लखनऊः उत्तर प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में इस एक अप्रैल से 15 अप्रैल तक स्कूल चलो अभियान चलाया गया. इस अभियान के तहत प्रदेश के 1.33 लाख बेसिक स्कूलों में ज्यादा से ज्यादा नए एडमिशन करने का लक्ष्य था. यह अभियान तो खत्म हो गया लेकिन अभी भी एडमिशन की प्रक्रिया स्कूलों में चल रही है, लेकिन सूबे के युवा माता-पिता अब सुविधा विहीन सरकारी स्कूलों में अपने बच्चों का एडमिशन (दाखिला) करने से बच रहे हैं. इसके चलते ही सूबे के 41,823 बेसिक स्कूलों में एक भी नया एडमिशन नहीं हुआ.
सरकार की आंकड़ों के मुताबिक पहली कक्षा में शून्य एडमिशन वाले स्कूलों की संख्या 25,595 है, जबकि कक्षा में छह में नया एडमिशन ना होने वाले स्कूलों की संख्या 16,228 है. इन आंकड़ों के जाहिर है कि सूबे के 1.33 लाख बेसिक स्कूलों में अभी तक एक तिहाई स्कूलों में नए बच्चों का एडमिशन नहीं हुआ है.
इन जिलों में नहीं हुए नए एडमिशन
यूपी के जिन जिलों के सरकारी स्कूलों में एक भी नए बच्चे का एडमिशन नहीं हुआ, उनमें लखनऊ के भी आठ सौ स्कूल हैं. इसी प्रकार आगरा के 1136 ऐसे स्कूल हैं, जहां कक्षा एक में कोई नया एडमिशन नहीं हुआ. आगरा में ही कक्षा छह में शून्य एडमिशन वाले स्कूलों की संख्या 507 पायी गई.
प्रयागराज में जहां 2853 सरकारी बेसिक स्कूल हैं, वहां कक्षा एक में शून्य एडमिशन वाले 172 और कक्षा छह में शून्य एडमिशन वाले 213 स्कूल पाए गए. इसी प्रकार अंबेडकर नगर में कक्षा एक में शून्य एडमिशन वाले 255 और कक्षा छह में शून्य एडमिशन वाले 208 स्कूल मिले हैं. अमेठी में कक्षा एक में शून्य एडमिशन वाले 152 और कक्षा छह में शून्य एडमिशन वाले 82 स्कूल पाए गए.
इसी तरह से शून्य एडमिशन वाले स्कूल अमरोहा में 395 तथा 242, आजमगढ़ में 940 और 615, बहराइच में 945 और 361 पाए गए हैं. स्कूल चलो अभियान के तहत बेसिक स्कूलों में एडमिशन के इस आंकड़ों के सामने आते ही यूपी में शिक्षा के सुधार को लेकर किए गए सुधारों पर सवाल खड़े किए जाने लगे हैं.
मंत्री सदीप सिंह का दावा
फिलहाल तो शर्मिंदा करने वाले इन आंकड़ों के सामने आने के बाद यूपी के महानिदेशक (स्कूल शिक्षा) मोनिका रानी ने शून्य एडमिशन वाले स्कूलों को नोटिस भेजकर तीन दिनों में लिखित जवाब मांगा है. इसके साथ ही उन्होंने जिले के सभी बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) तथा खंड शिक्षाधिकारी को निर्देशित किया है कि वह स्थिति सुधारने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास करें.
शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह भी इस मामले में बेहद शर्मसार हैं. वह कहते हैं कि 41 हजार से अधिक स्कूलों में स्कूल चलो अभियान के तहत एक नए बच्चे का भी एडमिशन ना होना शर्म की बात है, जबकि एक के एक काबिल अधिकारी शिक्षा विभाग में शासन से लेकर जिलों तक में तैनात हैं.
यहीं नहीं सरकारी स्कूलों के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए ऑपरेशन कायाकल्प और प्रोजेक्ट अलंकार के तहत व्यापक सुधार किए गए. इसके बाद भी शहर से लेकर कस्बे और गांवों के बेसिक स्कूलों में लोग अपने बच्चों का एडमिशन कराने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं तो यह चिंता ही बात है. ऐसा क्यों है इसका पता लगाया जाएगा और उसके अनुसार स्कूलों में सुधार भी किया जाएगा.
इस लिए सरकारी स्कूलों में नहीं करा रहे एडमिशन
मंत्री के इस दावे के इतर लोगों का यह कहना है कि सरकारी स्कूलों की खराब दशा के कारण ही लोग अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने के लिए भेज रहे हैं क्योंकि उनके उंसके बच्चे की देखरेख बेहतर तरीके से होती है. प्राइवेट स्कूलों के क्लास भी साफ सुथरे होते हैं, बच्चों के बैठने के लिए कुर्सी-मेज भी अच्छी होती है.
शौचालय भी साफ होते है तथा स्कूलों में पीने के पानी भी व्यवस्था ही अच्छी होती है. सरकार स्कूलों में इस तरह ही व्यवस्था बेहतर नहीं होती. इसी वजह से शहर और गाँव में रहने वाले लोग अपने बच्चों का एडमिशन सरकार स्कूलों में करने के बच रहे हैं.