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नीतीश कुमार ने किया महिला आरक्षण बिल का समर्थन, बोले- 'SC, ST और OBC को भी मिले बराबरी का प्रतिनिधित्व'

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: September 20, 2023 16:23 IST

नीतीश कुमार ने महिला आरक्षण विधेयक 2023 का संसद और बिहार विधानसभा में समर्थन किया है। इसके अलावा उन्होंने लंबे समय से जातिय जनगणना की मांग पर भी विचार करने की बात केंद्र सरकार के समक्ष रखी है। मुख्यमंत्री नीतीश ने कहा महिला आरक्षण का समर्थन वो पहले से करते रहे हैं।

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ठळक मुद्देसीएम नीतीश कुमार ने महिला आरक्षण विधेयक 2023 का समर्थन किया है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण बिल को 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' का नाम दिया।देश में आखिर बार जातीय जनगणना 1931 में हुई थी।

पटना: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिला आरक्षण विधेयक 2023 का संसद और बिहार विधानसभा में समर्थन किया है। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार से एक मांग और रखी कि महिला आरक्षण के लिए किये जा रहे प्रावधान में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अति पिछड़ा वर्ग की महिलाओं को पर्याप्त मात्रा में प्रतिधिनित्व मिलना चाहिए।

केंद्र ने महिला आरक्षण विधेयक मंगलवार को लोकसभा में पेश किया था, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' का नाम दिया।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस मुद्दे पर मीडिया से बात करते हुए कहा कि केंद्र को देश की जनगणना जल्द से जल्द कराकर इसे लागू करना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने लंबे समय से जातिय जनगणना की मांग पर भी विचार करने की बात केंद्र सरकार के समक्ष रखी है। मुख्यमंत्री नीतीश ने कहा महिला आरक्षण का समर्थन वो पहले से करते रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा, "जब मैं संसद सदस्य हुआ करता था तो उन दिनों के मेरे भाषण पर गौर करें तो मैंने अक्सर इस मुद्दे पर समर्थन करते हुए अपना विचार रखा है।"

बिहार सीएम ने महिला आरक्षण बिल पर यह सुनिश्चत करते हुए कहा है कि अगर महिलाओं को आरक्षण के जरिये पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलता है तो उनकी सरकार पंचायत, नगर निगम और पुलिस विभाग में उचित भागीदारी देगी। उन्होंने अपनी कही बात को और पुख्ता करते हुए कहा की महिलाओं की तरक्की के लिए बिहार अपनी ओर से जितनी भागीदारी देगा और कोई राज्य उतना बढ़ावा नहीं देगा।

सीएम नीतीश ने कहा कि बिल तभी लागू हो पाएगा जब जनगणना और परिसीमन पूरी हो जाएगी और विधेयक कानून की शक्ल लेने के बादअगले 15 सालों तक प्रभावी रहेगा।

मालूम हो कि बिहार में नीतीश सरकार ने भाजपा समेत तमाम विपक्षी दलों के भारी विरोध के बावजूद पटना हाईकोर्ट के हस्तक्षेप से जाति गणना को संपन्न कराया था। नीतीश कुमार ने बिहार में जाति गणना को लेकर साल 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की थी लेकिन केंद्र द्वारा मामले में दिलचस्पी न लिये जाने के बाद नीतीश कुमार ने भाजपा-जदयू गठबंधन को तोड़ते हुए राजद, कांग्रेस समेत तमाम अन्य दलों के साथ मिलकर महागठबंधन की सरकार बनी ली थी।

सीएम नीतीश कुमार ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि वो जानबूझ कर देश में जाति जनगणना नहीं करा रही है। देश में आखिर बार जातीय जनगणना 1931 में हुई थी।

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