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Do It Today Book Review: टालने वाली आदत को दूर करने और प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के तरीकों पर बात करती है बुक 'काल करे सो आज कर'

By मनाली रस्तोगी | Updated: January 18, 2023 17:07 IST

अगर आपमें भी अपने काम को अगले दिन टालने की आदत है और आप इसे सुधारना चाहते हैं तो आपको एक बार डेरियस फरू की किताब 'काल करे सो आज कर' (Do It Today) पढ़ें।

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ठळक मुद्देइस किताब के जरिये आप प्रोकैसटिनेशन को अपने आप से दूर कर पाएंगे।लेखक का कहना है कि प्रोकैसटिनेशन दूर करने से एक व्यक्ति की न सिर्फ कार्यक्षमता बढ़ेगी बल्कि ज्यादा सार्थक नतीजे भी मिलेंगे।डेरियस फरू की किताब अंग्रेजी भाषा में लिखी है, जिसका नाम Do It Today है।

Do It Today Book Review: 'काल करे सो आज कर आज करे सो अब' संत कबीरदास का एक मशहूर दोहा है, जिसे आज भी लोग अक्सर इस्तेमाल करते हैं। इस दोहे का मतलब है कि जो काम कल करना है उसे आप आज ही करें और जो काम आज करना है उसे अभी करें।

कई बार इसका इस्तेमाल काफी जगहों पर होता है, लेकिन असल जिंदगी में अधिकांश लोगों को इसे लागू करने में काफी दिक्कत होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि आज के समय में लोगों की अपने काम को आगे के लिए टालने की आदत काफी बढ़ती जा रही है। 

अगर आपमें भी अपने काम को अगले दिन टालने की आदत है और आप इसे सुधारना चाहते हैं तो आपको एक बार डेरियस फरू की किताब 'काल करे सो आज कर' (Do It Today) पढ़ें। इस किताब के जरिये आप प्रोकैसटिनेशन को अपने आप से दूर कर पाएंगे। लेखक का कहना है कि प्रोकैसटिनेशन दूर करने से एक व्यक्ति की न सिर्फ कार्यक्षमता बढ़ेगी बल्कि ज्यादा सार्थक नतीजे भी मिलेंगे। 

जानते हैं डेरियस फरू के बारे में

डेरियस फोरौक्स 7 पुस्तकों के लेखक हैं और द साउंडिंग बोर्ड के संस्थापक हैं। व्यवसाय के पूर्व छात्र, वे उत्पादकता, आदतों, निर्णय लेने और धन निर्माण के बारे में लिखते हैं। उनके विचारों और कार्यों को टाइम, एनबीसी, फास्ट कंपनी, इंक, ऑब्जर्वर और कई अन्य प्रकाशनों में चित्रित किया गया है।

500K+ लोग हर महीने उनके ब्लॉग को पढ़ते हैं, जिसे उन्होंने 2015 में शुरू किया था और दुनिया भर के उन लोगों से जुड़ने के लिए अपने मुख्य मंच के रूप में उपयोग करते हैं जो उनके काम को पढ़ते हैं या मार्गदर्शन की आवश्यकता है।

Do It Today का हिंदी अनुवाद है 'काल करे सो आज कर'

डेरियस फरू की किताब अंग्रेजी भाषा में लिखी है, जिसका नाम Do It Today है। 'काल करे सो आज कर' इसका हिंदी अनुवाद है, जिसे हेना नकवी ने किया है। नकवी पिछले 25 सालों से पत्रकारिता और विकास संचार के क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं। उनकी पत्रकारिता-जनसंचार, व्यवहार विकास संचार और आत्म-प्रेरणा के क्षेत्र में कई किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। 

कैसी है किताब 'काल करे सो आज कर'?

डेरियस ने अपनी किताब को तीन भागों में बांटा है। इस किताब के जरिये उन्होंने बताया है कि कोई व्यक्ति अपनी टालमटोल आदत पर काबू कैसे पाए, प्रोडक्टिविटी कैसे बढ़ाए व और अधिक चीजें कैसे करे। इन मुद्दों को मुख्य रूप में तीन हिस्सों में बांटा गया है। काफी लोग ये कहते हैं कि वो किसी काम पर फोकस नहीं कर पा रहे तो क्या करें या समय की बर्बादी को कैसे रोका जाए। लेखक ने किताब में इस विषय पर चर्चा की है।

इस किताब में लेखक ने विज्ञान के साथ अपने तर्कों का समर्थन किया है और चीजों को देखने के लिए एक नया दृष्टिकोण दिया है। इसके अलावा लेखक ने ये भी बताया है कि कैसे इंटरनेट से दूर रहने से किसी व्यक्ति का फोकस बढ़ता है। लेखक ने किताब में कई ऐसे मुद्दे कवर किए हैं, जो अधिकांश लोगों की परेशानी का सबब बने हुए हैं और उन्हें इससे निजात पाने के तरीके नहीं सूझ रहे हैं।

'काल करे सो आज कर' में जिन मुद्दों पर बात की है, वो उन्होंने अपने आधार पर बताए हैं। उन्होंने उन चीजों को महसूस किया और अपने ऊपर लागू किया है। डेरियस फारू ने बहुत ही व्यावहारिक तरीके से अपनी किताब लिखी है। अगर कोई व्यक्ति इन बातों पर अमल करे तो वो जरूर अपनी टालमटोल आदत को कुछ समय में ही दूर कर सकता है। 

निष्कर्ष

जब आप इस किताब को पढ़ना शुरू करेंगे तो आप किताब की अधिकांश बातों से सहमति जताएंगे, लेकिन जब इसपर अमल करने की बात आती है तो लोग काफी ढीलेढाले हो जाते हैं। इस किताब में लेखक ने एक बहुत अच्छी बात कही है कि आपको किताब शुरू से अंत तक नहीं पढ़नी है। आप इसके किसी भी चैप्टर को कभी भी और कैसे भी पढ़ सकते हैं। कुलकर मिलाकर टालमटोल वाली आदत को दूर करने के लिए ये किताब आपकी मदद कर सकती है बशर्ते आप भी इन बातों पर अमल करने को राजी हों। 

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