नई दिल्लीः आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को पत्र लिखकर कहा कि वह आबकारी मामले में व्यक्तिगत रूप से या किसी अधिवक्ता के माध्यम से उनके समक्ष पेश नहीं होंगे। पार्टी ने सोमवार को यह जानकारी दी। केजरीवाल ने पत्र में लिखा, ‘‘न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता से न्याय मिलने की मेरी उम्मीद टूट गई है। इसलिए, मैंने महात्मा गांधी के सत्याग्रह के मार्ग का अनुसरण करने का निर्णय लिया है।’’ केजरीवाल ने लिखा, "जस्टिस स्वर्णकांता से इंसाफ़ मिलने की मेरी उम्मीद टूट गई है।
मैंने गांधीजी के सत्याग्रह को फॉलो करने का फ़ैसला किया है। मैंने अंतरात्मा की आवाज़ पर फ़ैसला किया है। मैं जस्टिस स्वर्णकांता के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का अधिकार रखूंगा। 20 अप्रैल को हाई कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दूसरों की उस अर्ज़ी को खारिज कर दिया, जिसमें एक्साइज़ पॉलिसी केस में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को अलग करने की मांग की गई थी।
केजरीवाल ने कहा, "मुझे एक झूठे केस में फंसाया गया और जेल भेज दिया गया। एक चुनी हुई सरकार को गलत तरीके से गिरा दिया गया। हमें कई महीने जेल में रखा लेकिन आखिरकार सच की जीत हुई। कोर्ट ने मुझे पूरी तरह निर्दोष घोषित कर दिया। कोर्ट ने CBI की जांच पर सवाल खड़े किए और जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए।
CBI ने तुरंत इस फैसले के हाई कोर्ट में चुनौती दी ये केस जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के सामने लगा। तब मेरे मन में सवाल उठा कि क्या इनके सामने मुझे न्याय मिलेगा?... RSS की जिस विचारधारा वाली सरकार ने झूठे आरोप लगाकर मुझे जेल डाला, जज साहिबा ने स्वयं माना है कि उस विचारधारा से जुड़े संगठन अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के मंचों पर वे कई बार जाती रही हैं।
मैं और AAP उस विचारधारा के घोर विरोधी हैं। ऐसे में क्या उनके सामने मुझे न्याय मिल सकता है?" दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा, "केजरीवाल ने जो पत्र आज न्यायाधीश के समुख लिखने का प्रयास किया है हम उसकी निंदा करते हैं। कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। हमने इस पूरे मामले में देखा कि शराब घोटाला मामले में उन्होंने जिस प्रकार की टिप्पणी न्यायाधीश पर की है ये लोकतंत्र के खिलाफ है।"