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दिल्ली हिंसाः आसिफ इकबाल तनहा, देवांगना कालिता और नताशा नरवाल जमानत पर तिहाड़ जेल से रिहा, जानें क्या है मामला

By भाषा | Updated: June 17, 2021 20:56 IST

उच्च नयायालय के फैसले के दो दिन बाद अदालत ने यह आदेश दिया। इन्हें पिछले साल फरवरी में हिंसा से जुड़े एक मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून के तहत मई 2020 में गिरफ्तार किया गया था।

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ठळक मुद्देदिल्ली उच्च न्यायालय ने इन छात्र कार्यकर्ताओं को मंगलवार को जमानत दी थी।हिंसा में कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई थी तथा करीब 200 लोग घायल हो गए थे।अदालत ने तिहाड़ जेल के अधीक्षक को उनकी तत्काल रिहाई के लिए वारंट भेजा।

नई दिल्लीः छात्र कार्यकर्ता नताशा नरवाल, देवांगना कालिता और आसिफ इकबाल तनहा बृहस्पतिवार को तिहाड़ जेल से रिहा कर दिए गए।

इससे कुछ घंटे पहले एक अदालत ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा ‘‘साजिश’’ मामले में तुरंत उनकी रिहाई का आदेश दिया था। दो दिन पहले, दिल्ली उच्च न्यायालय ने गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (यूएपीए) के तहत पिछले साल मई में गिरफ्तार नरवाल, कालिता और तनहा को जमानत दे दी थी।

महानिदेशक (दिल्ली जेल) संदीप गोयल ने पुष्टि की है तीनों को रिहा कर दिया गया है। जेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कालिता और नरवाल को शाम सात बजे और तनहा को साढ़े सात बजे रिहा किया गया। तीनों छात्र कार्यकर्ताओं के पते और मुचलके के सत्यापन में देरी के कारण जेल से उनकी रिहाई में देरी हो रही थी।

दिल्ली की एक अदालत ने तीनों की तुरंत रिहाई का आदेश देते हुए कहा कि पुलिस द्वारा सत्यापन प्रक्रिया में देरी आरोपियों को जेल में रखने की स्वीकार्य वजह नहीं हो सकती। उच्च न्यायालय से जमानत लेने के बाद कार्यकर्ताओं ने जेल से तुरंत रिहाई के लिए निचली अदालत का रुख किया था।

दिल्ली की एक अदालत ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली हिंसा से जुड़े एक मामले में जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र आसिफ इकबाल तनहा और जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की छात्रा देवांगना कालिता और नताशा नरवाल को तत्काल जेल से रिहा करने का बृहस्पतिवार को आदेश दिया था। 

दिल्ली उच्च न्यायालय ने इन छात्र कार्यकर्ताओं को मंगलवार को जमानत दी थी। उच्च नयायालय के इस फैसले के दो दिन बाद अदालत ने यह आदेश दिया। इन्हें पिछले साल फरवरी में हिंसा से जुड़े एक मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून के तहत मई 2020 में गिरफ्तार किया गया था। इन्हें उनके पते और जमानतदारों से जुड़ी जानकारी पूर्ण ना होने का हवाला देते हुए समय पर जेल से रिहा नहीं किया गया था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रविंदर बेदी ने पते और जमानतदारों के सत्यापन में देरी को लेकर पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा , ‘‘ मैं कहूंगी कि यह अपने आप में एक उचित कारण नहीं हो सकता है कि जब तक इस तरह की रिपोर्ट दाखिल नहीं हो जाती, तब तक आरोपी को जेल में रखा जाए।’’

टॅग्स :दिल्लीदिल्ली हाईकोर्टकोर्टजामिया मिल्लिया इस्लामियाजवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू)
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