लखनऊ: उत्तर प्रदेश में रैगिंग को रोकने के लिए प्रशासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बावजूद, राज्य के प्रमुख शहरों, विशेष रूप से बनारस (वाराणसी) और लखनऊ के शिक्षण संस्थानों में रैगिंग की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं. वाराणसी प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र है और लखनऊ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का. वाराणसी और लखनऊ के शिक्षण प्रमुख शिक्षण संस्थान में रैगिंग का यह आलम तब है जबकि यूपी सहित देश के 90 प्रतिशत उच्च शिक्षण संस्थान अपने यहां रैगिंग रोकने में सफल रहे हैं. इसके बावजूद लखनऊ के कुछ विश्वविद्यालयों और वाराणसी के बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) आदि से आई रैगिंग की शिकायतें सवाल खड़ा कर रही हैं. ऐसी शिकायतें यूपी के शिक्षण संस्थाओं की छवि खराब कर रही हैं.
यूपी में रैगिंग के मामले थम नहीं
यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन की एंटी रैगिंग कमिटी की रिपोर्ट के मुताबिक लखनऊ यूनिवर्सिटी और बीएचयू में लगातार दूसरे साल भी रैगिंग की कई शिकायतें दर्ज कराई गई हैं. वर्ष 2024 और वर्ष 2025 के आंकड़ों के अनुसार, लखनऊ विश्वविद्यालय में 15 और अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी में 34 रैगिंग की शिकायतें दर्ज की गईं. इसी प्रकार बीएचयू परिसर से भी रैगिंग के मामले सामने आए.
बीएचयू में हॉस्टल के छात्रों द्वारा नए छात्रों को प्रताड़ित करने (आगे की बेंच पर बैठने से रोकने) की घटनाओं के बाद सख्त नोटिस जारी किए गए हैं। यूपी के उच्च शिक्षण संस्थानों में रैगिंग की लगभग एक-तिहाई शिकायतें मेडिकल कॉलेज से मिली. यहां नए छात्रों को ड्रेस कोर्ड फालों करने और सिर झुकाकर चलने को मजबूर किया गया. उच्च शिक्षा विभाग के अफसरों के अनुसार वर्ष 2012 से 2025 के बीच यूपी में रैगिंग की 1,592 शिकायतें दर्ज हुई हैं.
यह तब है जबकि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के दिशा-निर्देशों के तहत लखनऊ विश्वविद्यालय सहित प्रदेश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में बीते साल अगस्त में 'रैगिंग विरोधी सप्ताह' मना कर रैगिंग करने के मामले में सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई किए जाने की चेतावनी छात्रों को दी गई. इसके बाद भी लखनऊ यूनिवर्सिटी सहित शहर के कई शिक्षण संस्थानों और बीएचयू में रैगिंग किए जाने की शिकायतें दर्ज कराई गई. फिलहाल यूपी में तमाम तरह की सतर्कता बरते जाने के बाद भी रैगिंग के मामले थम नहीं रहे. अधिकारियों की लिए यह चिंता की बात है.
शासन को रिपोर्ट भेजे
उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, हाल ही आई एंटी रैगिंग मॉनिटरिंग एजेंसी सेंटर फार यूथ की रिपोर्ट के अनुसार, 1 अप्रैल 2022 से 31 अक्टूबर 2025 के बीच रैगिंग विरोधी नियमों के अनुपालन में केरल राज्य शीर्ष पर रहा. जबकि महाराष्ट्र और तमिलनाडु के बाद उत्तर प्रदेश चौथे स्थान पर रहा. एंटी रैगिंग मानिटरिंग एजेंसी सेंटर फार यूथ की रिपोर्ट के मुताबिक रैगिंग से संबन्धित अधिकतर शिकायते पारंपरिक रैगिंग की नहीं बल्कि सहपाठियों के विवाद तथा मानसिक उत्पीड़न से जुड़ी थी.
फिर भी छात्र उत्पीड़न अस्वीकार्य है, इसलिए ऐसे मामलों में संवेदनशील कार्रवाई की जा रही है. जिसके चलते ही उच्च शिक्षा विभाग ने सभी निजी और सरकारी विश्वविद्यालयों से कहा है कि अपने परिसरों में रैगिंग रोकने के सभी उपाय लागू करें. हर घटना को गंभीरता से लिया जाए और रैगिंग को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं. इसके साथ ही यूजीसी की सिफ़ारिशों को लागू करने के लिए कदम उठाए गए कदमों की रिपोर्ट शासन को भेजी जाए.