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कौन हैं विवेक लाकड़ा?, 200000 आधार मूल्य और 23 लाख रुपये में बिके 18 साल के गोलकीपर, श्राची बंगाल वॉरियर्स ने खरीदा

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: December 24, 2025 17:25 IST

HIL auction: मेरी बोली 23 लाख रुपये लगी और सबसे पहले मैंने अपने पापा को इसके बारे में बताया।

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ठळक मुद्देपिता हॉकी के धुर प्रशंसक थे और उन्होंने ही अपने बेटे का इस खेल से परिचय कराया। नीलामी के दौरान मैं बस यही सोच रहा था कि कोई भी टीम मुझे खरीद ले। परिवार में सभी लोग खुश हैं क्योंकि हम कुछ आर्थिक समस्याओं से गुजर रहे थे।

नई दिल्लीः युवा गोलकीपर विवेक लाकड़ा ने वित्तीय कठिनाइयों से जूझते हुए सीनियर खिलाड़ियों से खेल की किट उधार लेने से लेकर आगामी हॉकी इंडिया लीग (एचआईएल) में सबसे महंगे और सबसे अधिक मांग वाले जूनियर खिलाड़ी बनने तक लंबा सफर तय किया है। उन्हें श्राची बंगाल वॉरियर्स ने 23 लाख रुपये में अपनी टीम से जोड़ा है। कुछ ही दिन पहले 18 साल के हुए लाकड़ा ओडिशा के प्रसिद्ध हॉकी केंद्र सुंदरगढ़ के रहने वाले हैं, हालांकि वह स्वीकार करते हैं कि यह खेल उनकी पहली पसंद नहीं था। उनके पिता हॉकी के धुर प्रशंसक थे और उन्होंने ही अपने बेटे का इस खेल से परिचय कराया।

लाकड़ा ने कहा, ‘‘मुझे इतनी बड़ी रकम मिलने की उम्मीद नहीं थी क्योंकि मेरा आधार मूल्य दो लाख रुपए था। नीलामी के दौरान मैं बस यही सोच रहा था कि कोई भी टीम मुझे खरीद ले। जब बोली लगी तो मैं अपने दोस्तों के साथ इसे देख रहा था। मेरी बोली 23 लाख रुपये लगी और सबसे पहले मैंने अपने पापा को इसके बारे में बताया।

परिवार में सभी लोग खुश हैं क्योंकि हम कुछ आर्थिक समस्याओं से गुजर रहे थे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘शुरू में मुझे हॉकी उतनी पसंद नहीं थी। मेरी रुचि फुटबॉल और क्रिकेट में ज्यादा थी। लेकिन मेरे पापा को हॉकी का बहुत शौक था। उन्होंने मुझे एक कोच से मिलवाया जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। उन्होंने मुझे खेल की बुनियादी चीजों और इस खेल से जुड़े अवसरों के बारे में बताया।’’

परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उनके लिए यह सफर हालांकि आसान नहीं रहा और उन्हें सीनियर खिलाड़ियों से पुरानी गोलकीपिंग किट उधार लेनी पड़ती थी। उन्होंने 2016 में हॉकी खेलना शुरू किया था। लाकड़ा ने कहा, ‘‘पहले मैं जूनियर स्तर के शिविर में गया और फिर मैंने राउरकेला के स्पोर्ट्स हॉस्टल में दाखिला लिया, लेकिन वहां गोलकीपिंग किट जैसी सुविधाएं ज्यादा नहीं थीं।

इसलिए मैं कुछ महीनों तक स्ट्राइकर के रूप में खेला। स्टोर रूम में सीनियर खिलाड़ियों की कुछ किट पड़ी थीं, लेकिन वे काफी पुरानी हो चुकी थीं। मैंने किसी तरह सिलाई करके उन्हें ठीक किया और फिर गोलकीपिंग करनी शुरू कर दी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन उसके बाद लॉकडाउन लग गया। जब मैं लॉकडाउन के बाद वापस आया तो एक सीनियर खिलाड़ी ने मुझे अभ्यास के लिए अपनी पुरानी किट दे दी।

फिर मैं ओडिशा की टीम के साथ ‘एक्सपोजर टूर’ पर मलेशिया गया। खेलो इंडिया खेला, जहां हम उपविजेता रहे और अगले साल चैंपियन बने। मैं भारतीय जूनियर टीम के साथ जर्मनी में चार देशों के टूर्नामेंट में भी खेलने गया।’’ भारतीय टीम के पूर्व गोलकीपर पीआर श्रीजेश लाकड़ा के प्रेरणास्रोत हैं। श्रीजेश अभी भारतीय पुरुष जूनियर टीम के मुख्य कोच हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘श्रीजेश भाई मेरे प्रेरणास्रोत हैं। मैंने उन्हें 2018 में विश्व कप में भुवनेश्वर में खेलते हुए देखा था और तभी से वह मेरे लिए प्रेरणा बन गए। मैं एचआईएल में भारत के साथ-साथ विदेशों के अनुभवी गोलकीपरों जैसे पाठक भैया (कृष्ण बहादुर पाठक), सूरज भैया (करकेरा) से सीख लेना चाहता हूं।’’ पुरुषों की एचआईएल तीन जनवरी से चेन्नई में शुरू होगी।

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