लाइव न्यूज़ :

योगेश कुमार गोयल का ब्लॉग: समय की मांग हैं इको-फ्रेंडली राखियां

By योगेश कुमार गोयल | Updated: August 11, 2022 10:25 IST

विभिन्न स्थानों पर गोबर तथा बांस का इस्तेमाल कर बनाई जा रही खूबसूरत राखियों को देश के दूरदराज के हिस्सों में लोगों द्वारा पसंद किया जाने लगा है। दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश सहित कई बड़े राज्यों के बाजारों में इन आकर्षक राखियों की मांग का तेजी से विस्तार हुआ है। 

Open in App
ठळक मुद्देभारतीय जैविक किसान उत्पादक संघ की पहल पर इस वर्ष गाय के गोबर से बनी 60 हजार राखियां तो अमेरिका और मॉरीशस भेजी गई हैं।अब अन्य पारंपरिक राखियों के मुकाबले इको-फ्रेंडली राखियों की मांग भी न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी बढ़ने लगी है।

भाई द्वारा बहन की रक्षा का वचन देने के प्रतीक के रूप में मनाए जाने वाले त्यौहार रक्षाबंधन के मायने वर्तमान युग में काफी बदल गए हैं। बदले जमाने के साथ भाई-बहन के अटूट प्यार के इस पर्व पर आधुनिकता का रंग चढ़ चुका है लेकिन साथ ही प्रकृति मित्र राखियां भी लोगों द्वारा पसंद की जाने लगी हैं और हाल के वर्षों में स्वदेशी राखियों की मांग कई गुना बढ़ी है। 

राखी निर्माण के लिए बड़ी मात्रा में कच्चा माल चीन से ही आयात किया जाता रहा है लेकिन चीन के साथ तनातनी के दौर में चाइनीज सामान के प्रति लोगों के विरोध के कारण स्वदेशी राखियों के प्रति आकर्षण तेजी से बढ़ा है। महिलाओं तथा बच्चों का आकर्षण साधारण राखियों के बजाय अब नए-नए डिजाइनों वाली स्वदेशी डिजाइनर और हाइटेक राखियों की ओर देखा जाने लगा है। 

हाईटेक राखियों में गैजेट राखियां, 3-डी और एलईडी तथा म्यूजिकल राखियां शामिल हैं जबकि बच्चों के लिए घड़ी और छोटे-छोटे सुंदर खिलौने लगी राखियां भी बाजार में उपलब्ध हैं। वहीं अब अन्य पारंपरिक राखियों के मुकाबले इको-फ्रेंडली राखियों की मांग भी न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी बढ़ने लगी है।

विभिन्न स्थानों पर गोबर तथा बांस का इस्तेमाल कर बनाई जा रही खूबसूरत राखियों को देश के दूरदराज के हिस्सों में लोगों द्वारा पसंद किया जाने लगा है। दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश सहित कई बड़े राज्यों के बाजारों में इन आकर्षक राखियों की मांग का तेजी से विस्तार हुआ है। 

भारतीय जैविक किसान उत्पादक संघ की पहल पर इस वर्ष गाय के गोबर से बनी 60 हजार राखियां तो अमेरिका और मॉरीशस भेजी गई हैं। इन इको फ्रेंडली राखियों का सबसे बड़ा लाभ यही है कि इनके निर्माण से एक ओर जहां स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध होते हैं, वहीं इनके उपयोग से लोगों को पर्यावरण को प्रदूषित करती रही चाइनीज राखियों से मुक्ति मिल रही है।

टॅग्स :रक्षाबन्धनभारत
Open in App

संबंधित खबरें

विश्वआखिर ऐसी ओछी हरकतें लगातार क्यों कर रहा है चीन ?

भारतविदेश मंत्रालय ने चीन के भारतीय क्षेत्र के नाम बदलने के कदम पर पलटवार किया, इसे एक शरारती प्रयास बताया

भारतचुनावी हिंसा के लिए आखिर कौन जिम्मेदार ?

भारत'₹15,000 देते रहो और खुश रहो': सुप्रीम कोर्ट ने पत्नी से 16 साल से अलग रह रहे पति की तलाक़ की अर्ज़ी ठुकराई

विश्वभारत-US संबंधों का नया अध्याय; मार्को रूबियो का भारत दौरा, क्वाड और क्रिटिकल मिनरल्स पर जोर

भारत अधिक खबरें

भारतNari Shakti Vandan: महिला आरक्षण बिल पर समर्थन?, कांग्रेस सहित विपक्ष के कई प्रमुख दलों ने कहा- परिसीमन प्रावधान के खिलाफ एकजुट होकर करेंगे वोट, वीडियो

भारतNari Shakti Vandan Sammelan: 16 अप्रैल को एक साथ होली-दिवाली?, 10वीं-12वीं की टॉपर छात्राओं को सीएम डॉ. मोहन ने किया सम्मानित, देखिए तस्वीरें

भारतकौन हैं विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव?, क्यों नीतीश कुमार करते हैं सबसे अधिक भरोसा?, वीडियो

भारतबिहार सरकार बंटवाराः गृह समेत 29 विभाग सम्राट चौधरी के पास, विजय कुमार चौधरी के पास 10 और बिजेंद्र प्रसाद यादव के पास 8, देखिए लिस्ट

भारतCBSE 10th Result 2026: 93.7 प्रतिशत छात्र उत्तीर्ण हुए, CBSE 10वीं बोर्ड का रिजल्ट जारी, यहां पर करिए चेक?