2026-27 में 72,901.31 करोड़ रुपये का नया कर्ज?, कर्ज दलदल में सम्राट सरकार?, बिहार पर 4 लाख करोड़ रुपए कर्ज?

By एस पी सिन्हा | Updated: May 14, 2026 15:05 IST2026-05-14T15:04:22+5:302026-05-14T15:05:19+5:30

बीते डेढ़ दशक में बिहार की कुल देनदारी तेजी से बढ़ी है. वर्ष 2010 में राज्य पर कुल कर्ज 59,513 करोड़ रुपये था, लेकिन यह आंकड़ा 2015 में बढ़कर 99,398 करोड़ रुपये हुआ.

Bihar government take new loan Rs 72,901-31 crore in 2026-27 Samrat government really in a huge debt trap | 2026-27 में 72,901.31 करोड़ रुपये का नया कर्ज?, कर्ज दलदल में सम्राट सरकार?, बिहार पर 4 लाख करोड़ रुपए कर्ज?

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Highlightsसूत्रों की मानें तो बिहार पर कुल कर्ज अब करीब 4 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है.सरकार शुरू में करीब एक लाख करोड़ रुपये तक ऋण लेने पर विचार कर रही थी,राजकोषीय घाटा बढ़ने की आशंका को देखते हुए राशि को सीमित रखा गया.

पटनाः बिहार क्या वाकई भारी कर्ज के दलदल में डूब रहा है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि बिहार सरकार चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य सरकार अब 72,901.31 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेने जा रही है. जबकि मूल बजट में 61,939.48 करोड़ रुपये ऋण लेने का प्रावधान किया गया था. पहली तिमाही में ही ऋण राशि में यह बड़ा संशोधन सरकार की आर्थिक स्थिति और बढ़ते खर्च का संकेत माना जा रहा है. दरअसल, बिहार सरकार पर वित्तीय दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है. सूत्रों की मानें तो बिहार पर कुल कर्ज अब करीब 4 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है.

इस पर सरकार को हर साल लगभग 40 हजार करोड़ रुपए ब्याज के रूप में चुकाने पड़ रहे हैं. सरकार को विकास योजनाओं और चुनावी घोषणाओं के क्रियान्वयन के लिए बड़ी मात्रा में धन की जरूरत है. ऐसे में सीमित राजस्व स्रोतों के कारण सरकार को कर्ज का सहारा लेना पड़ रहा है. वर्तमान में बिहार की कुल राजस्व प्राप्ति का नौ प्रतिशत से अधिक हिस्सा केवल ब्याज चुकाने में खर्च हो रहा है.

इससे विकास योजनाओं और बुनियादी ढांचे पर खर्च करने की क्षमता प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है. ऐसे में सरकार को विकास योजनाओं, सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों और चुनावी घोषणाओं को पूरा करने के लिए भारी वित्तीय संसाधनों की जरूरत पड़ रही है. सूत्रों के मुताबिक, सरकार शुरू में करीब एक लाख करोड़ रुपये तक ऋण लेने पर विचार कर रही थी,

लेकिन राजकोषीय घाटा बढ़ने की आशंका को देखते हुए राशि को सीमित रखा गया. बीते डेढ़ दशक में बिहार की कुल देनदारी तेजी से बढ़ी है. वर्ष 2010 में राज्य पर कुल कर्ज 59,513 करोड़ रुपये था, लेकिन यह आंकड़ा 2015 में बढ़कर 99,398 करोड़ रुपये हुआ. इसके बाद कर्ज में तेजी से वृद्धि जारी रही और 2020 तक यह 1.93 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया.

अब 2025 में बिहार पर कुल देनदारी 3.70 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है. वहीं 2026 के बजट अनुमान के अनुसार यह आंकड़ा 4.03 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. आर्थिक जानकारों का मानना है कि यदि कर्ज लेने की रफ्तार इसी तरह जारी रही तो आने वाले वर्षों में राज्य की वित्तीय स्थिति पर गंभीर दबाव पड़ सकता है.

खासकर तब, जब सरकार की आय का बड़ा हिस्सा ब्याज भुगतान में खर्च होने लगे. हाल यह है कि राजकोषीय घाटे की स्थिति भी चिंता बढ़ा रही है. वित्तीय वर्ष 2024-25 में बिहार का राजकोषीय घाटा 4.5 प्रतिशत तक पहुंच गया था. वहीं 2025-26 में इसके 10 प्रतिशत की सीमा के करीब पहुंचने की आशंका जताई जा रही है.

आंकड़ों पर नजर डालें तो कई वर्षों में बिहार के बकाये ऋण की वृद्धि दर जीएसडीपी वृद्धि दर से अधिक रही है. खासकर कोरोना काल 2020-21 में ऋण वृद्धि दर 17.49 प्रतिशत रही, जबकि जीएसडीपी वृद्धि दर केवल 4.14 प्रतिशत दर्ज की गई थी. इसे राज्य की वित्तीय सेहत के लिए गंभीर संकेत माना जा रहा है.

केंद्र सरकार के वित्तीय नियमों के अनुसार राज्यों को अपनी जीएसडीपी के तीन प्रतिशत तक ही ऋण लेने की अनुमति है. राज्य के वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से बिहार को जीएसडीपी के मुकाबले पांच प्रतिशत तक कर्ज लेने की अनुमति देने का आग्रह किया था.

हालांकि केंद्र सरकार ने 16वें वित्त आयोग के लक्ष्यों का हवाला देते हुए इस मांग को स्वीकार नहीं किया. आयोग का उद्देश्य 2030-31 तक केंद्र और राज्यों के संयुक्त ऋण को नियंत्रित करना है. हालांकि सरकार शहरों और उद्योगों के विस्तार के जरिए नए राजस्व स्रोत विकसित करने की दिशा में काम कर रही है.

Web Title: Bihar government take new loan Rs 72,901-31 crore in 2026-27 Samrat government really in a huge debt trap

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