याभिषेक हुआ था।

इसके बाद शिवाजी महाराज ने दक्षिणी भारत के अधिकांश सम्राज्य पर अपना एकाधिकार कर लिया था। उनके बचपन से लेकर युद्ध जीतने तक की कहानी जानेंगे। इससे पहले उनके राज काज को लेकर सर्वधर्म समभाव के विचार के बारे में जान लेते हैं।

सर्वधर्म समभाव के विचार से राज करते थे शिवाजी

शिवाजी महाराज के बारे में यह भी कहा जाता है कि वह मुस्लिमों से दूरी बनाए रखते थे। लेकिन, बीबीसी की एक रिपोर्ट से पता चलता है कि हिंदू जिताना ही मुस्लिम भी शिवाजी महाराज को पसंद करते थे। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि शिवाजी हिंदू व मूसलमान को समान रूप से सम्मान देते थे। 

एक घटना के माध्यम से बताया गया है कि एक बार धुर हिंदू दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं ने प्रतापगढ़ में अफ़ज़ल ख़ान का मकबरा तोड़ने की कोशिश की। यह उपद्रव तब जाकर रूका जब लोगों को यह बताया गया कि इस मकबरे को खुद शिवाजी ने खड़ा किया था।

शिवाजी वो राजा थे जो सभी धर्मों का सम्मान करते थे। उनकी नौसेना की कमान सिद्दी संबल के हाथों में थी और सिद्दी मुसलमान उनके नौसेना में बड़ी संख्या में थे। 

जब शिवाजी आगरा के किले में नजरबंद थे तब कैद से निकल भागने में जिन दो व्‍यक्तियों ने उनकी मदद की थी उनमें से एक मुसलमान थे, उनका नाम मदारी मेहतर था। इसी तरह उनके गुप्‍तचर मामलों के सचिव मौलाना हैदर अली थे और उनके तोपखाने की कमान इब्राहिम ख़ान के हाथों में थी।

शिवाजी महाराज के बचपन की कहानी-

बचपन में शिवाजी अपनी आयु के बालक इकट्ठे कर उनके नेता बनकर युद्ध करने और किले जीतने का खेल खेला करते थे। बचपन में उनका पूरा नाम शिवाजी भोंसले था। शिवाजी कई कलाओं में माहिर थे, उन्होंने बचपन में राजनीति एवं युद्ध की शिक्षा ली थी।

महाराणा प्रताप की तरह वीर शिवाजी राष्ट्रीयता के जीवंत प्रतीक एवं परिचायक थे। युवावस्था में आते ही उनका खेल वास्तविक बन गया और वह शत्रुओं पर आक्रमण कर उनके किले आदि जीतने लगे। होनहार विरवान के होत चिकने पात वाली बात शिवाजी महाराज पर बिल्कुल सही बैठता है। 

शिवाजी के पिता का नाम शाहजी और माता का नाम जीजाबाई था। उनका बचपन उनकी माता जिजाऊ के मार्गदर्शन में बीता। माता जीजाबाई धार्मिक स्वभाव वाली थी, इसके बाद भी वो वीरंगना नारी थीं। इसी कारण उन्होंने बालक शिवा का पालन-पोषण रामायण, महाभारत तथा अन्य भारतीयों कहानियां सुनाते हुए उन्हें शिक्षा देकर पाला था।

शिवाजी महाराज की शादी -

शिवाजी महाराज का विवाह सन् 14 मई 1640 में सइबाई निम्बालकर के साथ लाल महल, पुना में हुआ था. उनके पुत्र का नाम सम्भाजी था. सम्भाजी शिवाजी के ज्येष्ठ पुत्र और उत्तराधिकारी थे, जिन्होंने 1680 से 1689 ई. तक राज्य किया। उनके पुत्र का नाम सम्भाजी था। सम्भाजी (14 मई, 1657 - मृत्यु: 11 मार्च, 1689) को हो गई थी। शिवाजी के ज्येष्ठ पुत्र और उत्तराधिकारी थे, जिसने 1680 से 1689 ई. तक राज्य किया। 

शिवाजी ने मुगल राजाओं को किया था परास्त-

शिवाजी महाराज की मुगलों से पहली मुठभेड़ वर्ष 1656-57 में हुई थी। बीजापुर के सुल्तान आदिलशाह की मृत्यु के बाद वहां अराजकता का माहौल पैदा हो गया था, जिसका लाभ उठाते हुए मुगल बादशाह औरंगजेब ने बीजापुर पर आक्रमण कर दिया। उधर, शिवाजी ने भी जुन्नार नगर पर आक्रमण कर मुगलों की ढेर सारी संपत्ति और 200 घोड़ों पर कब्जा कर लिया। इसके परिणामस्वरूप औरंगजेब शिवाजी से खफा हो गया।

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