लाइव न्यूज़ :

वेदप्रताप वैदिक का ब्लॉग: कश्मीर से पाकिस्तान को बड़ा नुकसान

By वेद प्रताप वैदिक | Updated: February 26, 2021 15:08 IST

इमरान ने कश्मीर पर बहुत ही व्यावहारिक और संतुलित रवैया अपनाया है. उन्होंने कहा कि कश्मीर समस्या भारत और पाकिस्तान को बातचीत से हल करनी चाहिए. यदि जर्मनी और फ्रांस जैसे आपस में कई युद्ध लड़ने वाले राष्ट्र प्रेमपूर्वक रह सकते हैं तो भारत और पाक क्यों नहीं रह सकते?

Open in App

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान पिछले साल नवंबर में अफगानिस्तान गए थे और अब वे श्रीलंका गए हैं. उनका काबुल जाना तो स्वाभाविक था लेकिन उनके कोलंबो जाने पर कुछ पलकें ऊपर उठी हैं. कहीं ऐसा तो नहीं कि श्रीलंका की राजपक्षे सरकार, चीन और पाकिस्तान का दक्षिण एशिया में कोई नया त्रिभुज उभर रहा है?

राजपक्षे सरकार और भारत के बीच कई वर्षो तक श्रीलंकाई तमिलों की वजह से तनाव चलता रहा है और उस काल के दौरान राजपक्षे बंधुओं ने चीन के साथ घनिष्ठता भी काफी बढ़ा ली थी लेकिन इधर दूसरी बार सत्तारूढ़ होने के बाद भारत के प्रति उनकी लिहाजदारी बढ़ गई है.

इसीलिए उन्होंने श्रीलंकाई संसद में होने वाले इमरान के भाषण को स्थगित कर दिया था, क्योंकि इमरान अपने भाषण में कश्मीर का मुद्दा जरूर उठाते. लेकिन इमरान चूके नहीं. उन्होंने कश्मीर का मुद्दा उठा ही दिया, एक अंतरराष्ट्रीय व्यापार सम्मेलन में.

इस बार इमरान ने कश्मीर पर बहुत ही व्यावहारिक और संतुलित रवैया अपनाया है. उन्होंने कहा कि कश्मीर समस्या भारत और पाकिस्तान को बातचीत से हल करनी चाहिए. यदि जर्मनी और फ्रांस जैसे आपस में कई युद्ध लड़ने वाले राष्ट्र प्रेमपूर्वक रह सकते हैं तो भारत और पाक क्यों नहीं रह सकते?

पाक कब्जेवाले कश्मीर के कई ‘प्रधानमंत्रियों’ और खुद पाकिस्तान के राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों और कई आतंकवादियों को मैं अपनी मुलाकातों में यही समझाता रहा हूं कि कश्मीर ने पाकिस्तान का जितना नुकसान किया है, उतना नुकसान दो महायुद्धों ने यूरोप का भी नहीं किया है. कश्मीर विवाद ने पाकिस्तान की नींव को खोखला कर दिया है. जिन्ना के सपनों को चूर-चूर कर दिया है.

कश्मीर के कारण पाकिस्तान युद्ध और आतंकवाद पर अरबों रु. खर्च करता है. साधारण पाकिस्तानियों को रोटी, कपड़ा, मकान, दवा और तालीम भी ठीक से नसीब नहीं है. नेताओं और नौकरशाहों पर फौज हावी रहती है.

इमरान खान जैसे स्वाभिमानी नेता को भीख का कटोरा फैलाने के लिए बार-बार धनी देशों में जाना पड़ता है. पूरे कश्मीर पर कब्जा होने से पाकिस्तान को जितना फायदा मिल सकता था, उससे हजार गुना ज्यादा नुकसान कश्मीर उसका कर चुका है.

बेहतर हो कि इमरान खान जनरल मुशर्रफ के जमाने में जो चार-सूत्री योजना थी, उसी को आधर बनाएं और भारत के साथ खुद बात शुरू करें. यदि वे सफल हुए तो कायदे-आजम मोहम्मद अली जिन्ना के बाद पाकिस्तान के इतिहास में उन्हीं का बड़ा नाम होगा.

टॅग्स :पाकिस्तानजम्मू कश्मीरइमरान खानभारतचीन
Open in App

संबंधित खबरें

भारतअमरनाथ यात्रा के लिए सुरक्षा प्रबंधों की कवायद तेज, 70 हजार से डेढ़ लाख तक अर्द्ध सैनिक बलों की होगी तैनाती

कारोबारभारत-न्यूजीलैंड FTA पर हस्ताक्षर: $20 अरब का निवेश, 5,000 वीज़ा और ड्यूटी-फ्री एक्सेस, जानें मुख्य विशेषता

भारतमौत से 2-4 दिन पहले 25 और 18-24 घंटे पहले 9 चोट निशान?, हिरासत में शहीद हुए सीमा सुरक्षा बल के जवान जसविंदर सिंह?, शरीर पर 34 चोटें

भारतपहलगाम नरसंहार के एक साल बाद भी नहीं खुले बैसरन वैली, डोनवान घाटी और चंदनवाड़ी, सिर्फ दावे ही दावे बाकी

भारतSonamarg: 2026 की पहली तिमाही में सोनमर्ग में पर्यटकों की संख्या 2 लाख के करीब, पहलगाम में एक साल में आने वालों का आंकड़ा 10 लाख के पार

भारत अधिक खबरें

भारतVIDEO: आरक्षण के पक्ष में होती तो लागू कर देती… अखिलेश का BJP पर निशाना

भारतउपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा का भाजपा में विलय की अटकलें?, पुत्र दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजने और मंत्री पद बनाए रखने का आश्वासन?

भारतबिहार में सक्रिय गिरोहों का डाटाबेस तैयार कर उनकी गतिविधियों पर रखी जा रही है नजर, 22 अप्रैल 2026 तक पुलिस ने कुल 10 मुठभेड़ किए

भारतVIDEO: दमदम में रोड शो, धनियाखली में गरजे योगी, ममता पर ताबड़तोड़ हमले

भारतVIDEO: बंगाल को कंगाल बना दिया… योगी का बड़ा आरोप, TMC पर सीधा वार