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Maharashtra and Jharkhand Assembly Elections: देश में मतदान केंद्रों को अधिक सुलभ और आकर्षक बनाना होगा

By आरके सिन्हा | Updated: December 9, 2024 05:59 IST

Maharashtra and Jharkhand Assembly Elections: चुनावों में मतदान को कैसे बढ़ाया जा सकता है. हालांकि, सकारात्मक पहलू यह है कि मतदान में समग्र सुधार हुआ है.

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ठळक मुद्देमुख्य रूप से श्रेय भारत के वर्तमान चुनाव आयोग  को जाता है.हस्तियों-क्रिकेटरों से लेकर फिल्म सितारों तक को भी शामिल किया गया है.यह मानना होगा कि देश के शहरी इलाकों में मतदान कमोबेश कम ही रहता है.

Maharashtra and Jharkhand Assembly Elections: महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभाओं के लिए हुए चुनावों के नतीजे आ चुके हैं. अब दोनों राज्यों में नई सरकारों का गठन भी हो गया है. लेकिन, प्रश्न यह उठता है कि क्या दोनों राज्यों में मतदान का प्रतिशत क्या किसी भी मजबूत लोकतंत्र के लिए पर्याप्त है? बिल्कुल नहीं! तो फिर किया क्या जाए! पर यह तो पूरे तो पूरे देश के सभी जिम्मेदार नागरिकों को यह सोचना ही होगा कि चुनावों में मतदान को कैसे बढ़ाया जा सकता है. हालांकि, सकारात्मक पहलू यह है कि मतदान में समग्र सुधार हुआ है.

इस बदलाव का श्रेय, हालांकि अपेक्षाकृत धीमा और क्रमिक है, इसका  मुख्य रूप से श्रेय भारत के वर्तमान चुनाव आयोग  को जाता है. मतदान बढ़ाने के लिए चुनाव आयोग इस बार काफी सक्रिय था. इसके अभियान में, सोशल मीडिया सहित, स्थानीय हस्तियों-क्रिकेटरों से लेकर फिल्म सितारों तक को भी शामिल किया गया है.

हालांकि यह मानना होगा कि देश के शहरी इलाकों में मतदान कमोबेश कम ही रहता है. शिमला से सूरत तक शहरी मतदाता की उदासीनता लगातार बनी हुई है. यह रुझान नया नहीं है. चुनावों के पहले तीन दशकों में, शहरी मतदाताओं की भागीदारी काफी बेहतर रहती थी. यह समझना होगा कि शहरी भारत, देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है.

देश का लगभग सारा सेवा क्षेत्र (सर्विस सेक्टर) शहरों में ही सिमटा है. जनगणना के आंकड़ों को माने तो देश की 31 फीसदी आबादी शहरों में रहती है. हालांकि गैर-सरकारी आंकड़े शहरी आबादी कहीं अधिक होने का दावा करते हैं. इन शहरों में रोजगार के अवसर हैं. सारे देश के नौजवानों के सपने इन्हीं शहरों में पहुंचकर साकार होते हैं. पर नीति निर्धारकों के फोकस से कहीं दूर बसते हैं शहर.

जाहिर है, इस कारण से मतदाता निराश होने लगता है अपने जनप्रतिनिधियों से. उसे लगता है कि जब उसके नेता निकम्मे होंगे तो वह वोट क्यों करे. मतदाताओं को नेता बार-बार निराश करते हैं. इसलिए जनप्रतिनिधियों को समझना होगा कि अगर देश में मतदान केंद्रों की तरफ फिर से मतदाताओं को बड़े पैमाने पर लाना है, तो उसकी जिम्मेदारी सिर्फ चुनाव आयोग की ही नहीं है.

उन्हें भी जनता से सीधा संपर्क बनाकर रखना होगा. उन्हें भी जनता के मसलों को लेकर संवेदनशील बनना होगा. पहले से ही सक्रिय, चुनाव आयोग को अधिक से अधिक मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए, मतदान केंद्रों को अधिक सुलभ और आकर्षक बनाना होगा. इसमें पर्याप्त पार्किंग और आरामदायक प्रतीक्षा क्षेत्र जैसे सुधार शामिल हो सकते हैं.

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