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एक सूर्य, एक विश्व- एक ग्रिड परियोजना पर इस साल होगी बहुपक्षीय घोषणा: एमएनआरई सचिव

By भाषा | Updated: May 26, 2021 17:29 IST

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नयी दिल्ली, 26 मई नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा सचिव इंदु शेखर चतुर्वेदी ने कहा है कि एक सूर्य-एक विश्व-एक ग्रिड परियोजना के संदर्भ में बहुपक्षीय घोषणा इस साल के अंत तक की जाएगी।

एमएनआरई की मसौदा योजना के अनुसार, महत्वाकांक्षी एक सूर्य-एक दुनिया-एक ग्रिड परियोजना 140 देशों को एक साझा ग्रिड के माध्यम से जोड़ेगी जिसका उपयोग सौर ऊर्जा को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए किया जाएगा।

इस परियोजना का उद्देश्य विभिन्न समय क्षेत्रों में सौर ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति के लिए सीमा पार सौर ऊर्जा ग्रिड स्थापित करना है।

अंतरराष्ट्रीय सौर संघ (आईएसए) ने एक बयान में कहा कि आईएसए, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) और विश्व बैंक ने 24-25 मई को एक सूर्य-एक दुनिया-एक ग्रिड (ओएसओडउब्ल्यूओजी) परियोजना पर ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया।

बयान में चतुर्वेदी के हवाले से कहा गया है, ‘‘ओएसओडब्ल्यूओजी के संदर्भ में कुछ बहुपक्षीय घोषणाएं इस साल के अंत तक किये जाने की संभावना है। मैं इस शुरूआती कार्यशाला और अध्ययन की सफलता की कामना करता हूं।’’

एक सूर्य-एक विश्व-एक ग्रिड परियोजना का क्रियान्वयन तीन चरणों में होगा। पहला चरण, व्यवहार्याता पूर्व विश्लेषण से जुड़ा होगा। दूसरे चरण में प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जो पायलट परियोजनाओं को चुनने के लिए राजनीतिक प्रक्रिया, इंटरलिंक्स को चालू करने के संदर्भ से समयसीमा से जुड़े हैं।

तीसरा चरण संस्थागत रूपरेखा से जुड़ा होगा। इसमें नीति मसौदा और नियामकीय दस्तावेज शामिल हैं।

कार्यशाला में चतुर्वेदी ने अपने संबोधन में कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि आईएसए इस परियोजना में शामिल है क्योंकि यह न केवल विशेषज्ञता लाता है, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य भी लाता है जिसके लिए समझौते की आवश्यकता होती है।’’

उन्होंने कहा कि वास्तव में अन्य देशों के राजनीतिक नेतृत्व ने भी विभिन्न देशों में नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़े सौर ग्रिड के दृष्टिकोण में भरोसा जताया है।

कार्यशाला में सभी क्रियान्वयन भागीदारों ने एक सूर्य- एक दुनिया- एक ग्रिड परियोजना के लिये रूपरेखा प्रस्तुत किये।

बयान के अनुसार कार्यशाला में विशेषज्ञों के बीच तकनीकी और आर्थिक मूल्यांकन, विभिन्न देशों में नियमन, कार्बन उत्सर्जन में कमी के लिए देशों को सफलतापूर्वक मार्गदर्शन करने को लेकर 2050 की रूपरेखा समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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