ऐसे तो उद्योगों का भला नहीं होने वाला है...!
By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: April 17, 2026 07:30 IST2026-04-17T07:29:15+5:302026-04-17T07:30:02+5:30
इस बात का खास खयाल रखा जाता रहा है कि उद्योगों को ऐसी सुविधाएं मिलें कि दूसरे राज्य के उद्योग भी महाराष्ट्र में अपने प्लांट स्थापित करें.

ऐसे तो उद्योगों का भला नहीं होने वाला है...!
उद्योगों के मामले में महाराष्ट्र देश का सबसे अग्रणी राज्य माना जाता है और निश्चित रूप से इसके जो प्रमुख कारण हैं, उसमें एक सहज और सुलभ बिजली भी है. मगर हाल के वर्षों में जिस तरह से बिजली की दरों में इजाफा किया जा रहा है और सरकार की लोक कल्याणकारी योजनाओं के लिए उद्योगों को मिलने वाली बिजली की दर के माध्यम से धन जुटाने की कोशिश की जा रही है, वह चिंताजनक है.
अभी-अभी यह खुलासा हुआ है कि सरकार ने बिजली की बिक्री पर लगने वाले टैक्स में 9.9 पैसे प्रति यूनिट का इजाफा कर दिया है. कहा जा रहा है कि इससे सरकार को जो धन मिलेगा, उसका उपयोग ‘मागेल त्याला कृषि पंप’ योजना में किया जाएगा. यानी इस योजना पर होने वाले खर्च का बड़ा हिस्सा उद्योगों और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं पर डाल दिया गया है. सौर ऊर्जा का उपयोग करने वाले उद्योग पहले से ही ग्रिड सपोर्ट चार्ज से परेशान हैं और अब इस टैक्स ने नया बोझ डाल दिया है.
आश्चर्यजनक तो यह है कि यह टैक्स दिसंबर 2025 से लागू हो गया है लेकिन उद्योगों को अब जानकारी दी जा रही है. निश्चित रूप से ‘मागेल त्याला कृषि पंप’ योजना की तारीफ की जानी चाहिए कि इससे किसानों को सहूलियत होगी लेकिन उद्योगों पर भार क्यों? उद्योग एवं वाणिज्य जगत के लिए वैसे भी समय ठीक नहीं चल रहा है. ऐसे में इस तरह के भार से उनकी कमर ही टूटनी है. एक और पहलू यह है कि उद्योगों पर भार बढ़ेगा तो वे उत्पादन की कीमत बढ़ाएंगे और इसका खामियाजा आम आदमी को ही भुगतना पड़ेगा. जब उत्पाद की कीमत बढ़ेगी तो उद्योगों के लिए दूसरे राज्यों से प्रतिस्पर्धा कर पाना क्या मुश्किल नहीं होगा?
देश के कुल औद्योगिक उत्पादन में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी करीब-करीब 20 प्रतिशत मानी जाती है. ऑटोमोबाइल उत्पादन में तो महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 35 प्रतिशत के करीब है. उद्योगों के मामले में आज महाराष्ट्र नंबर वन है तो इसका बड़ा कारण यह भी है कि राज्य सरकार ने हमेशा ही उद्योगों के प्रति हितैषी रवैया रखा है. इस बात का खास खयाल रखा जाता रहा है कि उद्योगों को ऐसी सुविधाएं मिलें कि दूसरे राज्य के उद्योग भी महाराष्ट्र में अपने प्लांट स्थापित करें.
सहूलियत देने की जगह पर यदि उन्हें विभिन्न तरह के टैक्स में घसीटा जाएगा तो नए उद्योग महाराष्ट्र कैसे आएंगे? सरकार को सोलर एनर्जी के क्षेत्र में लगाए जा रहे विभिन्न तरह के चार्ज को भी समाप्त करना चाहिए ताकि उद्योग फलें-फूलें. ध्यान रखिए कि उद्योग लोगों को काम देते हैं. किसी भी राज्य को उन्नत बनाने या बनाए रखने में उद्योगों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है।