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हाईकोर्ट ने ठुकराई पूर्व सीईओ भाटी की एफआरआई रद्द करने की गुहार, 14 साल पुराने भ्रष्टाचार केस में नया अध्याय

By मुकेश मिश्रा | Updated: February 19, 2026 16:38 IST

यह याचिका 2012 के अपरिवर्तनीय संपत्ति भ्रष्टाचार मामले में दर्ज एफआईआर रद्द करने को लेकर दायर की गई थी। कोर्ट ने साफ कहा कि प्रथम दृष्टया अपराध बनता है और मिनी ट्रायल की गुंजाइश नहीं।

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इंदौर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने मध्य प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम के पूर्व मुख्य कार्यपालन अधिकारी भूपेंद्र सिंह भाटी की याचिका खारिज कर दी। यह याचिका 2012 के अपरिवर्तनीय संपत्ति भ्रष्टाचार मामले में दर्ज FIR रद्द करने को लेकर दायर की गई थी। कोर्ट ने साफ कहा कि प्रथम दृष्टया अपराध बनता है और मिनी ट्रायल की गुंजाइश नहीं।

घटनाक्रम का क्रमवार विवरणमामला 14 अक्टूबर 2012 से शुरू हुआ जब लोकायुक्त की विशेष पुलिस स्थापना ने भोपाल में भाटी के घर पर छापा मारा। दस्तावेज, आभूषण जब्त कर बैंक खाते फ्रीज किए गए और अपराध संख्या 211/2012 दर्ज हुई। यह भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)e व 13(2) के तहत था।

चार साल बाद 10 जून 2016 को अभियोजन मंजूरी का अनुरोध किया गया, लेकिन 24 नवंबर 2016 को सक्षम प्राधिकारी ने इसे नामंजूर कर दिया। फिर 18 जुलाई 2019 को नई मंजूरी जारी हुई। इसी बीच भाटी ने 2018 में WP 3025/2018 दायर की, देरी का हवाला देकर कार्यवाही रद्द करने की मांग की।

नई मंजूरी पर 15660/2019 दायर की गई, जो 30 नवंबर 2019 को वापस ले ली गई। ट्रायल कोर्ट को मुद्दे उठाने की छूट मिली। 28 फरवरी 2020 को ट्रायल कोर्ट ने मंजूरी चुनौती वाली अर्जी खारिज कर दी। भाटी ने MCRC 12760/2020 दायर किया, जिसे 12 फरवरी 2021 को हाईकोर्ट ने रद्द कर ट्रायल कोर्ट को पुनर्विचार के निर्देश दिए।

ट्रायल कोर्ट ने 14 सितंबर 2021 को नया आदेश दिया। भाटी ने MCRC 47557/2021 दायर किया, जिसे 1 अक्टूबर 2021 को स्वीकार कर दोबारा सुनवाई के आदेश हुए। फिर MCRC 48523/2022 दायर की गई, जो वापस ले ली गई। अंततः 11 मार्च 2025 को ट्रायल कोर्ट ने मंजूरी रद्द कर भाटी को डिस्चार्ज किया, लेकिन लोकायुक्त को नई जांच की छूट दी।

सुनवाई व फैसला17 फरवरी 2026 को न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला व अलोक अवस्थी की बेंच ने MCRC 39596/2025 पर फैसला सुनाया। भाटी पक्ष ने गणना त्रुटि (शिक्षा खर्च, पुत्र आय, वाहन) का दावा किया। लोकायुक्त ने नई जांच में 35% अपरिवर्तनीय संपत्ति बताई। 

सुप्रीम कोर्ट के भजन लाल, अमित कपूर फैसलों का हवाला देकर याचिका खारिज की गई। लोकायुक्त नई मंजूरी लेकर चार्जशीट दाखिल करेगा। कोर्ट ने हस्तक्षेप से इनकार कर जांच पूरी होने पर फैसला लेने पर जोर दिया।

टॅग्स :Madhya PradeshHigh CourtFIR
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