लाइव न्यूज़ :

संघ शाखा की संख्या 88000, समालखा में आरएसएस 3 दिवसीय बैठक खत्म, सामाजिक समरसता को मजबूत करने का संकल्प

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: March 15, 2026 21:32 IST

Rashtriya Swayamsevak Sangh: संगठन के विस्तार को अंडमान, अरुणाचल प्रदेश, लेह और दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों में संघ की बढ़ती उपस्थिति के रूप में भी देखा जाना चाहिए।

Open in App
ठळक मुद्दे‘संघ शाखाओं’ की संख्या करीब 6,000 बढ़कर अब 88,000 से अधिक हो गई है।शाखाएं संचालित होती हैं, उनकी संख्या भी बढ़कर 55,000 से अधिक हो गई है।‘साप्ताहिक मिलन’ और ‘मंडलियों’ की संख्या में भी वृद्धि दर्ज की गई है।

समालखा: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में निर्णय लेने वाली शीर्ष संस्था अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (एबीपीएस) की तीन दिवसीय बैठक रविवार को यहां समाप्त हो गई। इस बैठक में संगठनात्मक कार्यों के विस्तार, राष्ट्रीय हित में “सकारात्मक शक्तियों” की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करने और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का संकल्प लिया गया। बैठक के अंतिम दिन संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि पिछले एक वर्ष में संगठनात्मक गतिविधियों में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। उन्होंने बताया कि ‘संघ शाखाओं’ की संख्या करीब 6,000 बढ़कर अब 88,000 से अधिक हो गई है।

होसबाले ने कहा कि जिन स्थानों पर शाखाएं संचालित होती हैं, उनकी संख्या भी बढ़कर 55,000 से अधिक हो गई है। इसके अलावा ‘साप्ताहिक मिलन’ और ‘मंडलियों’ की संख्या में भी वृद्धि दर्ज की गई है। होसबाले ने कहा कि संगठन के विस्तार को अंडमान, अरुणाचल प्रदेश, लेह और दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों में संघ की बढ़ती उपस्थिति के रूप में भी देखा जाना चाहिए।

जहां अब नियमित रूप से शाखाएं आयोजित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में नौ द्वीपों से 13,000 से अधिक लोगों ने एक ‘हिंदू सम्मेलन’ में भाग लिया, जिसमें संघ प्रमुख मोहन भागवत भी शामिल हुए। इसी तरह कम जनसंख्या घनत्व वाले राज्य अरुणाचल प्रदेश में आयोजित 21 ‘स्वधर्म सम्मेलनों’ में 37,000 से अधिक लोगों ने भाग लिया।

होसबाले ने कहा कि संघ ‘पंच परिवर्तन’ की अवधारणा के माध्यम से समाज की “गुणवत्ता” को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय या हिंदू होना केवल एक विचार नहीं, बल्कि “जीवन जीने की एक पद्धति” है। होसबाले ने कहा कि समाज को जाति और संप्रदाय से ऊपर उठकर महान व्यक्तित्वों के योगदान को स्वीकार करना चाहिए।

इसी दिशा में संघ के स्वयंसेवकों ने गुरु तेग बहादुर की 350वीं शहादत वर्षगांठ के अवसर पर देशभर में 2,000 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए, जिनमें सात लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए। उन्होंने बताया कि अगले वर्ष संत शिरोमणि रविदास की 650वीं जयंती के अवसर पर भी इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है।

टॅग्स :आरएसएसहरियाणामोहन भागवत
Open in App

संबंधित खबरें

क्राइम अलर्टVIDEO: हरियाणा में 4 बदमाशों ने एक लड़के को मारने के लिए चलाईं करीब 35 से 40 राउंड गोलियां, शरीर किया छलनी, देखें भयावह वीडियो

भारतHaryana Municipal Elections Result 2026: अंबाला में सैनी, पंचकूला में बंसल और सोनीपत में जैन बने मेयर, धारूहेड़ा, रेवाड़ी, सांपला में बीजेपी की जीत, कांग्रेस साफ?

भारतहरियाणा के पूर्व सीएम भूपिंदर सिंह हुड्डा का गढ़ सांपला नगर समिति के अध्यक्ष पर भाजपा का कब्जा?, धारूहेरा से भाजपा उम्मीदवार सत्यनारायण 9392 वोट से जीते?

भारतसोनीपत के नए मेयर राजीव जैन, कांग्रेस उम्मीदवार कमल दीवान को 23,247 वोटों से हराया, अंबाला में भाजपा की अक्षिता सैनी को 52,794 वोट

भारतHaryana Local Body Election Results 2026: पंचकुला में 20 में से 10 सीट पर बीजेपी की जीत, वार्ड 1 में भाजपा की परमजीत कौर 2,358 वोटों से जीतीं, देखिए सभी 10 वार्ड विजेता सूची

भारत अधिक खबरें

भारत'भारत अब नक्सल-मुक्त है': अमित शाह ने छत्तीसगढ़ में उग्रवाद के खात्मे की घोषणा की

भारतMadhya Pradesh: खेलते‑खेलते कार में बंद 4 साल की बच्ची की मौत, दो घंटे तक किसी ने नहीं देखा

भारतमुंबई और अहमदाबाद के बीच भारत की पहली बुलेट ट्रेन की पहली झलक सामने आई

भारतमहाराष्ट्र के पालघर में शादी के परिवार को ले जा रहे एक ट्रक की दूसरे ट्रक से टक्कर, 12 की मौत, 20 से ज़्यादा घायल

भारतरांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में महिला कैदी का किया गया यौन शोषण, हुई गर्भवती, कराया गया गर्भपात! नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र