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ब्लॉग: ट्रम्प की नई टीम में सरकार के तेवरों, नीतियों की झलक

By शोभना जैन | Updated: November 16, 2024 07:45 IST

तुलसी को इंटेलिजेंस  विभाग का डायरेक्टर बनाए जाने की घोषणा खासी अहम है. गैबार्ड साल 2022 में डेमोक्रेटिक पार्टी छोड़कर स्वतंत्र  राजनीतिज्ञ के तौर पर सक्रिय थीं लेकिन ट्रम्प के चुनाव प्रचार में वह काफी सक्रिय हो गई थीं.

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अब जबकि अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपनी सरकार की नई टीम का चयन कर रहे हैं, निश्चय ही टीम से उनके कार्यकाल की नीतियों की झलक नजर आ रही है. लग रहा है कि ट्रम्प ने कमोबेश अपने पहले कार्यकाल की  नीतियों के नई परिस्थतियों के अनुरूप अधूरे तार जोड़ने की कोशिश तो की है. इसके लिए वो ज्यादा स्पष्ट योजना और एक तैयार टीम के साथ अपनी नीतियों पर काम करने की तैयारी में हैं लेकिन देश और दुनिया की नई बदली हुई तस्वीर के चलते टीम के तेवर कुछ आक्रामक भी माने जा रहे हैं.

अभी तक भारतीय मूल के तीन सदस्यों को ट्रम्प ने टीम में शामिल किए जाने की घोषणा की है. विवेक रामास्वामी और तुलसी गबार्ड अहम चर्चित नाम हैं. तुलसी को इंटेलिजेंस  विभाग का डायरेक्टर बनाए जाने की घोषणा खासी अहम है. गैबार्ड साल 2022 में डेमोक्रेटिक पार्टी छोड़कर स्वतंत्र  राजनीतिज्ञ के तौर पर सक्रिय थीं लेकिन ट्रम्प के चुनाव प्रचार में वह काफी सक्रिय हो गई थीं.

वहीं विवेक रामास्वामी, जिन्हें ट्रम्प ने ‘देशभक्त अमेरिकी’ बताया है, उन्हें ट्रम्प ने एक्स, टेस्ला और स्पेसएक्स के मालिक एलन मस्क के साथ डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (डीओजीई) का प्रमुख बनाया है. एलन मस्क के साथ विवेक रामास्वामी सरकार में नौकरशाही, अतिरिक्त नियम-कानून और ‘अनावश्यक खर्चों’ को रोकने के अलावा फेडरल एजेंसियों के पुनर्गठन पर काम करेंगे.  

एक और  महत्वपूर्ण फैसले में  पिट स्मिथ को नया रक्षा मंत्री बनाए जाने का फैसला किया है. फ्लोरिडा के सांसद माइकल वाल्ट्ज अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनेंगे और सीनेटर मार्को रूबियो को विदेश मंत्री बनाया जा  रहा है. व्हाइट हाउस के लिए नीतियां बनाने वाले स्टीफन मिलर  डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ पद के लिए ट्रम्प की पसंद हैं.  ट्रम्प 2.0 में भारत-अमेरिकी संबंधों की बात करें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रम्प के बीच दोस्ती है लेकिन  सवाल है कि क्या इसका सकारात्मक प्रभाव द्विपक्षीय रिश्तों  खास तौर पर उनके पिछले कार्यकाल में उतार-चढ़ाव भरे रिश्तों जैसा ही रहेगा. दोनों देशों के बीच अनेक व्यापारिक मुद्दों को लेकर असहमति रही.

ईरान, आव्रजन और सब्सिडी आदि ऐसे ही पेचीदा मुद्दे हैं. हालांकि चीन को लेकर दोनों की एक राय है. देखना होगा कि ट्रम्प के नेतृत्व में उनकी टीम भारत के साथ मिलकर विशेष तौर पर उलझे व्यापारिक व अन्य मुद्दों में असहमति कैसे कम कर सकेगी.

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