लाइव न्यूज़ :

'केवल मदरसों के खिलाफ ही कार्रवाई क्यों हो रही है, गुरुकुल में क्यों नहीं?' मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने उठाया सवाल

By रुस्तम राणा | Updated: September 4, 2022 21:49 IST

एआईएमपीएलबी के कार्यकारी सदस्य कासिम रसूल इलियास ने कहा, मदरसों को निशाना बनाया जा रहा है … चाहे वह उत्तर प्रदेश में हो या असम में। यह इस तथ्य के बावजूद है कि अल्पसंख्यक संस्थान कानून के तहत संरक्षित हैं। 

Open in App
ठळक मुद्देएआईएमपीएलबी के कार्यकारी सदस्य कासिम रसूल इलियास ने कहा, मदरसों को निशाना बनाया जा रहा हैइलियास ने कहा- यूपी में मदरसों की कुल संख्या का कोई स्पष्ट अनुमान नहीं हैयूपी सरकार ने राज्य में मदरसों से जुड़ी जानकारी जुटाने के लिए सर्वेक्षण करने को कहा है

नई दिल्ली: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने राज्य में गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वेक्षण करने के उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले पर सवाल उठाया है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस कदम को भाजपा शासित राज्यों द्वारा मदरसों को "टारगेट" करने का हिस्सा बताया है। रविवार को एआईएमपीएलबी के कार्यकारी सदस्य कासिम रसूल इलियास ने कहा, मदरसों को निशाना बनाया जा रहा है … चाहे वह उत्तर प्रदेश में हो या असम में। यह इस तथ्य के बावजूद है कि अल्पसंख्यक संस्थान कानून के तहत संरक्षित हैं। 

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अधिकारी ने कहा, असम में, सरकार कुछ छोटे मदरसों को ध्वस्त किया गया है जबकि अन्य को स्कूलों में परिवर्तित किया जा रहा है। उन्होंने कहा अगर मुद्दा धार्मिक शिक्षा को प्रतिबंधित करने और इसके बजाय धर्मनिरपेक्ष शिक्षा को बढ़ावा देने का है, तो सरकार गुरुकुलों के खिलाफ वही कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है?

इलियास ने कहा कि यूपी में मदरसों की कुल संख्या का कोई स्पष्ट अनुमान नहीं है, लेकिन सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें करीब 4% मुस्लिम बच्चे पढ़ते हैं, इनकी संख्या हजारों होने की संभावना है। एआईएमपीएलबी के अनुसार, सच्चर समिति का अनुमान अपने आप में एक "कम करके आंका गया" था। पैनल ने 2006 में अपनी रिपोर्ट वापस सौंपने के साथ, संख्या कई गुना बढ़ गई है।

इस्लामिक शिक्षण की संरचना को निर्धारित करते हुए, इलियास ने कहा कि यह अनिवार्य रूप से तीन प्रकार के संस्थानों के माध्यम से प्रसारित किया गया था - मकतब, जो हर दिन कई घंटों के लिए मस्जिदों के अंदर आयोजित धार्मिक कक्षाएं हैं; छोटे मदरसे या हिफ्ज, जहां 8-10 साल की उम्र तक के छोटे छात्रों को कुरान याद करना सिखाया जाता है; और आलिमियत या बड़े मदरसे जहां छात्रों को इस्लामी विचारधारा, कुरान की व्याख्या के साथ-साथ पैगंबर मोहम्मद के शब्द और अन्य धार्मिक मामलों की शिक्षा दी जाती है। 

आपको बता दें कि यूपी में योगी आदित्यनाथ सरकार ने मदरसों के एक सर्वेक्षण की घोषणा करते हुए कहा कि वह शिक्षकों की संख्या, उनके पाठ्यक्रम और उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं के बारे में जानकारी इकट्ठा करना चाहती है। वहीं असम में कुछ प्राइवेट मदरसों पर हेमंत सोरेन सरकार के द्वारा कार्रवाई की गयी है। 

टॅग्स :मुस्लिम लॉ बोर्डउत्तर प्रदेशअसम
Open in App

संबंधित खबरें

क्राइम अलर्टTwisha Sharma Death Case: 10000 रुपये इनाम की घोषणा, फरार वकील-पति समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज, पासपोर्ट रद्द करने की प्रक्रिया जारी, वीडियो

क्राइम अलर्टमां का कटा हाथ लेकर 3 दिन तक भटकता रहा ITBP जवान, कानपुर की घटना से सनसनी

क्राइम अलर्टTwisha Sharma death case: 60 दिन की गर्भवती और मारिजुआना का सेवन?, ट्विशा शर्मा की सास ने कहा-ग्लैमर की दुनिया में धकेली गई और माता-पिता ने छोड़ दी?

क्राइम अलर्टउत्तर प्रदेश में वैन और ट्रक की भीषण टक्कर में 10 लोगों की मौत, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा शोक व्यक्त किया

भारतअखिलेश यादव से मिले राजकुमार भाटी, सपा प्रमुख ने कहा- भाषा और आचरण में संतुलन-मर्यादा बनाए रखिए?, आपकी टिप्पणी से किसी वर्ग या व्यक्ति अपमानित ना हो?

भारत अधिक खबरें

भारतडिप्लोमेसी, डिनर और कोलोसियम की सैर; पीएम मोदी और जॉर्जिया मेलोनी की यादगार मुलाकात, देखें इटली दौरे की खास झलकियाँ

भारतPharmacy Strike Today: आज बंद रहेंगी दवा दुकानें! आज देशव्यापी हड़ताल पर रहेंगे दवा विक्रेता, मरीजों की बढ़ सकती है परेशानी

भारतWeather Today: आज बाहर निकलने से पहले देख लें वेदर अपडेट! दिल्ली में हीटवेव तो बेंगलुरु में बारिश की संभावना

भारतईमानदारी के अभाव में शातिर बन जाती है समझदारी

भारत"सरकार हर आयोजन को सड़क पर करा रही है": सड़कों पर नमाज को लेकर सीएम योगी पर अखिलेश का पलटवार