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ब्लॉग: बिहार में अटकलों का बाजार गर्म, फिर से हो सकती है पलटी मार सियासत

By एस पी सिन्हा | Updated: September 26, 2023 17:07 IST

क्या बिहार में फिर पलटी मारेगी सियासत, क्या बिहार में फिर बदेलगा हवा का रुख? यह सवाल बिहार की सियासत में लगातार चर्चाओं में है। हालांकि बिहार की सियासत को समझने वाले मानते हैं कि नीतीश कुमार राजद के दबाव में हैं।

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ठळक मुद्देक्या बिहार में फिर पलटी मारेगी सियासत, क्या बिहार में फिर बदेलगा हवा का रुख? बिहार की सियासत को समझने वाले मानते हैं कि नीतीश कुमार राजद के दबाव में हैंमाना जा रहा है कि सत्ता की सियासत में नीतीश की हनक अब कमजोर पड़ती हुई दिखाई दे रही है

बिहार में क्या फिर से पलटी मार की सियासत होगी? क्या बिहार में फिर हवा का रुख बदल सकता है? यह सवाल बिहार की सियासत में लगातार चर्चाओं में है। हालांकि बिहार की सियासत को समझने वालों का मानना है कि नीतीश कुमार राजद के दबाव में हैं। उन पर तेजस्वी यादव को जल्द से जल्द मुख्यमंत्री जल्दी बनाने का दबाव है।

ऐसे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राजनीतिक रूप से घिर चुके हैं। एक तरफ भाजपा लगातार उन पर हमला बोल रही है तो दूसरी ओर राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव का राजनीतिक दबाव अलग से है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि अब नीतीश की हनक भी सत्ता में कमजोर पड़ती दिख रही है।

ऐसे में सियासी चक्रव्यूह में फंसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन दिनों लगातार लालू यादव के आवास का चक्कर काट रहे हैं। वह भी बिना टाइम लिये या बात किये। आखिरकार नीतीश अचानक से लालू आवास क्यों पहुंच जा रहे हैं? जो राजनीतिक गलियारे में यह चर्चा का विषय बन गया है।

सवाल खड़ा होने लगा कि लालू जब पटना में नहीं थे तो साहब राबड़ी आवास क्या करने गए थे? इतनी जल्दबाजी क्या थी? क्या राबड़ी आवास कोई बड़ा फैसला लेने गए थे? दरअसल, राजद ने नीतीश को लोकसभा चुनाव 2024  के लिए  विपक्षी एकता का काम सौंपा। नीतीश ने इसे भी मनोयोग से किया भी और पटना में 15 विपक्षी दलों को जुटा कर अपना यह टास्क पूरा कर दिखाया। इसके लिए उन्हें पीएम पद की दावेदारी त्यागनी पड़ी।

नीतीश ने यहां तक घोषणा कर दी कि साल 2025 का बिहार विधानसभा चुनाव तेजस्वी यादव के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। इस बीच नीतीश पर राजद का दबाव बढ़ता जा रहा है कि वे तेजस्वी यादव के लिए जितनी जल्दी हो, कुर्सी खाली कर दें। ऐसे में कहा जा रहा है कि बिहार में लालू प्रसाद और नीतीश कुमार के बीच शह- मात का खेल चल रहा है।

नीतीश के 16 सांसद अभी लोकसभा में हैं, जबकि राजद का कोई प्रतिनिधि लोकसभा में नहीं है। ऐसे में इंडिया गठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर मतभेद हो सकते हैं। नीतीश ने इंडिया महागठबंधन बनाने में पूरा जोर लगा दिया था। वहीं उन्हें पीएम पद की उम्मीदवारी भी छोड़नी पड़ी तो संयोजक का पद भी हासिल नहीं हुआ। गठबंधन होने पर सीटों के बंटवारे की बात होनी है, लेकिन राजद और जदयू के बीच सीटों का बंटवारा नहीं हुआ है।

अब अगर सीट शेयरिंग होता है तो नीतीश के सबसे ज्यादा लोकसभा में प्रतिनिधित्व होने के कारण उनको हानि उठानी पड़ सकती है। कांग्रेस बिहार में 10 सीटों के लिए ताल ठोक रही है तो राजद चाहता है कि वो और जदयू समान सीट पर लड़े। नीतीश इस मुद्दे पर समझौता के पक्ष में नहीं हैं। वे अपनी सीट खोना नहीं चाहते हैं। जबकि लालू यादव पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर वे अपनी बात मनवाने की कोशिश शायद कर रहे हैं।

नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद पर प्रेशर बढ़ा दिया है। ऐसे में नीतीश के एनडीए में शामिल होने के कयास ने बिहार के राजनीतिक तापमान को और गर्म कर दिया है। सबसे बड़ा सवाल है कि क्या नीतीश के दबाव में आएंगे लालू? सियासी दाव पेंच खेले जाने लगे हैं। पंडित दीनदयाल की जयंती में जाना और पूर्व निर्धारित कैथल के महाजुटान में नहीं जाने से इन अटकलों को बल मिला है कि वह एक बार फिर पाला बदल सकते हैं।

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