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ब्लॉग: विक्टिम कार्ड से चुनाव जीतने की रणनीति!

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: November 28, 2023 13:12 IST

अजीब बात है कि क्षेत्रीय दलों ने कुल मिलाकर लड़ाई को वैचारिक आख्यानों तक सीमित रखकर खुद को रोक लिया है लेकिन दोनों राष्ट्रीय पार्टियां एक-दूसरे पर व्यक्तिगत हमले कर रही हैं।

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प्रभु चावला

खुद को राजनीतिक रूप से उत्पीड़ित बताना जीत की राह सुनिश्चित करने का एक शॉर्टकट है यदि इसे बढ़ाया जाए, तो यह एक भावनात्मक चुंबक बन जाता है जो पीड़ित को आम लोगों के साथ जोड़ देता है। आम चुनाव की उल्टी गिनती के बीच, कांग्रेस का इरादा नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए अपने नेता के लिए सहानुभूति इकट्ठा करना है।

पिछले हफ्ते, चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के भाषणों की जांच की और उन्हें नोटिस भेजकर मोदी के खिलाफ अपमानजनक और व्यक्तिगत टिप्पणी करने के लिए स्पष्टीकरण मांगा चुनाव आयोग को दी गई भाजपा की शिकायत में कहा गया है ‘‘किसी भी व्यक्ति को जेबकतरा कहना न केवल दुर्भावनापूर्ण दुर्व्यवहार और व्यक्तिगत हमला है, बल्कि उस व्यक्ति का चरित्र हनन भी है, जिसके खिलाफ ऐसी टिप्पणी उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के स्पष्ट इरादे से की गई और जनता को गुमराह किया गया।’’

कांग्रेस ने जाहिर है कि चुनाव आयोग के कदम को राहुल की नवअर्जित वक्तृत्व कला और चुनावी कौशल पर अंकुश लगाने व पंगु बनाने की साजिश करार दिया। यह पहली बार नहीं है कि राहुल से उनकी टिप्पणी पर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

मोदी के उपनाम के खिलाफ की गई अपमानजनक टिप्पणी के कारण उन्हें अपनी लोकसभा सीट और सरकारी बंगला खोना पड़ा. अदालत के माध्यम से उन्हें दोनों वापस मिल गए। इससे उन्हें हतोत्साहित होने के बजाय प्रधानमंत्री और उनके सहयोगियों पर और अधिक उग्रता से हमला करने का साहस मिला।

उनके सलाहकार शायद सोचते हैं कि विक्टिम कार्ड खेलने और मोदी को सीधे तौर पर निशाने पर लेने से राहुल को व्यापक स्वीकार्यता मिलेगी और उनकी दृश्यता बढ़ेगी, क्योंकि वे मोदी के मंत्रमुग्ध कर देने वाले जादू के एकमात्र प्रतिद्वंद्वी के रूप में खड़े होंगे।

राजनीतिक लड़ाई के इतिहास में देश ने कभी भी दो व्यक्तियों के बीच इतनी कड़वी और लंबे समय तक चलने वाली व्यक्तिगत प्रतिद्वंद्विता नहीं देखी है। इस घोर शत्रुता ने बहस के ताने-बाने पर, चाहे संसद में हो या चुनाव अभियानों में, एक गहरा दाग लगा दिया है. जैसे ही पांच राज्यों के चुनावों के लिए अभियान समाप्त हुआ, 2024 के लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए, राष्ट्रीय दलों के नेताओं के खिलाफ हमलों का जहरीला स्वर तेज हो गया है।

अजीब बात है कि क्षेत्रीय दलों ने कुल मिलाकर लड़ाई को वैचारिक आख्यानों तक सीमित रखकर खुद को रोक लिया है लेकिन दोनों राष्ट्रीय पार्टियां एक-दूसरे पर व्यक्तिगत हमले कर रही हैं।

राहुल हर मंच पर लगातार मोदी पर हमला करने में चुनावी फायदा देखते हैं. राजस्थान में एक रैली में उन्होंने कहा: “पनौती, पनौती, पनौती (अपशकुन) हमारे लड़के विश्व कप जीतने की राह पर थे लेकिन पनौती ने उन्हें हरा दिया। इस देश की जनता जानती है.” उन्होंने भाजपा को आगे और उकसाते हुए कहा, ‘‘जेबकतरे कभी अकेले नहीं आते, हमेशा तीन लोग होते हैं. एक सामने से आता है, एक पीछे से और एक दूर से मोदी का काम आपका ध्यान भटकाना है।

वह सामने से टीवी पर आते हैं और हिंदू-मुसलमान, नोटबंदी और जीएसटी का मुद्दा उठाकर जनता का ध्यान भटकाते हैं।’ पिछली सभा में उन्होंने मोदी के विकास के दावों पर तंज कसते हुए कहा था, ‘‘अपने मोबाइल, शर्ट और जूतों पर टैग देखें, आपको वहां ‘मेड इन चाइना’ लिखा मिलेगा।

क्या आपने कभी अपने कैमरे या शर्ट पर ‘मेड इन मध्य प्रदेश’ लिखा देखा है?” प्रधानमंत्री राहुल के बयानों की अनदेखी करने वालों में से नहीं थे। मोदी ने तंज कसते हुए कहा, ‘‘कल कांग्रेस के एक बुद्धिमान व्यक्ति कह रहे थे कि भारत के लोगों के पास केवल मेड इन चाइना मोबाइल फोन हैं।

अरे, मूर्खों के सरदार, तुम कौन सी दुनिया में रहते हो? मैं जानने को उत्सुक हूं कि वह किस तरह का चश्मा पहनते हैं कि भारत की प्रगति को नहीं देख पाते, जो दुनिया में मोबाइल फोन का दूसरा सबसे बड़ा निर्माता है।’’

यह जहरीला संभाषण मौखिक बोलों तक ही सीमित नहीं है। पोस्टर और मीम युद्ध और भी भयानक थे। पिछले महीने, सोशल मीडिया पर प्रसारित कांग्रेस के एक पोस्टर में पीएम की तस्वीर के साथ कैप्शन था ‘सबसे बड़ा झूठा’ अगले में मोदी और अमित शाह की तस्वीरें थीं और कैप्शन था ‘पीएम नरेंद्र मोदी और जुमला ब्वॉय’ भाजपा ने रामायण का सहारा लिया और एक पोस्टर जारी किया जिसमें राहुल को 10 सिर वाले रावण के रूप में दर्शाया गया और इसका कैप्शन दिया गया, “रावण, कांग्रेस पार्टी का प्रोडक्शन, जॉर्ज सोरोस द्वारा निर्देशित नये जमाने का रावण यहां है।

वह दुष्ट है, धर्म विरोधी, राम विरोधी, उसका लक्ष्य भारत को नष्ट करना है।’’ कांग्रेस ने तुरंत निजी हमले को राहुल की सुरक्षा के लिए खतरा करार दिया। गांधी के वफादार और कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कहा, “उनके नापाक इरादे स्पष्ट हैं, वे उनकी हत्या करना चाहते हैं।

वह, जिसने अपनी दादी और पिता को हत्याओं में खो दिया। उन्होंने तुच्छ राजनीतिक लाभ उठाने के लिए उनकी एसपीजी सुरक्षा वापस ले ली।’’ कांग्रेस जैसी पार्टी के लिए, जो अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाने के लिए संघर्ष कर रही है, सत्तारूढ़ दल द्वारा राहुल पर दिया गया अत्यधिक ध्यान एक वरदान के रूप में आया है। कांग्रेस राहुल के सार्वजनिक आकर्षण से इतनी उत्साहित है कि उसने प्रतिशोधी प्रतिष्ठान के अन्याय के शिकार के रूप में राहुल की बढ़ती लोकप्रियता का विज्ञापन करने के लिए सोशल मीडिया पोस्ट जारी करना शुरू कर दिया है।

पार्टी को यकीन है कि वह राहुल को सोशल मीडिया पर एक महान व्यक्ति के रूप में पेश कर सकती है क्योंकि टीवी चैनल उन्हें वांछित प्रसारण समय नहीं दे रहे हैं।

हालांकि राहुल के एक्स और यूट्यूब पर मोदी की तुलना में कम फॉलोअर्स हैं, लेकिन कांग्रेस राहुल को सुर्खियों में बनाए रखने के लिए चतुराई भरे और चुनिंदा तरीके से पोस्ट जारी कर रही है।

उदाहरण के लिए, पार्टी ने दावा किया कि संसद के पिछले सत्र में प्रधानमंत्री की तुलना में अधिक लोगों ने राहुल का भाषण देखा था-संसद टीवी पर मोदी के 2.3 लाख के मुकाबले 3.5 लाख बार देखा गया; यूट्यूब पर राहुल के भाषण को 26 लाख व्यूज मिले, जबकि पीएम के भाषण को 6.5 लाख व्यूज मिले।

राहुल को लगभग एक दशक तक विश्वसनीयता की कमी और नेतृत्व में पिछड़ने का सामना करना पड़ा। भाजपा को राजनीतिक जीत का काफी हद तक श्रेय राहुल को ‘पप्पू’ के रूप में प्रस्तुत करने, उनकी बिना सोचे-समझे की गई टिप्पणियों और महत्वपूर्ण क्षणों में अकारण गायब रहने को मिला है। 2019 के बाद लगता है उन्होंने खुद का पुनराविष्कार कर लिया है। पिछले दो दशकों में भारत में सार्वजनिक बहसों में मुद्दों की जगह व्यक्तियों ने ले ली है।

भारत जोड़ो यात्रा की सफलता के बाद, राहुल ने वर्तमान नहीं तो भविष्य का नेता बनने के लिए मोदी के खिलाफ टकराव का रास्ता चुना है। राजनीतिक रणनीतियों में निंदा का शब्द भंडार पीड़ित होने की शब्दावली में जहर घोल रहा है और लोकतांत्रिक विमर्श को अपवित्र कर रहा है।

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