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सुखोई-30MKI लड़ाकू विमान को अपग्रेड करने काम जल्द शुरू करेगी एचएएल, रुद्रम मिसाइल से लैस किया जाएगा

By शिवेन्द्र कुमार राय | Updated: January 3, 2024 16:59 IST

सुखोई-30 एमकेआई, मूल रूप से रूस में विकसित एक शक्तिशाली लड़ाकू जेट है। यह भारतीय वायु सेना (आईएएफ) की अग्रिम पंक्ति का विमान है और इसे वायुसेना की रीढ़ भी कहा जाता है।

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ठळक मुद्देसुखोई-30MKI लड़ाकू विमान को अपग्रेड करने काम जल्द शुरू करेगी एचएएलइसके लिए रक्षा मंत्रालय से मंजूरी भी मिल गई है भारत में निर्मित प्रौद्योगिकियों और हथियार प्रणालियों को शामिल करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा

नई दिल्ली:  हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) भारतीय वायु सेना (IAF) के 84 सुखोई-30MKI लड़ाकू विमानों को अपग्रेड करने का काम जल्द ही शुरू करने जा रहा है। इन 84 विमानों को अपग्रेड करने का काम वायु सेना के विशेष अनुरोध पर किया जा रहा है और इसके लिए रक्षा मंत्रालय से मंजूरी भी मिल गई है और बजट भी पास हो गया है। भारतीय वायु सेना अपने सबसे खतरनाक फाइटर जेट्स की उम्र 20 से 25 साल और बढ़ाना चाहती है इसिलिए ये परियोजना शुरू की गई है।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना में भारत में निर्मित प्रौद्योगिकियों और हथियार प्रणालियों को शामिल करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही विमान के  एवियोनिक्स, सिस्टम और अन्य उपकरणों को बदल कर ओवरहाल किया जाएगा। आत्मनिर्भरता की दिशा में यह कदम प्रशंसनीय है। इस परियोजना में लगने वाले ज्यादातर उपकरण भारत में बने होंगे इसलिए देश के रक्षा उत्पादन क्षेत्र को भी बूस्ट मिलेगा।

भारतीय वायु सेना ने अपग्रेड किए जाने वाले  84 सुखोई-30MKI लड़ाकू विमानों को MBDA द्वारा विकसित ASRAAM क्लोज-कॉम्बैट मिसाइल से लैस करने की योजना बनाई है। विमान में भारत में बने सेंसर और एवियोनिक्स लगाए जाएंगे। सुखोई-30एमकेआई को एस्ट्रा हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल और हवा से सतह पर मार करने वाली रुद्रम मिसाइल से लैस किया जाएगा।  इससे विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम होगी साथ ही भारतीय रक्षा उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा।

वायु सेना प्रमुख (सीएएस) एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने घोषणा की है कि सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान अपग्रेडेशन के बाद भारतीय विमानों में बदल जाएंगे। इसका मतलब यह है कि इसमें लगे ज्यादातर रूसी उपररणों की जगह भारतीय उपकरण ले लेंगे। अपग्रेड होने के बाद सुखोई के  78% उपकरण स्वदेशी हो जाएंगे।

बता दें कि सुखोई-30 एमकेआई, मूल रूप से रूस में विकसित एक शक्तिशाली लड़ाकू जेट है। यह भारतीय वायु सेना (आईएएफ) की अग्रिम पंक्ति का विमान है और इसे वायुसेना की रीढ़ भी कहा जाता है। अब एईएसए फायर कंट्रोल रडार, एवियोनिक्स और अन्य प्रणालियों जैसे महत्वपूर्ण घटकों को स्वदेशी रूप से विकसित भारतीय तकनीक से बदलने से रूस पर निर्भरता काफी कम हो जाएगी। सुखोई-30 एमकेआई को अपग्रेड करने का काम एचएएल को सौंपा गया है जो विमान निर्माण और अपग्रेडेशन में अपनी विशेषज्ञता के लिए जाना जाता है। 

टॅग्स :SukhoiरूसRussiaHindustan Aeronautics Ltd.
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