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मानवता की आत्मा में रचे-बसे हैं भगवान बुद्ध : प्रधानमंत्री मोदी

By भाषा | Updated: October 20, 2021 20:51 IST

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कुशीनगर (उत्तर प्रदेश), 20 अक्टूबर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगवान बुद्ध को भारतीय संविधान की प्रेरणा बताते हुए बुधवार को कहा कि आज भी बुद्ध मानवता की आत्मा में रचने-बसने के साथ-साथ विभिन्न संस्कृतियों और देशों को आपस में जोड़ते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को कुशीनगर में महापरिनिर्वाण मंदिर में अभिधम्म दिवस पर आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय बौद्ध कॉन्क्लेव का शुभारंभ करते हुए कहा कि भारत ने भगवान बुद्ध की शिक्षा के पहलुओं को अपनी विकास की यात्रा का हिस्सा बनाया। बुद्ध का संदेश जलवायु परिवर्तन और आत्मनिर्भर भारत जैसे विषयों के लिहाज से आज भी प्रासंगिक है।

प्रधानमंत्री ने 'नमो बुद्धाय' से अपने भाषण की शुरूआत करते हुये कहा, ''भगवान बुद्ध की कृपा से आज कई अलौकिक संयोग हो रहे हैं। बुद्ध का संदेश पूरी मानवता के लिए है। कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के जरिए पूरी दुनिया से भगवान बुद्ध के करोड़ों अनुयायियों को यहां आने का अवसर मिलेगा, उनकी यात्रा आसान होगी।''

उन्होंने कहा, ''अलग-अलग देश, अलग-अलग परिवेश लेकिन मानवता की आत्मा में बसे बुद्ध सबको जोड़ रहे हैं। भारत ने भगवान बुद्ध की सीख को अपनी विकास यात्रा का हिस्सा बनाया है। हमने ज्ञान को, महान संदेशों को, महान आत्माओं के विचारों को बांधने में कभी भरोसा नहीं किया। हमने जो कुछ भी हमारा था उसे मानवता के लिये सम भाव से अर्पित किया है। इसलिये अहिंसा, दया, करूणा ऐसे मानवीय मूल्य आज भी उतनी ही सरलता से भारत के अन्तरमन में रचे बसे हैं। इसलिये बुद्ध आज भी भारत के संविधान की प्रेरणा हैं। बुद्ध का धम्म चक्र भारत के तिरंगे पर विराजमान होकर हमें गति दे रहा है। आज भी भारत की संसद में कोई जाता है तो इस मंत्र पर नजर जरूर पड़ती है, धर्म चक्र प्रवर्तनाय।''

मोदी ने कहा, ‘‘हम सभी जानते हैं कि श्रीलंका में बौद्ध धर्म का संदेश सबसे पहले भारत से सम्राट अशोक के पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा लेकर गये थे। माना जाता है कि आज ही के दिन अरहत महेंद्र ने वापस आकर अपने पिता को बताया था कि श्रीलंका ने बुद्ध का संदेश कितनी ऊर्जा से अंगीकार किया है। इस समाचार ने यह विश्वास बढ़ाया था कि बुद्ध का संदेश पूरे विश्व के लिये है, बुद्ध का धम्म मानवता के लिये है। इसलिये आज का यह दिन हम सभी देशों के सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों को नयी ऊर्जा देने का भी दिन है।’’

उन्होंने कहा, ''आज जब दुनिया पर्यावरण संरक्षण की बात करती है, जलवायु परिवर्तन की चिंता जाहिर करती है तो उसके साथ अनेक सवाल उठ खड़े होते हैं, लेकिन अगर हम बुद्ध के संदेश को अपना लेते हैं तो किस को करना है, की जगह क्या करना है, इसका मार्ग अपने आप दिखने लगता है।''

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हजारों साल पहले भगवान बुद्ध जब इस धरती पर थे तो आज जैसी व्यवस्था नहीं थी लेकिन फिर भी बुद्ध विश्व के करोड़ों-करोड़ लोगों तक पहुंचे और उनके अन्तरमन से जुड़ गये। मैंने अलग-अलग देशों के बौद्ध धर्म से जुड़े मंदिरों, विहारों में यह साक्षात अनुभव किया है, भगवान बुद्ध हर जगह हैं।’’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आम तौर पर यह भी धारणा रहती है कि बौद्ध धर्म का प्रभाव भारत में मुख्य रूप से पूरब ने ही जाना है लेकिन इतिहास को बारीकी से देखें तो हम पाते हैं कि बुद्ध ने जितना पूरब को प्रभावित किया है। उतना ही पश्चिम और दक्षिण पर भी उनका प्रभाव है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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