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इंडिगो पर 22.2 करोड़ रुपये का जुर्माना, CEO को चेतावनी, सीनियर VP को पद से हटाने के निर्देश, डीजीसीए एक्शन

By सतीश कुमार सिंह | Updated: January 17, 2026 22:15 IST

डीजीसीए ने इंडिगो को उसके संचालन नियंत्रण केंद्र के वरिष्ठ उपाध्यक्ष को वर्तमान परिचालन जिम्मेदारियों से हटाने का निर्देश दिया है।

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ठळक मुद्देवित्त वर्ष 2018-19 से वित्त वर्ष 2022-23 की आकलन अवधि से संबंधित है।संजय के. ब्रम्हाणे की अध्यक्षता में इस समिति का गठन पांच दिसंबर को किया गया था।इंडिगो की सैकड़ों उड़ानें कई दिनों तक रद्द हुई थीं।

नई दिल्लीः विमानन नियामक डीजीसीए ने पिछले महीने उड़ानों में भारी व्यवधान के लिए इंडिगो पर 22.2 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। डीजीसीए ने बड़ा एक्शन लिया है। सीईओ को चेतावनी और वरिष्ठ वीपी को पद से हटाने का ऑर्डर दिया है। डीजीसीए ने इंडिगो के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीटर एल्बर्स को उड़ान परिचालन एवं संकट प्रबंधन की निगरानी पर्याप्त रूप से न करने को लेकर चेतावनी दी। हाल ही में देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो पर 458 करोड़ रुपये से अधिक का जीएसटी जुर्माना लगाया था। केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 74 के तहत वित्त वर्ष 2018-19 से वित्त वर्ष 2022-23 की आकलन अवधि से संबंधित है।

विमानन क्षेत्र के नियामक डीजीसीए ने पिछले महीने हुई व्यापक उड़ान व्यवधानों के लिए शनिवार को इंडिगो पर 22.20 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया और कंपनी के प्रमुख पीटर एल्बर्स के साथ-साथ दो अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को कड़ी चेतावनी जारी की।

इसके अलावा, विमानन नियामक ने एयरलाइन को अपने निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने और दीर्घकालिक प्रणालीगत सुधार के लिए 50 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। इंडिगो ने दिसंबर की शुरुआत में सैकड़ों उड़ानें रद्द कर दीं क्योंकि एयरलाइन पायलटों के वास्ते नए उड़ान ड्यूटी मानदंडों को लागू करने के लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं थी।

उड़ानें रद्द किए जाने से देश भर में हजारों यात्री फंस गए। इंडिगो के परिचालन में बड़े पैमाने पर व्यवधान के बाद, नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने संयुक्त महानिदेशक संजय के. ब्राह्मणे की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति का गठन किया, ताकि ऐसे व्यवधानों के कारणों की व्यापक समीक्षा और मूल्यांकन किया जा सके।

इस समिति ने पिछले साल 27 दिसंबर को डीजीसीए को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। नागर विमानन मंत्री राममोहन नायडू ने आठ दिसंबर को राज्यसभा में इंडिगो के व्यापक परिचालन व्यवधानों पर कहा था, “हम इस स्थिति को हल्के में नहीं ले रहे हैं। हम जांच कर रहे हैं। हम मामले में सख्त कार्रवाई करेंगे।”

देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो में बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द होने के मामले की जांच करने वाली चार-सदस्यीय समिति ने अपनी रिपोर्ट विमानन नियामक डीजीसीए को सौंप दी है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के संयुक्त महानिदेशक संजय के. ब्रम्हाणे की अध्यक्षता में इस समिति का गठन पांच दिसंबर को किया गया था।

समिति को यह जिम्मेदारी दी गई थी कि वह उन परिस्थितियों की व्यापक समीक्षा करे, जिनकी वजह से इंडिगो की सैकड़ों उड़ानें कई दिनों तक रद्द हुई थीं। अधिकारी ने कहा कि जांच समिति ने शुक्रवार शाम अपनी रिपोर्ट डीजीसीए को सौंप दी। सूत्रों ने बताया कि रिपोर्ट की प्रतियां नागर विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू और नागर विमानन सचिव समीर कुमार सिन्हा के कार्यालय को भी भेजी गई हैं।

हालांकि, रिपोर्ट के निष्कर्षों का ब्योरा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। इस समिति में ब्रम्हाणे के अलावा डीजीसीए के उप महानिदेशक अमित गुप्ता, वरिष्ठ उड़ान संचालन निरीक्षक कैप्टन कपिल मांगलिक और उड़ान संचालन निरीक्षक कैप्टन रामपाल शामिल थे। इस महीने के शुरुआती सप्ताह में इंडिगो की उड़ानें बड़े पैमाने पर निरस्त हुई थीं।

इस दौरान एक दिन 1,600 से अधिक उड़ानें भी रद्द करनी पड़ी थीं। इसके अलावा बड़ी संख्या में उड़ानें कई घंटों की देरी से भी रवाना हुईं जिससे देशभर के हवाई अड्डों पर यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ी थी। चालक दल के सदस्यों की तैनाती एवं विश्राम से संबंधित नए मानकों को लागू करने के लिए इंडिगो ने समय पर तैयारी नहीं की थी जिसकी वजह से यह व्यापक गतिरोध पैदा हुआ।

उड़ान बाधाओं के बाद डीजीसीए ने इंडिगो को अपना शीतकालीन उड़ानों की संख्या में 10 प्रतिशत तक कटौती करने का निर्देश दिया था। साथ ही, एयरलाइन के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पीटर एल्बर्स और मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) इसिड्रे पोर्केरास को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए।

नियामक ने समिति के गठन से जुड़े आदेश में कहा था कि प्रथम दृष्टया यह स्थिति आंतरिक निगरानी, परिचालन तैयारी और नियामकीय अनुपालन की योजना में गंभीर खामियों की तरफ इशारा करती है, जिसके चलते स्वतंत्र जांच जरूरी हो गई। डीजीसीए ने कहा था कि उसने इंडिगो को चालक दल तैनाती संबंधी नियमों को लागू करने की तैयारी को लेकर समय-समय पर निर्देश दिए थे। लेकिन एयरलाइन चालक दल की उपलब्धता का सही आकलन, समय पर प्रशिक्षण एवं ड्यूटी रोस्टर में बदलाव करने में विफल रही।

संशोधित नियमों को दो चरणों में लागू किया गया था। इसका पहला चरण एक जुलाई से और दूसरा चरण एक नवंबर से प्रभावी हुआ था। डीजीसीए का कहना है कि दूसरे चरण के क्रियान्वयन में कमी के चलते प्रतिदिन 170 से 200 उड़ानें रद्द हुईं, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।

टॅग्स :DGCAइंडिगोIndigo
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