लाइव न्यूज़ :

हमारे युवा ऐसे नहीं रहे, यूथ पर विदेशी कल्चर हावी?, पश्चिमी विचारों से प्रभावित होकर युवा ‘लिव-इन-रिलेशनशिप’ में रह रहे, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 26, 2026 18:32 IST

व्यक्ति ने आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता शादी के बहाने उसकी बेटी को भगाकर ले गया और बाद में उसे बेंगलुरु ले जाकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए।

Open in App
ठळक मुद्दे घटना के समय लड़की बालिग थी और वह अपनी इच्छा से आरोपी युवक के साथ घर छोड़कर गई थी।चलन बढ़कर गया है और जब ऐसे संबंध विफल होते हैं तो प्राथमिकी दर्ज कराई जाती है।रिकॉर्ड पर गौर करने के बाद अदालत ने पाया कि पीड़िता बालिग थी।

प्रयागराजः इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक निर्णय में कहा है कि पश्चिमी विचारों से प्रभावित होकर युवा ‘लिव-इन-रिलेशनशिप’ में रह रहे हैं और इस तरह के संबंध विफल होने पर दुष्कर्म के आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज करा दी जाती है। अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए एक युवक को सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा रद्द कर दी। युवक पर कथित तौर पर एक नाबालिग लड़की का अपहरण करके उसका यौन शोषण करने का आरोप था। अदालत ने पाया कि घटना के समय लड़की बालिग थी और वह अपनी इच्छा से आरोपी युवक के साथ घर छोड़कर गई थी।

चंद्रेश नामक युवक की अपील स्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति प्रशांत मिश्र की खंडपीठ ने कहा कि पश्चिमी विचारों से प्रभावित होकर युवाओं के बीच बिना विवाह के ‘लिव-इन-रिलेशनशिप’ में रहने का चलन बढ़कर गया है और जब ऐसे संबंध विफल होते हैं तो प्राथमिकी दर्ज कराई जाती है।

पीठ ने यह भी कहा कि चूंकि कानून महिलाओं के पक्ष में हैं, पुरुष इन कानूनों के आधार पर दोषी ठहराए जाते हैं, जबकि ये कानून तब बनाए गए थे जब ‘लिव-इन-रिलेशनशिप’ की अवधारणा अस्तित्व में कहीं नहीं थी। मुकदमे के अनुसार, एक व्यक्ति ने आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता शादी के बहाने उसकी बेटी को भगाकर ले गया और बाद में उसे बेंगलुरु ले जाकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए।

निचली अदालत ने अपीलकर्ता को आईपीसी की धारा 363 (अपहरण), 366 (विवाह के लिए अपहरण) और 323 (जानबूझकर उत्पीड़न करना), पॉक्सो और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम की संबंधित धाराओं में दोषी ठहराया था जिसके खिलाफ उसने उच्च न्यायालय में अपील की थी। रिकॉर्ड पर गौर करने के बाद अदालत ने पाया कि पीड़िता बालिग थी।

और निचली अदालत ने ‘ऑसिफिकेशन टेस्ट’ रिपोर्ट पर उचित ढंग से विचार नहीं किया था जिसमें पीड़िता की आयु करीब 20 वर्ष सिद्ध हुई थी। अदालत ने पाया कि लड़की युवक के साथ बेंगलुरु में घनी आबादी वाले क्षेत्र में छह महीने तक रही और सहमति से शारीरिक संबंध बनाए।

जब युवक ने उसे छह अगस्त, 2021 को शिकारपुर चौराहे पर वापस छोड़ दिया तब उसने अपने परिवार से संपर्क किया। अदालत ने कहा कि आईपीसी की धारा 363 और 366 के तहत दोषीसिद्धि पूरी तरह अवांछित थी क्योंकि पीड़िता बालिग थी और वह अपनी इच्छा से भागी थी।

टॅग्स :Allahabad High Courtकोर्टबेंगलुरुBengaluru
Open in App

संबंधित खबरें

कारोबारमुंबई और बेंगलुरु के बीच सप्ताह में 2 दिन चलने वाली नई मेल एक्सप्रेस ट्रेन?, 17 एलएचबी कोच होंगे, जानिए टाइमटेबल और किराया

क्राइम अलर्टनितिन गडकरी मामलाः 100 करोड़ रुपये की रंगदारी नहीं देने पर जान से मारने की धमकी, ₹35000 का जुर्माना, पुजारी और पाशा को 5 साल की सजा

क्राइम अलर्ट10 साल से ट्रेनों में आतंक मचाने वाला लुटेरा गिरफ्तार, पुलिस की फिटनेस पर सवाल

भारतउत्तर प्रदेश में भारी बारिश-तूफान से 100 लोगों की मौत, प्रयागराज में 21, भदोही में 18, मिर्जापुर में 15, फतेहपुर में 10 की मौत, पेड़-बिजली के खंभे उखड़े और कई घर क्षतिग्रस्त

क्राइम अलर्टSex With Student: 16 साल के छात्र से संबंध बनाने वाली शिक्षिका को जेल, कोर्ट ने सुनाई सजा

भारत अधिक खबरें

भारतमुंबई और अहमदाबाद के बीच भारत की पहली बुलेट ट्रेन की पहली झलक सामने आई

भारतमहाराष्ट्र के पालघर में शादी के परिवार को ले जा रहे एक ट्रक की दूसरे ट्रक से टक्कर, 12 की मौत, 20 से ज़्यादा घायल

भारतरांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में महिला कैदी का किया गया यौन शोषण, हुई गर्भवती, कराया गया गर्भपात! नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

भारततख्त श्री पटना साहिब गुरुद्वारे में माथा टेकने पटना पहुंचे पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केन्द्र सरकार और भाजपा पर बोला तीखा हमला

भारतपश्चिम बंगाल: सुवेंदु सरकार ने दूसरी कैबिनेट बैठक में राज्य की धर्म-आधारित योजनाएँ समाप्त कीं