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विश्व बैंक ने 2022-23 में भारत की विकास दर के अनुमान को घटाकर 6.5% किया, बताए ये बड़े कारण

By विनीत कुमार | Updated: October 6, 2022 20:01 IST

विश्व बैंक ने अनुमान जताया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2022-23 में 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी, जो जून, 2022 के अनुमान से एक प्रतिशत कम है।

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ठळक मुद्देबिगड़ते अंतरराष्ट्रीय हालात का हवाला देते हुए विश्व बैंक ने भारत के वृद्धि दर के अनुमान को घटा दिया है।विश्व बैंक ने हालांकि साथ ही कहा कि भारत में दुनिया के बाकी हिस्सों की तुलना में अर्थव्यवस्था में रिकवरी काफी तेज है।बीते वित्त वर्ष के दौरान भारत की वृद्धि दर 8.7 प्रतिशत रही थी।

वाशिंगटन: विश्व बैंक ने वित्तीय वर्ष-2022-23 के लिए भारत की विकास दर के अनुमान को घटा दिया है। विश्व बैंक ने बिगड़ते अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के माहौल का हवाला देते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था के के लिए 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर का अनुमान लगाया है। यह पिछले साल जून में वर्ल्ड बैंक की ओर से किए गए अनुमान से एक प्रतिशत कम है।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक की वार्षिक बैठक से पहले जारी अपने नवीनतम दक्षिण एशिया आर्थिक फोकस में बैंक ने हालांकि कहा कि भारत दुनिया के बाकी हिस्सों की तुलना में मजबूती से उबर रहा है। पिछले वर्ष भारतीय अर्थव्यवस्था में 8.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।

न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में दक्षिण एशिया के लिए विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री हैंस टिमर ने कहा, 'भारतीय अर्थव्यवस्था ने दक्षिण एशिया के अन्य देशों की तुलना में अपेक्षाकृत मजबूत विकास और अच्छा प्रदर्शन किया है।'

उन्होंने कहा, 'भारत के लिए लाभ ये है और उन्होंने अपेक्षाकृत अच्छा प्रदर्शन इस मामले में किया है कि उनके ऊपर एक बड़ा ऋण नहीं है, इसलिए तरफ से कोई समस्या नहीं आ रही है। भारत के पास विवेकपूर्ण मौद्रिक नीति है।'

भारतीय अर्थव्यवस्था ने विशेष रूप से सेवा क्षेत्र और विशेष रूप से सेवा निर्यात में अच्छा प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा, 'लेकिन हमने अभी शुरू हुए वित्तीय वर्ष के लिए पूर्वानुमान को डाउनग्रेड कर दिया है और इसका मुख्य कारण है कि भारत और सभी देशों के लिए अंतर्राष्ट्रीय वातावरण बिगड़ रहा है। हम इस वर्ष के मध्य में दुनिया में एक प्रकार से अर्थव्यवस्था के धीमे होने के पहले संकेत देख रहे हैं।'

उन्होंने कहा कि कैलेंडर वर्ष की दूसरी छमाही कई देशों में कमजोरी दिख रही है और भारत में भी अपेक्षाकृत कमजोर रहेगी। 

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