नई दिल्लीःआम आदमी पार्टी और दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल को बड़ा झटका लगा है। राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने आम आदमी पार्टी (आप) के सात सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में विलय को सोमवार को आधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया, जिससे उच्च सदन में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के सदस्यों की संख्या 10 से घटकर तीन रह गई। साथ ही उच्च सदन में भाजपा सदस्यों की संख्या बढ़कर 113 हो गई है। अब आप के पास राज्यसभा में केवल 3 सांसद हैं। दिल्ली से 2 और पंजाब से 1 सांसद दिखेंगे।
24 अप्रैल को आप छोड़कर बीजेपी में शामिल होने वाले सांसद राघव चड्ढा, अशोक कुमार मित्तल, हरभजन सिंह, संदीप कुमार पाठक, डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी, स्वाति मालीवाल और राजिंदर गुप्ता अब बीजेपी के 113 राज्यसभा सांसदों में शामिल हैं। पंजाब के 6 और दिल्ली के 1 एमपी बीेजेपी में शामिल हुए।
शुक्रवार को आम आदमी पार्टी (आप) के सात राज्यसभा सांसदों जिनमें से छह पंजाब से थे, ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में विलय कर लिया। इसके बाद आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि भाजपा ने एक बार फिर पंजाब की जनता के साथ विश्वासघात किया है।
आम आदमी पार्टी ने कहा कि भाजपा ने पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार द्वारा किए जा रहे जनहितैषी कार्यों को रोकने के लिए ‘ऑपरेशन लोटस’ शुरू किया है। मान ने कहा, “पंजाब की जनता राज्य के साथ विश्वासघात करने वालों को जवाबदेह ठहराएगी और यह स्पष्ट कर देगी कि ऐसे हथकंडे लोकतंत्र में राजनीतिक जीत हासिल नहीं करा सकते, जहां पंजाब की जनता सर्वोपरि है।”
राधाकृष्णन ने आम आदमी पार्टी (आप) के सात सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में विलय को मंजूरी दे दी है। इस कदम से राज्यसभा में आम आदमी पार्टी (आप) की संख्या दस से घटकर मात्र तीन रह गई है, जबकि सत्तारूढ़ राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सीटों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
दलबदल करने वाले सांसदों के समूह का नेतृत्व राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल जैसे दिग्गज नेता कर रहे हैं। उनके साथ पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजिंदर गुप्ता और विक्रमजीत साहनी भी शामिल हुए हैं। संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत कड़े दलबदल विरोधी कानून को दरकिनार करते हुए विलय को सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया।
दस में से ठीक सात सदस्यों (आवश्यक दो-तिहाई बहुमत से अधिक) के एक साथ दल बदलने से सांसदों ने सफलतापूर्वक यह तर्क दिया कि उनका दल-बदल व्यक्तिगत दल-बदल नहीं बल्कि विधायी दल का विलय है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में राघव चड्ढा ने इस कदम को संवैधानिक आवश्यकता बताते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी अपने संस्थापक सिद्धांतों और मूल नैतिक मूल्यों से भटक गई थी। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा लग रहा है जैसे वे "गलत पार्टी में सही आदमी" हैं और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काम करने का संकल्प लिया।