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Advance Tax Alert: संडे को नहीं भर पाए एडवांस टैक्स, तो क्या 16 जून को भर सकते हैं टैक्स? जानें क्या कहता है नियम

By अंजली चौहान | Updated: June 15, 2025 10:25 IST

Advance Tax Alert: 1994 के एक परिपत्र में बिना किसी जुर्माने के अगले कार्य दिवस, 16 जून को भुगतान की अनुमति दी गई है, हालांकि कर विभाग ऑनलाइन भुगतान विकल्पों की उपलब्धता के कारण इसे चुनौती दे सकता है।

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Advance Tax Alert: जो लोग आयकर विभाग के एडवांस टैक्स को भरते हैं उनके लिए यह खबर काम की है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में एडवांस टैक्स की पहली किस्त भरने की आज लास्ट डेट है। 15 जून 2025 को एडवांस टैक्स भरने का आखिरी दिन है। मगर संडे के दिन कई टैक्सपेयर्स एडवांस टैक्स नहीं भर पाए। ऐसे में क्या 16 जून को टैक्स भर सकते हैं या फिर जुर्माना लगेगा।

इस बारे में आयकर विभाग ने कई सालों पहले ही यह समझ लिया था कि आने वाले वक्त में इस तरह के हालात जरूर पैदा होंगे, जब डेडलाइन वाले दिन छुट्टी होगी। ऐसे में आयकर विभाग ने 14 जनवरी 1994 को जारी सीबीडीटी परिपत्र संख्या 676 के दिशा-निर्देशों में एडवांस टैक्स को लेकर एक सर्कुलर जारी किया था। इस सर्कुलर के अनुसार अगर एडवांस टैक्स चुकाने की डेडलाइन किसी छुट्टी वाले दिन पड़ रही है तो उसके बाद जब भी बैंक दोबारा खुलेंगे, तब आप एडवांस टैक्स भर सकते हैं। 

1994 के सर्कुलर के अनुसार, जब एडवांस टैक्स की लास्ट डेट सार्वजनिक अवकाश के साथ मेल खाती है, तो अगला वर्किंग डे पेमेंट के लिए आधिकारिक समय सीमा बन जाता है। इस प्रावधान का मतलब है कि करदाता दंडात्मक ब्याज का सामना किए बिना 16 जून, 2025 को अपनी पहली किस्त का भुगतान कर सकते हैं। 

हालांकि, इस लचीलेपन को कर अधिकारियों द्वारा चुनौती दी जा सकती है, जो मूल समय सीमा को लागू करने के कारण के रूप में इलेक्ट्रॉनिक भुगतान सुविधाओं की उपलब्धता का तर्क दे सकते हैं।

14 जनवरी, 1994 के परिपत्र संख्या 676 के अनुसार, कोई भी व्यक्ति वित्त वर्ष 2025-26 की पहली किस्त के लिए 16 जून, 2025 (सोमवार) को अग्रिम कर जमा कर सकता है, क्योंकि 15 जून, 2025 रविवार को है, और इस पर कोई दंड या ब्याज नहीं लगेगा।

क्यों भरा जाता है एडवांस टैक्स 

एडवांस टैक्स, जो वेतनभोगी पेशेवरों, फ्रीलांसरों और 10,000 रुपये से अधिक कर देयता वाले व्यवसाय मालिकों को प्रभावित करता है, के लिए चार निर्धारित किस्तों के माध्यम से भुगतान की आवश्यकता होती है। पहली किस्त कुल कर देयता का 15% है, जो पारंपरिक रूप से 15 जून तक देय है। इसके बाद की किस्तें 15 सितंबर तक 45%, 15 दिसंबर तक 75% और 15 मार्च तक 100% हो जाती हैं। करदाताओं के लिए किसी भी ब्याज शुल्क से बचने के लिए इन समयसीमाओं का पालन करना महत्वपूर्ण है।

गौरतलब है कि टैक्सपेयर्स को याद दिलाया जाता है कि इन समयसीमाओं का पालन न करने पर आयकर अधिनियम की धारा 234C के तहत ब्याज लगेगा। यह ब्याज अवैतनिक कर देयता के लिए प्रति वर्ष 1% की दर से जमा होता है, जो संभावित रूप से वर्ष के अंत तक 12% तक पहुँच सकता है। इसलिए, इन अतिरिक्त लागतों से बचने के लिए समय पर भुगतान करना महत्वपूर्ण है। 

विशेष रूप से, अगर करदाता 1994 के परिपत्र द्वारा दी गई छूट अवधि से अधिक देरी करते हैं, तो उन्हें अपने रिटर्न दाखिल करते समय महत्वपूर्ण वित्तीय नतीजों का सामना करना पड़ सकता है।

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